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धनतेरस : दीपावली आगमन का पूर्व संदेश, अमृत कलश के साथ प्रकट हुए थे भगवान धनवंतरी!

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सीएनई, अल्मोड़ा
प्रतिवर्ष कार्तिक माह के कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी का दिन धनतेरस के रूप में मनाया जाता है। यह धनतेरस का पर्व दीप पर्व दीपावली के आगमन का पूर्व संदेश देता है। धनतेरस से अगले करीब चार—पांच दिनों तक दीपावली महापर्व चलता है।
धनतेरस पर भगवान धनवंतरि, मां लक्ष्मी और भगवान कुबेर की पूजा लाभदायी मानी गई है। भारतीय संस्कृति में जीवन से जुड़े हर पहलू का ध्यान रखा गया है। इसी में स्वास्थ्य पर खासा जोर दिया गया है। तो धनतेरस को स्वास्थ्य से जोड़कर देखा गया है। भारतीय संस्कृति के अंतर्गत सुखों में तंदरुस्त स्वास्थ्य का पहला स्थान जबकि धन—दौलत का दूसरा स्थान माना गया है। तभी खुशी के पर्व दीपावली से पहले धनतेरस मनाया जाता है, ताकि पहले स्वास्थ्य सही करना चाहिए। माना जाता है कि भगवान धनवंतरी भगवान विष्णु के अंशावतार हैं। भगवान विष्णु ने जगत में चिकित्सा विज्ञान को फैलाने के लिए धनवंतरी के रुप में अवतार लिया था। शास्त्र बताते हैं कि समुद्र मंथन में कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी के दिन भगवान धनवंतरी हाथों में अमृत कलश के साथ प्रकट हुए थे। तभी त्रयोदशी के दिन धनतेरस का त्योहार मनाया जाता है।
धनतेरस का दिन सुखकृसमृद्धि का भी द्योतक है। इसी कारण इस दिन धातुओं समेत नाना प्रकार की नई चीजें खरीदी जाती हैं। इस दिन नई—नई चीजों की खरीदारी को बहुत शुभ मानी जाती है। प्रचलित मान्यताओं के अनुसार धनतेरस पर क्रय की गई चीजों में सालभर में तेरह गुने तक बढ़ोतरी हो जाती है।

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