HomeUttarakhandAlmoraपहली बार उठी रतन सिंह बंगारी की कलम और 'मृग मरीचिका' जन्मी

पहली बार उठी रतन सिंह बंगारी की कलम और ‘मृग मरीचिका’ जन्मी

👉 अल्मोड़ा निवासी सेवानिवृत्त एडीओ (पंचायत) की पुस्तक का विमोचन
👉 पहली बार चलाई लेखनी और निकली एक से बढ़कर एक प्रेरक कहानी

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सीएनई रिपोर्टर, अल्मोड़ा: पहाड़ के वास्तविक जनजीवन, परिवेश, रहन—सहन एवं सामाजिक ​स्थितियों पर आधारित प्रेरक कहानियां लेकर आ चुकी है—‘मृग मरीचिका’। इस कहानी संग्रह का आज रविवार को अल्मोड़ा माल रोड स्थित ‘बैठक’ नामक प्रतिष्ठान में कई अतिथियों के हाथों विमोचन हुआ। कहानियां तो रोचक हैं ही, साथ ही ऐसी भाषा शैली, जो पढ़ते चले जाने को लुभाए। इसमें भी खास बात यह है कि लेखक की न तो साहित्यकार और न ही लेखक के रुप में पहचान। इससे पहले लेखन से कोई वास्ता भी नहीं। जी, हां कहानी संग्रह ‘मृग मरीचिका’ के लेखक का परिचय है— रतन सिंह बंगारी, सेवानिवृत्त सहायक विकास अधिकारी (पंचायत)। जो अल्मोड़ा नगर के सरकार की आली के निवासी हैं। (आगे पढ़िये)
जीवन संघर्ष से जन्मी कहानियां: बंगारी

मूल रुप से अल्मोड़ा जनपद के सल्ट ब्लाक के ग्राम मन्हैत गांव के निवासी एवं सेवानिवृत्त एडीओ (पंचायत) रतन सिंह बंगारी की पहली कहानी संग्रह मृग मरीचिका का प्रकाशन ‘हरेला इनोवेशन’ द्वारा किया गया है। रविवार को इसका विमोचन कार्यक्रम आयोजित हुआ। साहित्यकार त्रिभुवन गिरि की अध्यक्षता एवं कुमाउंनी मासिक पत्रिका पहरू के संपादक एडवोकेट डा. हयात सिंह रावत के संचालन में आयोजित कार्य में कई साहित्यकारों/लेखकों ने संयुक्त रुप से कहानी संग्रह का विमोचन किया। इस मौके पर कार्यक्रम के अध्यक्ष त्रिभुवन गिरि ने कहा कि ‘मृग मरीचिका’ पुस्तक समाज को सकारात्मक संदेश देने में सहायक होगी। पुस्तक के लेखक रतन सिंह बंगारी ने कहा कि उनकी पृष्ठभूमि लेखन से जुड़ी नहीं रही परंतु यह कहानी संग्रह लिखित अभिव्यक्ति के रूप में उनका पहला प्रयास है। उन्होंने कहा कि ये कहानियां उनके जीवन संघर्ष और आंखों देखी सामाजिक ताने—बाने से उपजी हैं। (आगे पढ़िये)
पहाड़ की अभिव्यक्ति है पुस्तक: डा. गजेंद्र

‘मृग मरीचिका’ पर समीक्षात्मक बात रखते हुए डॉ. गजेन्द्र बटोही ने कहा कि रतन सिंंह बंगारी कृत ‘मृग मरीचिका’ में लिखित कहानियां मध्य हिमालय के पहाड़ी समाज की अभिव्यक्ति हैं और पहाड़ का सामाजिक जनजीवन इन कहानियों में दृष्टिगोचर होता है। सेवानिवृत्त शिक्षिका नीलम नेगी ने कहा कि साहित्य मानव जीवन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है और आधुनिक युग में हमें साहित्य के महत्व को समझना होगा। युवा पीढ़ी को सोशल मीडिया से इतर साहित्य को अपने जीवन से जोड़े रखना चाहिए। इस मौके पर एड. जमन सिंह बिष्ट, एड. महेश परिहार, वरिष्ठ पत्रकार नवीन बिष्ट, पालिका अध्यक्ष प्रकाश चंद्र जोशी, ‘बाल प्रहरी’ के संपादक उदय किरौला, भरत बंगारी, पूरन जोशी आदि ने भी अपने विचार रखते हुए रतन सिंह बंगारी के प्रयास की मुक्तकंठ से प्रशंसा की। (आगे पढ़िये)
ऐसे उठ पड़ी बंगारी की कलम

