HomeUttarakhandAlmoraAn Animal Rescuer Bhuvan Lal : अपनी जान पर खेल जाता है...

An Animal Rescuer Bhuvan Lal : अपनी जान पर खेल जाता है यह शख्स

An Animal Rescuer Bhuvan Lal Tamta

ADVERTISEMENTS

एक हजार से अधिक सांपों सहित तमाम वन्य जीवों का कर चुके रेस्क्यू

कई बार मौत से भी हुआ सामना

वन्य जीव बचावकर्ता वन दरोगा भुवन लाल टम्टा से खास बातचीत
भुवन लाल टम्टा की पत्रकार दीपक मनराल से हुई बातचीत पर आधारित
An Animal Rescuer Bhuvan Lal : अपनी जान पर खेल जाता है यह शख्स
An Animal Rescuer Bhuvan Lal : अपनी जान पर खेल जाता है यह शख्स

An Animal Rescuer Bhuvan Lal Tamta : वन्य भूमि में इंसानों के लगातार बढ़ते अतिक्रमण, भोजन की कमी व कई अन्य प्राकृतिक कारणों से वन्य जीव इंसानी इलाकों में दाखिल होते हैं। जिसके बाद मानव—वन्य जीव संघर्ष शुरू हो जाता है। इस संघर्ष में कभी इंसानों तो कभी वन्य जीवों को अपनी जान भी गंवानी पड़ जाती है। इन हालातों में एक Animal Rescuer के ऊपर बड़ी जिम्मेदारी होती है। बेजुबानों की जान बचाने को एक बचाकर्ता का कई बार खुद मौत से आमना—सामना भी हो जाया करता है। ऐसे ही एक शख्शियत में शामिल हैं अल्मोड़ा वन विभाग में कार्यरत वन दरोगा भुवन लाल टम्टा। जिन पर एक बार खूंखार गुलदार और जहरीले सांप का प्राणघातक हमला हो चुका है। संयोग से दोनों ही बार इन्होंने मौत को चकमा दे दिया।

भुवन लाल टम्टा संक्षिप्त परिचय (Animal Rescuer Bhuvan Lal Tamta)

🚨 अल्मोड़ा की नाक कट गई!
विदेशी पर्यटक ने दिखाई हकीकत
Almora News
पूरी रिपोर्ट देखने के लिए यहाँ क्लिक करें ▶
CNE - Creative News Express

उल्लेखनीय है कि भुवन लाल टम्टा (Bhuvan Lal Tamta) अल्मोड़ा वन प्रभाग में कार्यरत हैं। फिलहाल वह इन दिनों लोधिया में गेट ड्यूटी कर रहे हैं। वह अल्मोड़ा में ही अपने परिवार के साथ रहते हैं। लोग इन्हें एक एनिमल रेस्क्यूअर के रूप में जानते हैं। जब भी कहीं कोई जहरीला सांप दाखिल होता है या गुलदार की आवाजाही देखी जाती है तो सबसे पहले भुवन लाल को ही विभाग याद करता है।

सेवाकाल की यात्रा

एक बातचीत में भुवन टम्टा ने बताया कि उनकी प्रथम नियुक्ति वर्किंग प्लान के जारिए 1989 में लखनऊ के प्राणि उद्यान में हुई थी। इसके बाद वे 1993 में अल्मोड़ा आ गए। जहां इन्होंने कुछ समय अपनी शैक्षिक डिग्रियां प्राप्त की। जिसके उपरांत 1995 में वन निगम हल्द्वानी में कार्यरत हुए। फिर 1998 में ​वर्किंग प्लान में अल्मोड़ा वापस आ गए। साल 2000 में उत्तर प्रदेश के कानपुर गए। कानपुर प्राणी उद्यान में ही इन्होंने तब सांपों का रेस्क्यू करने का हुनर सीखा।

कई बार जान पर बन आई, मौत को किया पराजित

भुवन लाल टम्टा बताते हैं कि इंसानी आबादी में घुस आने वाले वन्य जीवों को सुरक्षित पकड़ना एक बड़ी चुनौती होती है। यह सब इतना आसान नहीं होता, जितना दिखाई देता है। किसी जानवर को गोली मार उसकी जान ले लेना आसान है। हालांकि यदि उसे सही सलामत पकड़ पुन: उसके प्राकृतिक आवास में छोड़ना है। तो इसके लिए काफी मशक्कत करनी पड़ती है। उन्होंने बताया कि एक बार जहरीले सांप, एक बार गुलदार व एक बार टाइगर के आक्रमण में वे बाल—बाल बचे हैं। इनमें से गुलदार का हमला सबसे घातक था।

