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बागेश्वर न्यूज : वो खड़िया से सोना बटोर रहे, इनकी सिर की छत पर मंडरा रहा खतरा

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बागेश्वर। कांडा में नियमों को ताक पर रखकर खड़िया खनन किया जा रहा है। जिससे सबसे अधिक पर्यावरण को नुकसान पहुंच रहा है। इस ओर न तो शासन और ना ही प्रशासन कोई कार्रवाई कर रहा है। वहीं लगातार हो रहे खनन से गांव पर भी खतरा मंडराने लगा है। कांडा के बसेत गांव में जगनाथ मिनरल के नाम से माइन चलती है। आरोप है कि माइन में तीन तीन जेसीबी मशीनों से पहाड़ का सीना छलनी किया जा रहा है। हालत ये है कि आस पास के गांव भी भूस्खलन की जद में आ गये हैं। ग्रामीणों का कहना है कि वे शिकायत कर कर के थक चुके हैं, लेकिन जिम्मेदार लोगों के कान में जूं तक नहीं रेंग रही है।

ग्रामीण दीपक वर्मा, किशन, पार्वती देवी, मोहनी देवी ने बताया है कि इस माइन से बसेत, सुनार गांव और बजीना को सबसे ज्यादा खतरा है। भूस्खलन धीरे— धीरे गांव की ओर बढ़ रहा है। माइन मालिक को खड़िया खोदने की इतनी जल्दी है की पुराने गड्डे नहीं भरे जा रहे हैं। कुछ बोलो तो जान से मारने की धमकी मिल रही है। एडवोकेट महीप किशोर ने कहा कि गांव के आस पास की ज़मीन में लगातार गहरे गड्डे हो रहे हैं। ग्रामीणों के मकानों में दरारे आ रही है। थोड़ी भी बारिश में जन हानि का भय बना रहता है। नियमों के अनुसार खुदान भी नहीं हो रहा है। जिससे भूस्खलन का खतरा बढ़ रहा है।

जिला पंचायत सदयस्य सिमकूना पूजा आर्य ने कहा कि पूरी पुस्तैनी ज़मीन को माइन ने अपनी जद में ले लिया है। सरकार स्वरोजगार की बात करती है, लेकिन खेती की ज़मीन को माइनिंग के लिए लीज में देना कितना वाज़िब है। आज भी यहां के लोग दो जून की रोटी जुटाने के लिए हाड तोड़ मेहनत ही करता है। खड़िया माइन का लोकल स्तर पर कोई विशेष फायदा नहीं मिल रहा है। इसका फायदा या तो हल्द्वानी में बैठे लोगों को या फिर नेपाल के मजदूरों को ही मिल रहा। यहां पर किसान खेती भी करे तो कैसे करे, सारी सिंचाई गुले भी इन लोगों ने ध्वस्त कर दिये है। तहसील परसिर में शिकायत करते करते परेशान हो गये है। कोई सुनने वाला ही नहीं है।
जिस तरह खनन से पर्यावरण को नुकसान हो रहा है उसको बचाने के लिए अब तक कोई ठोस कदम नहीं उठाए जा रहे है। वहीं तसहीलदार मैनपाल सिंह ने कहा कि उन्हें इस संबंध में कोई जानकारी नहीं है, अगर माइन की वजह से गांव के घरों में दरारे व भूस्खलन हो रहा है तो जांच का विषय है। गांव में टीम भेज कर जांच करायी जाएगी। मालूम हो इन माइनों पर नजर रखने वाला कोई नहीं है। इन माइनों में रात बेरात मशीने चलती रहती है। ना कोई नियम ना कोई कायदा बस जिले का खनिज फाउंडेशन भरता रहें सरकार को और क्या लेना। पहाड़ खुदे या फिर लुटे।

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