हरियाणा से आरोपी गिरफ्तार; अल्मोड़ा पुलिस की बड़ी कार्रवाई
आतंकवाद के फर्जी केस में फंसाने की धमकी देकर 21 दिन तक बनाया बंधक
पीड़ित से 9 ट्रांजैक्शनों में ऐंठे 8.80 लाख रुपये
CNE REPORTER, अल्मोड़ा। डिजिटल हाउस अरेस्ट के नाम पर आतंकवाद के फर्जी मामले में फंसाने की धमकी देकर एक व्यक्ति से 8.80 लाख रुपये की साइबर ठगी करने वाले आरोपी को अल्मोड़ा पुलिस ने हरियाणा से गिरफ्तार कर बड़ी सफलता हासिल की है। आरोपी ने खुद को पुलिस और जांच एजेंसियों का अधिकारी बताकर पीड़ित को कई दिनों तक मानसिक दबाव में रखा और जांच के नाम पर लाखों रुपये अपने खातों में ट्रांसफर करा लिए। तकनीकी साक्ष्यों और लगातार निगरानी के आधार पर पुलिस ने आरोपी को उसके घर से गिरफ्तार कर लिया।
ग्राम धारड़, थाना भतरौजखान निवासी जीवन सिंह रावत ने राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल पर ऑनलाइन शिकायत दर्ज कराई थी। शिकायत में बताया गया कि अज्ञात व्यक्तियों ने स्वयं को पुलिस एवं जांच एजेंसी का अधिकारी बताकर उन्हें आतंकवाद से जुड़े एक फर्जी मामले में नाम आने का भय दिखाया। इसके बाद उन्हें तथाकथित “डिजिटल हाउस अरेस्ट” में रखकर मानसिक रूप से प्रताड़ित किया गया और जेल भेजने की धमकी देकर विभिन्न ऑनलाइन माध्यमों से कुल 8 लाख 80 हजार रुपये अपने खातों में ट्रांसफर करा लिए।

मामले की गंभीरता को देखते हुए थाना भतरौजखान में भारतीय न्याय संहिता की धारा 318(4), 319(2) और 308(6) के तहत मुकदमा दर्ज किया गया।
वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक चंद्रशेखर घोड़के के निर्देशन में मामले के खुलासे के लिए विशेष पुलिस टीम गठित की गई। जांच के दौरान तकनीकी विश्लेषण, डिजिटल साक्ष्यों के संकलन और साइबर सर्विलांस के आधार पर हरियाणा के जिला सिरसा निवासी रंजोत सिंह की भूमिका सामने आई।
इसके बाद थाना भतरौजखान और साइबर टीम के समन्वय से लगातार निगरानी करते हुए 22 जुलाई 2026 को हरियाणा के ग्राम जगमालवाली स्थित आरोपी के घर पर दबिश देकर उसे गिरफ्तार कर लिया गया।
ऐसे बनाया गया ‘डिजिटल हाउस अरेस्ट’ का शिकार
पुलिस जांच के अनुसार, 10 मार्च 2026 को पीड़ित के व्हाट्सएप पर एक संदेश आया। कॉल करने वाले ने खुद को एंटी टेररिज्म स्क्वॉड, पुणे का इंस्पेक्टर सुमित मिश्रा बताते हुए कहा कि उनका नाम आतंकवाद से जुड़े एक गंभीर मामले में सामने आया है। आरोपियों ने फर्जी दस्तावेज और नकली न्यायालय आदेश भेजकर गिरफ्तारी का भय पैदा किया।
इसके बाद अलग-अलग मोबाइल नंबरों से स्वयं को जांच अधिकारी बताने वाले लोग लगातार वीडियो कॉल और फोन कॉल करते रहे। पीड़ित को किसी से भी इस बारे में बात न करने, हर घंटे अपनी गतिविधियों की जानकारी देने और मोबाइल को सर्विलांस पर होने का झांसा देकर मानसिक रूप से पूरी तरह भयभीत रखा गया। यही तथाकथित “डिजिटल हाउस अरेस्ट” था।
आरोपियों ने पीड़ित से गूगल पे पर नया खाता बनवाया, अपनी ई-मेल आईडी लॉगिन कराई और वीडियो कॉल के जरिए भारतीय स्टेट बैंक तथा यूनियन बैंक ऑफ इंडिया के बैंक खातों और कार्डों को सक्रिय कराया। इसके बाद 18 मार्च से 31 मार्च 2026 के बीच जांच प्रक्रिया का बहाना बनाकर 9 अलग-अलग ट्रांजैक्शनों में कुल 8 लाख 80 हजार रुपये अपने खातों में ट्रांसफर करा लिए।
गिरफ्तार आरोपी
गिरफ्तार आरोपी की पहचान रंजोत सिंह पुत्र दर्शन सिंह, निवासी ग्राम जगमालवाली, थाना कालांवाली, जिला सिरसा (हरियाणा) के रूप में हुई है।
इन पुलिसकर्मियों ने निभाई अहम भूमिका
आरोपी की गिरफ्तारी में प्रभारी चौकी भिकियासैंण उपनिरीक्षक संजय जोशी, हेड कांस्टेबल राजाराम और हेड कांस्टेबल प्रकाश सिंह सहित थाना भतरौजखान एवं साइबर टीम के पुलिसकर्मियों ने संयुक्त रूप से महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
अल्मोड़ा पुलिस की अपील: ‘डिजिटल अरेस्ट’ जैसी कोई कानूनी प्रक्रिया नहीं होती
अल्मोड़ा पुलिस ने आमजन से अपील की है कि “डिजिटल अरेस्ट” नाम की कोई कानूनी या पुलिस प्रक्रिया अस्तित्व में नहीं है। यदि कोई व्यक्ति स्वयं को पुलिस, केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो, प्रवर्तन निदेशालय, साइबर सेल या किसी अन्य सरकारी एजेंसी का अधिकारी बताकर वीडियो कॉल, व्हाट्सएप कॉल अथवा फोन के माध्यम से डराने-धमकाने, डिजिटल अरेस्ट करने या धनराशि ट्रांसफर करने का दबाव बनाए, तो बिल्कुल भी घबराएं नहीं और किसी भी स्थिति में पैसे ट्रांसफर न करें।
ऐसी किसी भी संदिग्ध कॉल, साइबर धोखाधड़ी या ऑनलाइन ठगी की सूचना तत्काल अपने नजदीकी पुलिस थाने अथवा साइबर हेल्पलाइन नंबर 1930 पर दें।



