दुष्कर्म के आरोप साबित नहीं कर सका अभियोजन
कोर्ट में पीड़िता और उसकी मां के बदले बयान
ब्रेकिंग न्यूज | बागेश्वर : जिले से एक चर्चित पॉक्सो मामले में अदालत ने महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। चार वर्षों तक नाबालिग से दुष्कर्म करने और शादी का झांसा देकर उसका यौन शोषण करने के आरोपों का सामना कर रहे आरोपी सूरज कुमार को विशेष सत्र न्यायाधीश (पॉक्सो) पंकज तोमर की अदालत ने सभी आरोपों से दोषमुक्त कर दिया। न्यायालय ने अपने निर्णय में स्पष्ट कहा कि अभियोजन पक्ष आरोपों को संदेह से परे सिद्ध करने में पूरी तरह असफल रहा और उपलब्ध साक्ष्य दोष सिद्ध करने के लिए पर्याप्त नहीं हैं।
2025 में दर्ज हुआ था गंभीर धाराओं में मुकदमा
अदालती अभिलेखों के अनुसार, बागेश्वर कोतवाली में 22 मार्च 2025 को आरोपी सूरज कुमार के खिलाफ भारतीय दंड संहिता की धारा 376(3) तथा पॉक्सो अधिनियम की धारा 5(ठ)/6 के तहत मुकदमा दर्ज किया गया था। शिकायत में आरोप लगाया गया था कि वर्ष 2021 से मार्च 2025 के बीच आरोपी ने शादी का झांसा देकर कथित रूप से नाबालिग के साथ कई बार दुष्कर्म किया।

अदालत में पीड़िता ने बदल दिया अपना बयान
मामले की सुनवाई के दौरान घटनाक्रम ने उस समय नया मोड़ ले लिया, जब पीड़िता ने अदालत के समक्ष अपने पूर्व आरोपों का समर्थन नहीं किया। उसने न्यायालय में स्पष्ट रूप से कहा कि आरोपी ने उसके साथ कभी कोई गलत कार्य नहीं किया। इतना ही नहीं, पीड़िता ने यह भी कहा कि मजिस्ट्रेट के समक्ष दर्ज कराया गया उसका पूर्व बयान उसकी स्वेच्छा से नहीं था।
मां ने भी पुलिस कार्रवाई पर उठाए सवाल
मामले में पीड़िता की मां ने भी अदालत में ऐसा बयान दिया, जिससे अभियोजन पक्ष का मामला और कमजोर पड़ गया। उन्होंने न्यायालय को बताया कि आरोपी कभी उनके घर नहीं आया और उन्होंने इस संबंध में कोई तहरीर भी नहीं लिखवाई थी। उनका कहना था कि पुलिस ने उनसे केवल सादे कागज पर अंगूठा लगवा लिया था।
मेडिकल और एफएसएल रिपोर्ट से भी नहीं मिला समर्थन
सुनवाई के दौरान न्यायालय ने मेडिकल रिपोर्ट और फोरेंसिक विज्ञान प्रयोगशाला (एफएसएल) की रिपोर्ट का भी विस्तृत परीक्षण किया। मेडिकल जांच में पीड़िता के शरीर पर किसी प्रकार की चोट या हिंसा के संकेत नहीं मिले। वहीं एफएसएल रिपोर्ट में भी आरोपी के विरुद्ध कोई वैज्ञानिक साक्ष्य सामने नहीं आया।
आयु का प्रमाण भी पेश नहीं कर सका अभियोजन
अदालत ने अपने निर्णय में यह भी उल्लेख किया कि अभियोजन पक्ष पीड़िता की आयु का विधिसम्मत और विश्वसनीय प्रमाण प्रस्तुत करने में भी विफल रहा। पॉक्सो अधिनियम के मामलों में आयु का प्रमाण अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है, लेकिन इस मामले में वह भी न्यायालय के समक्ष स्थापित नहीं हो सका।
कोर्ट का फैसला: आरोप साबित नहीं हुए
सभी दस्तावेजी साक्ष्यों, मेडिकल रिपोर्ट, एफएसएल रिपोर्ट तथा गवाहों के बयानों का परीक्षण करने के बाद विशेष सत्र न्यायाधीश (पॉक्सो) पंकज तोमर ने निष्कर्ष निकाला कि अभियोजन पक्ष आरोपी के विरुद्ध लगाए गए आरोपों को संदेह से परे सिद्ध नहीं कर पाया। इसी आधार पर अदालत ने आरोपी सूरज कुमार को सभी आरोपों से दोषमुक्त कर दिया।
निर्णय के साथ ही न्यायालय ने आरोपी का व्यक्तिगत बंधपत्र निरस्त करते हुए नियमानुसार आवश्यक अन्य आदेश भी पारित किए।



