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प्रेरणादायीः तमाम उतार-चढ़ाव झेले, मगर गिरने नहीं दी छात्रसंख्या

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⏩ बागेश्वर के प्रधानाध्यापक महेश पंत के जुनून व जज्बे का कमाल
⏩ शिक्षक दिवस पर पढ़िये विशेष आलेख

दीपक पाठक, बागेश्वर
अगर समर्पण भाव से काम करने का जज्बा हो, तो निश्चित ही सफलता मिलती है और व्यक्ति का काम प्रेरणादायी बन जाता है, जिससे वह आदर्श के रूप में सामने आता है। ऐसा ही कुछ जज्बा लेकर सालों-साल से कार्य करते आ रहे शिक्षक महेश पंत हैं, जो बागेश्वर जिले के राजकीय जूनियर हाईस्कूल भगरतोला में प्रधानाध्यापक हैं और बच्चों व विद्यालय के उत्थान के जुनून के साथ अनवरत सेवा में जुटे हैं। जब आज सरकारी विद्यालयों में छात्र संख्या गिर रही है, ऐसे में उन्हीं की मेहनत का परिणाम है कि जिले में सर्वाधिक छात्रसंख्या वाला राजकीय जूनियर हाईस्कूल भगरतोला है, जिसे उन्होंने सालों से बरकरार रखा है।

राजकीय जूनियर हाईस्कूल भगरतोला वर्तमान में जिले के सर्वाधिक छात्र संख्या वाला जूनियर हाईस्कूल है। सिर्फ इसी बार नहीं, बल्कि यह सिलसिला पिछले कई सालों से चला आ रहा है। इसका श्रेय विद्यालय के प्रधानाध्यापक महेश पंत को जाता है। हो भी क्यों नहीं, शिक्षक महेश पंत विद्यालय व बच्चों के प्रति समर्पित जो हैं। अभिभावकों से घर-घर जाकर विद्यालय व बच्चों के उत्थान के बारे में मंत्रणा करना और नये-नये क्रियाकलाप संचालित कर बच्चों का चहुंमुखी विकास का प्रयास करना उनकी आदत में शुमार है। उनके द्वारा समय-समय पर अभिभावकों से बच्चों व विद्यालय के उत्थान के लिए समय-समय पर सुझाव लिये जाते हैं और सुझावों के अनुसार ही नये-नये क्रियाकलाप किए जाते रहे हैं। सुचारू पठन-पाठन के साथ ही किचन गार्डन, दीवार पत्रिका, बाल सभा, योगा, व्यायाम, समय की पाबंदी, अनुशासन इस विद्यालय की खासियत हंै। उनकी मेहनत का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि जब उन्होंने विद्यालय ज्वाइन किया तो उस वक्त छात्रसंख्या महज 41 थी और बढ़ते-बढ़ते वर्ष 2011-12 के सत्र में विद्यालय की छात्र संख्या 198 पहुंच गई। वह भी तब जब आसपास प्राइवेट स्कूल खुलने और इंटर कालेज होने से प्रतिस्पर्धा बढ़ी। उपलब्धि को देखते हुए शिक्षक पंत को शिक्षक दिवस पर देहरादून में होने वाले शिक्षक संवाद में अपनी बात रखने का मौका इस बार मिल रहा है।

दरअसल, जूनियर हाईस्कूल भगरतोला में शिक्षक महेश पंत ने वर्ष 2004 से सेवा शुरू की। वर्ष 2005 में यह विद्यालय टोकन में आया और वर्ष 2007 में इसे पूर्ण वित्त के अंतर्गत लिया गया। यह विद्यालय तब से लेकर आज तक जिले का सर्वाधिक छात्रसंख्या वाला अशासकीय/शासकीय जूनियर हाईस्कूल रहा। शासन ने इसे वर्ष 2014 में अशासकीय से शासकीय बना दिया। शिक्षक महेश पंत की तैनाती के समय इस विद्यालय की छात्र संख्या महज 41 थी। वर्ष 2011-12 में इसकी छात्रसंख्या बढ़कर 198 हो गई। फिर आसपास कई प्राइवेट स्कूल खुले, जिससे छात्रसंख्या को लेकर इन विद्यालयों के बीच प्रतिस्पर्धा सी हो गई, लेकिन शिक्षक महेश पंत ने अभिभावकों व जनप्रतिनिधियों से संपर्क साधा और इस विद्यालय में बच्चों को पढ़ाने के लिए प्रेरित करते हुए छात्र संख्या ठीकठाक बरकरार रखी। नजदीक ही प्राइवेट स्कूल व इंटर कालेज होने के बावजूद इस सत्र में इस विद्यालय की तीन कक्षाओं की छात्रसंख्या 120 रही है। वर्ष 2006 से लगातार विद्यालय की छात्र संख्या 100 से अधिक ही रही है। ऐसे में सरकारी विद्यालयों में आज घटती छात्रसंख्या को बढ़ाने के लिए प्रधानाध्यापक महेश पंत के अनुभवों का लाभ उठाया जा सकता है।

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SOURCE: YOUTUBE SHORTS
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