HomeUttarakhandAlmoraमहिला आरक्षण बिल: "महिलाओं को गुमराह कर रही केंद्र सरकार"

महिला आरक्षण बिल: “महिलाओं को गुमराह कर रही केंद्र सरकार”

पूर्व विस अध्यक्ष गोविन्द सिंह कुंजवाल का तीखा हमला

CNE REPORTER, अल्मोड़ा। उत्तराखंड विधानसभा के पूर्व अध्यक्ष और वरिष्ठ कांग्रेस नेता गोविन्द सिंह कुंजवाल ने महिला आरक्षण बिल (नारी शक्ति वंदन अधिनियम) को लेकर केंद्र की भाजपा सरकार पर गंभीर आरोप लगाए हैं। अल्मोड़ा में प्रेस को जारी एक बयान में उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी महिलाओं को हक देने के नाम पर केवल राजनीतिक लाभ लेने की कोशिश कर रहे हैं और उन्हें तथ्यों से दूर रख गुमराह किया जा रहा है।

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कांग्रेस रही है सदैव समर्थक

कुंजवाल ने स्पष्ट किया कि महिला आरक्षण की अवधारणा कांग्रेस की रही है और पार्टी शुरू से ही इसकी मुखर समर्थक रही है। उन्होंने याद दिलाया कि:

  • वर्ष 2023 में जब यह बिल संसद के दोनों सदनों (लोकसभा और राज्यसभा) में पेश किया गया, तो कांग्रेस सहित समस्त विपक्षी दलों ने इसका पूर्ण समर्थन किया।
  • इस बिल के माध्यम से लोकसभा की 543 सीटों में से 33 प्रतिशत सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित करने का ऐतिहासिक प्रावधान था।

देरी और शर्तों पर उठाए सवाल

पूर्व विधानसभा अध्यक्ष ने केंद्र सरकार की मंशा पर सवाल उठाते हुए कहा कि सरकार ने इस बिल को तुरंत लागू करने के बजाय इसे जनगणना और परिसीमन की पेचीदगियों में फंसा दिया। उन्होंने आरोप लगाया कि:

  1. अधिसूचना में देरी: चुनावी गणित को देखते हुए सरकार ने अब जाकर 16 अप्रैल 2026 को इस बिल को अधिसूचित किया है।
  2. राजनीतिक षड्यंत्र: सरकार परिसीमन के बहाने राज्यों की सीटों के समीकरण बदलकर राजनीतिक लाभ लेने की फिराक में थी, जिसे विपक्ष की एकजुटता ने नाकाम कर दिया।
  3. भ्रामक प्रचार: भाजपा अपनी विफलताओं को छिपाने के लिए कांग्रेस पर अनर्गल आरोप लगा रही है, जबकि सच्चाई यह है कि कांग्रेस आज भी वर्ष 2023 के मूल स्वरूप वाले बिल को अविलंब लागू करने की पक्षधर है।

“भाजपा सरकार केवल श्रेय लेने की राजनीति कर रही है। यदि उनकी नीयत साफ होती, तो महिलाओं को अपने अधिकार के लिए इतना लंबा इंतजार नहीं करना पड़ता।” — गोविन्द सिंह कुंजवाल

महिलाओं से सतर्क रहने की अपील

बयान के अंत में कुंजवाल ने देश और प्रदेश की मातृशक्ति से अपील की कि वे सरकार के ‘भ्रामक विज्ञापनों’ और ‘झूठे प्रचार’ से सावधान रहें। उन्होंने महिलाओं से आग्रह किया कि वे वास्तविकता को समझें और देखें कि कौन वास्तव में उनके सशक्तिकरण के लिए खड़ा है और कौन इसे केवल चुनावी मुद्दा बना रहा है।

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