24 जून, 2021 की वह भयानक घटना

अल्मोड़ा जनपद अंतर्गत विकासखंड द्वाराहाट के सदूरवर्ती ईड़ा के मनैगैर में एक खेत में छुपे गुलदार के रेस्क्यू के दौरान भयानक हादसा हो गया। जब भुवन लाल टम्टा उसको बेहोश करने के लिए ट्रें​कुलाइज गन का इस्तेमाल कर रहे थे, तभी गुलदार ने अचानक उन पर प्राणघातक हमला बोल दिया। जिससे भुवन लाल वहीं जमीन पर गिर गए। इसके बावजूद उन्होंने हिम्मत नहीं हारी और संघर्ष किया। आस—पास मौजूद लोगों ने पत्थर मार गुलदार को भगा दिया और भुवन लाल की जान बच गई। इसके बावजूद वह काफी घायल हो गए थे। जिसके चलते उन्हें रानीखेत अस्पताल में उपचार भी करवाना पड़ा। उस घटना की स्मृति और चिन्हे आज भी बने हुए हैं।

सल्ट के कूपी गांव में टाइगर रेस्क्यू

सितंबर, 2022 में सल्ट के कूपी गांव में एक आदमखोर टाइगर को सुरक्षित पिंजरे में कैद करने में भी मोहन लाल टम्टा ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। जिस पर तत्कालीन वन क्षेत्राधिकारी जौरासी वन क्षेत्र विक्रम सिंह कैड़ा ने उन्हें प्रशस्ति पत्र भी प्रदान किया था। चूंकि इस बाघ ने कूपी गांव में एक महिला की हत्या कर दी थी। जिस कारण पूरा गांव बहुत गुस्से में था। भुवन लाल बताते हैं उस समय एक ओर उन्हें आदमखोर बाघ से लड़ना था, वहीं दूसरी ओर ग्रामीणों के गुस्से से भी वह भयभीत थे। गांव वाले इतने क्रोध में थे कि यदि वह बाघ को नहीं पकड़ पाते तो स्थिति भयानक रूप ले सकती थी।

साल 2018 में सांप ने जकड़ लिया था

भुवन लाल ने बताया कि साल 2018 में अल्मोड़ा के भर्ती आफिस में एक विशाल जहरीला सर्प घुस आया था। उसके रेस्क्यू के दौरान सर्प ने उनके हाथ में ही कुंडली मार ली। तब वह काफी डर गये थे। जिसका कारण यह था कि यह सांप उनको डसने की स्थिति में आ चुका था। संयोग से वहां मौजूद सहयोगियों ने प्रयास कर सांप की पकड़ ढीली कर दी और उनकी जान किसी तरह तब भी बच गई थी।

मिले कई सम्मान, लेकिन बड़े पुरस्कार के हकदार

अलबत्ता, निष्कर्ष रूप में कहा जा सकता है कि वन्य जीवों के संरक्षक को आज तक वह सम्मान नहीं मिल पाया, जिसके वे वास्तविक रूप में हकदार हैं। इन्हें अब तक ढेरों पुरस्कार व प्रशस्ति पत्र मिले हैं, लेकिन पता नहीं किन कारणों से राष्ट्रपति के हाथों मिलने वाले पदक से यह अंतिम समय में चूक गए। इनके प्रशंसकों को उम्मीद है कि एक दिन राज्य व राष्ट्रीय स्तर पर भुवल लाल टम्टा को सम्मान जरूर मिलेगा।

अल्मोड़ा: बलि के लाए गए 03 बकरे वापस लौटाए

ADVERTISEMENTS
🔴 EXCLUSIVE: भीषण बस हादसा!

हल्द्वानी से पिथौरागढ़ जा रही बस पलटी, मौके पर मची चीख-पुकार!

हादसे की पूरी वीडियो और रेस्क्यू अभियान देखने के लिए ऊपर क्लिक करें।

यूट्यूब पर देखें
⚠️ बागेश्वर में मौसम का ‘रौद्र’ रूप

पहाड़ों में भारी बारिश के बाद क्या हैं हालात? सीधे ग्राउंड ज़ीरो से देखें यह विशेष वीडियो रिपोर्ट।

▶ वीडियो देखने के लिए क्लिक करें
SOURCE: YOUTUBE SHORTS
Deepak Manral
Deepak Manralhttp://creativenewsexpress.com
तीन दशकों के करीब का कार्यानुभव रखने वाले दीपक मनराल पत्रकारिता जगत का एक सम्मानित नाम हैं। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत वर्ष 1996 में एक त्रैमासिक पत्रिका के सहयोगी संपादक के रूप में की थी। बीते 25 वर्षों में उन्होंने अमर उजाला, दैनिक भास्कर, दैनिक आज, उत्तरांचल दीप और चारधाम टाइम्स जैसे प्रतिष्ठित समाचार पत्रों में 'ब्यूरो प्रमुख' की महत्वपूर्ण जिम्मेदारियाँ निभाई हैं। वर्तमान में वे 'गंगोत्री अक्षर उजाला पोस्ट' के संपादक हैं और सीएनई (CNE) मीडिया हाउस के संस्थापक व स्वामी के रूप में डिजिटल मीडिया को नई दिशा दे रहे हैं। अपनी निष्पक्ष और ईमानदार पत्रकारिता के लिए पहचाने जाने वाले मनराल आज भी प्रतिदिन 'ग्राउंड ज़ीरो' से जुड़कर सक्रिय पत्रकारिता कर रहे हैं।
RELATED ARTICLES

1 Comment

Leave a reply

Please enter your comment!
Please enter your name here

Most Popular

Recent Comments