यहां उल्लेखनीय हैं कि कहानी संग्रह मृग मरीचिका के लेखक रतन सिंह बंगारी, सामाजिक एवं राजनैतिक क्षेत्र में खासा नाम रखने वाली स्व. राधा बंगारी के पति हैं। मालूम हो कि बीमारी के चलते राधा बंगारी का लंबा इलाज किया गया, किंतु वह बीमारी से हार गई। धर्मपत्नी के निधन के बाद रतन सिंह बंगारी का मन काफी व्यथित हो चला था। आसपास घटित कई घटनाएं मन को झकझोर रही थी। घटनाओं व आंखों देखे सामाजिक हालातों ने अनुभवों का पिटारा भर दिया और तमाम कहानियां मन—मस्तिष्क में मंडरा रही ​थीं, मानो किसी पुस्तक के रुप में सबके सामने आना चाहती थी। इसी बीच बच्चों ने कुछ नया करने के लिए प्रेरित किया। फिर क्या था मन की उथल—पुथल और अनुभवों के पिटारे से प्रेरक कहानियों का पुलिंदा बाहर निकला। खास बात ये है कि न लेखक और न साहित्यकार और न ही लेखन से कभी कोई वास्ता। पहली बार कलम उठाई और ​कहानी संग्रह ‘मृग मरीचिका’ का जन्म हुआ। जिसमें 20 प्रेरक व रोचक कहानियां शामिल हैं। (आगे पढ़िये)
पढ़ते रहने को लुभाती है भाषा शैली

ये भी खास बात है कि ये कहानियों में पर्वतीय समाज, जनजीवन, संस्कृति, अमीरी—गरीबी, व्यंग्य आदि का बखूबी समावेश है। इतना ही नहीं लेखन के पहले प्रयास में ही ऐसी भाषा शैली का इस्तेमाल है कि कहानी पढ़ते चले जाने को लुभाती है। भले ही प्रयास पहला हो, लेकिन कहानियां के शीर्षक, लेखन शैली, सजीवता व सत्यता से ऐसा प्रतीत होता है कि मानो लेखक सालों से लेखन में रत हों। इस संग्रह में सपना, तर्पण, औलाद, मासाब, मेम साब! अब क्या करु!, मृग मरीचिका, हवलदार, जसुली, रिवर्स पलायन, गांव में पंचायत चुनाव, चीड़ेसन, सदुली दि की रेल यात्रा, चंदा, प्रोफेसर, अमरीका, मेरे गांव का आम, कका, पनदा, लखपति व राहू—केतू शीर्षक से रोचक कहानियां लिखी गई हैं। (आगे पढ़िये)
ये भी प्रमुख उपस्थिति

पुस्तक विमोचन के अवसर पर रतन सिंह बंगारी के पारिवारिक सदस्य माधो सिंह बंगारी, धर्मा बंगारी, रितु बंगारी, भरत बंगारी, पान सिंह बंगारी के अलावा बहादुर सिंह कालाकोटी, दयाल पांडे, मनमोहन तिवारी, बहादुर सिंह बिष्ट, वरिष्ठ पत्रकार राजेन्द्र रावत एवं चंदन नेगी, पहरू के उप संपादक ललित तुलेरा, राजेन्द्र डालाकोटी, गोविंद रावत, सुलभ शाह, राहुल कांडपाल आदि उपस्थित थे।

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