कांडा को विकासखंड बनाने की मांग तेज
सीएनई रिपोर्टर, बागेश्वर : कांडा को अलग विकासखंड बनाने की मांग अब एक जन-आंदोलन का रूप लेती जा रही है। रविवार को विकासखंड संघर्ष समिति के बैनर तले चल रहा क्रमिक अनशन 28वें दिन भी जारी रहा। आंदोलन को मिल रहे व्यापक जनसमर्थन के बीच आज उस समय भावुक कर देने वाला दृश्य दिखा, जब एक तीन वर्षीय बालक कुंज भी अपनी एकजुटता दिखाने अनशन स्थल पहुँचा। नन्हे कुंज की उपस्थिति ने न केवल सबका ध्यान खींचा, बल्कि आंदोलनकारियों के उत्साह को भी दोगुना कर दिया।
क्रमिक अनशन पर डटे आंदोलनकारी
रविवार को अनशन की कमान संघर्ष समिति के सचिव सुरेश रावत और बजीना गांव के निवासी प्रकाश कांडपाल ने संभाली। अनशनकारियों ने स्पष्ट किया कि जब तक सरकार कांडा की जायज मांग को स्वीकार नहीं करती, यह संघर्ष विराम नहीं लेगा।
प्रमुख बिंदु: क्यों जरूरी है नया विकासखंड?
बैठक के दौरान वक्ताओं ने पहाड़ की भौगोलिक परिस्थितियों और प्रशासनिक उपेक्षा पर गंभीर सवाल उठाए:
- जनसंख्या का दबाव: 50 हजार से अधिक की आबादी वाला यह क्षेत्र आज भी एक स्वतंत्र विकासखंड के अभाव में पिछड़ा हुआ है।
- पलायन का संकट: मूलभूत सुविधाओं (सड़क, बिजली, पानी, शिक्षा और स्वास्थ्य) की कमी के कारण ग्रामीण तेजी से गांवों को छोड़ने पर मजबूर हैं।
- प्रशासनिक आवश्यकता: वक्ताओं का तर्क है कि पहाड़ के गांवों का वास्तविक विकास केवल छोटी और सुलभ प्रशासनिक इकाइयों के माध्यम से ही संभव है।
सभा की गरिमा और उपस्थिति
बैठक की अध्यक्षता गणेश दत्त कांडपाल ने की और संचालन आलम सिंह मेहरा द्वारा किया गया। सभा में वक्ताओं ने दोटूक शब्दों में कहा कि यह लड़ाई अब आर-पार की है।
उपस्थित प्रमुख लोग: इस दौरान अशोक जोशी, पूर्व प्रधान भगवत प्रसाद, वरुण चंदोला, प्रयाग भंडारी, विनय कर्म्याल, पंकज कांडपाल, दीप वर्मा, दिनेश वर्मा, वीरेंद्र नगरकोटी, उमाकांत मिश्रा, हरीश कांडपाल, जितेंद्र वर्मा और बबलू कांडपाल सहित भारी संख्या में क्षेत्रीय जनता मौजूद रही।
आंदोलन का संकल्प: “गांव उपेक्षित हैं और विकास को तरस रहे हैं। जब तक कांडा को विकासखंड का दर्जा नहीं मिलता, हमारा यह लोकतांत्रिक संघर्ष जारी रहेगा।” — संघर्ष समिति



