त्योहारों से लोक कलाकारों को मिला नया मंच
सीएनई रिपोर्टर, अल्मोड़ा। कुमाऊं की समृद्ध लोक संस्कृति, पारंपरिक त्योहारों और लोक कलाओं के संरक्षण एवं संवर्धन के उद्देश्य से महिला प्रेरणा एवं उत्थान समिति पिछले कई वर्षों से लगातार विभिन्न सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन कर रही है। संस्था के प्रयासों से न केवल क्षेत्र की सांस्कृतिक विरासत को नई पीढ़ी तक पहुंचाने का कार्य हो रहा है, बल्कि स्थानीय लोक कलाकारों को अपनी प्रतिभा प्रदर्शित करने के लिए नियमित मंच भी उपलब्ध हो रहा है।

समिति वर्षभर कुमाऊं के प्रमुख पारंपरिक पर्वों और मेलों के अवसर पर सांस्कृतिक आयोजन करती है। इनमें हरेला, फूलदेई, उत्तरायणी, नंदा देवी महोत्सव, भिटौली, देवीधुरा मेला और स्याल्दे बिखौती मेला जैसे प्रमुख पर्व शामिल हैं। इन आयोजनों में स्थानीय लोक कलाकारों को अपनी कला प्रस्तुत करने का अवसर मिलता है, जिससे उनकी आजीविका को भी मजबूती मिलती है।

लोक कलाओं को स्वरोजगार से जोड़ने की पहल
संस्था ने अपने कार्यों को केवल त्योहारों तक सीमित नहीं रखा है, बल्कि लोक कला और सांस्कृतिक अभिव्यक्तियों को भी व्यापक मंच प्रदान किया है। कुमाऊंनी होली, छोलिया नृत्य और एपण कला कार्यशालाओं जैसे कार्यक्रमों के माध्यम से महिलाओं, युवाओं और स्थानीय कलाकारों को सक्रिय रूप से जोड़ा गया है।
विशेष रूप से एपण कला प्रशिक्षण के माध्यम से पारंपरिक कला को स्वरोजगार और आजीविका से जोड़ने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल की गई है। इससे अनेक महिलाओं और युवाओं को अपनी पारंपरिक कला के माध्यम से आत्मनिर्भर बनने का अवसर मिला है।

“संस्कृति को अगली पीढ़ी तक पहुंचाना हमारा लक्ष्य” : रेखा आर्य
समिति की सचिव एवं कार्यकारी अध्यक्षा श्रीमती रेखा आर्य ने कहा कि संस्था का उद्देश्य केवल सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित करना नहीं है, बल्कि कुमाऊं की समृद्ध संस्कृति, लोक परंपराओं और लोक कलाओं को आने वाली पीढ़ियों तक सुरक्षित रूप से पहुंचाना है। उन्होंने कहा कि भविष्य में संस्था राष्ट्रीय स्तर के सांस्कृतिक आयोजनों की दिशा में भी कार्य करने का लक्ष्य लेकर आगे बढ़ रही है।
सांस्कृतिक चेतना को मजबूत कर रहे ऐसे आयोजन
समिति के सांस्कृतिक निदेशक भास्कर साह का कहना है कि इस प्रकार के कार्यक्रम सीमांत जनपदों अल्मोड़ा, पिथौरागढ़ और नैनीताल जैसे सांस्कृतिक रूप से समृद्ध क्षेत्रों में सांस्कृतिक चेतना को मजबूत करने का कार्य कर रहे हैं। उनका मानना है कि स्थानीय कलाकारों को मंच मिलने से पारंपरिक कलाओं के संरक्षण को नई ऊर्जा मिलती है।
समिति द्वारा पिछले वर्षों में किए गए प्रयास यह साबित करते हैं कि गैर सरकारी संगठन समाज में संस्कृति के संरक्षण, संवर्धन और प्रसार में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। महिला प्रेरणा एवं उत्थान समिति की यह पहल न केवल कुमाऊं की सांस्कृतिक धरोहर को सहेजने का कार्य कर रही है, बल्कि स्थानीय महिलाओं, युवाओं और लोक कलाकारों को अपनी सांस्कृतिक पहचान के साथ आगे बढ़ने का सशक्त अवसर भी प्रदान कर रही है।



