असौं के पास मिला शव, परिवार का रो-रोकर बुरा हाल
सीएनई रिपोर्टर, बागेश्वर : कपकोट के शिवालय क्षेत्र में सरयू नदी में बह गए मासूम राकेश सिंह का शव आखिरकार घटना के पांच दिन बाद शुक्रवार को बरामद हो गया। कस्तूरबा गांधी आवासीय विद्यालय के सामने असौं गांव के समीप नदी में शव मिलने की खबर से पूरे क्षेत्र में शोक की लहर दौड़ गई। बालक के ताऊ खीम सिंह ने शव मिलने की पुष्टि की है। पांच दिनों से अपनों के लौटने की आस लगाए बैठे परिवार की उम्मीदें शुक्रवार को हमेशा के लिए टूट गईं और घर में एक बार फिर चीख-पुकार मच गई।
जानकारी के अनुसार, कपकोट तहसील के लाहुर गांव निवासी राकेश सिंह, पुत्र नारायण सिंह, बीते 20 जुलाई को अपनी मां कमला देवी के साथ शिवालय स्थित शिव मंदिर गया था। मंदिर परिसर के पास सरयू नदी से पानी भरने के दौरान मासूम का पैर फिसल गया और वह तेज बहाव में समा गया। घटना के बाद स्थानीय लोगों, पुलिस और बचाव दल ने तत्काल खोजबीन शुरू की, लेकिन उस दिन उसका कोई सुराग नहीं मिल सका।

घटना के बाद सोमवार शाम कमला देवी अपने ससुर के साथ गांव लौट गई थीं, जबकि मंगलवार को बालक के पिता भी घर पहुंच गए। तब से लेकर शुक्रवार तक गांव में परिजनों को सांत्वना देने वालों का लगातार तांता लगा रहा। हर गुजरते दिन के साथ परिवार की बेचैनी और दर्द बढ़ता गया। शुक्रवार को शव मिलने की सूचना मिलते ही पूरे परिवार का धैर्य टूट गया। सबसे अधिक बुरा हाल मां कमला देवी और अन्य स्वजनों का है, जिनकी चीख-पुकार से माहौल गमगीन हो उठा।
शुक्रवार को चलाए गए सघन सर्च अभियान के दौरान कस्तूरबा गांधी आवासीय विद्यालय के सामने असौं गांव के पास नदी में बालक का शव दिखाई दिया। पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर पंचनामा भरने के बाद पोस्टमार्टम की प्रक्रिया शुरू कर दी है।
इस अभियान में एनडीआरएफ के जवान राजेंद्र रावत, टीका सिंह कार्की, नवीन कांडपाल, पंकज कुमार और नवीन गोस्वामी सहित पुलिस एवं अन्य बचाव दल के सदस्य लगातार पांच दिनों तक दिन-रात जुटे रहे। कठिन परिस्थितियों के बीच चलाए गए अभियान के बाद आखिरकार मासूम का शव बरामद किया जा सका।
उपजिलाधिकारी अनिल चन्याल ने बताया कि पोस्टमार्टम की कार्रवाई पूरी होने के बाद शव परिजनों को सौंप दिया जाएगा। वहीं क्षेत्रीय विधायक सुरेश गढ़िया ने गहरी संवेदना व्यक्त करते हुए कहा कि इस दुख की घड़ी में पीड़ित परिवार को हरसंभव सहायता उपलब्ध कराने का प्रयास किया जाएगा।
मासूम राकेश की दर्दनाक मौत ने पूरे कपकोट और बागेश्वर जिले को झकझोर दिया है। पांच दिनों तक उम्मीद और इंतजार के बाद सरयू नदी ने जब मासूम का शव लौटाया, तो हर आंख नम हो उठी और क्षेत्र शोक में डूब गया।



