यह कैसी विडंबना, बहू—बेटों, नाती—पोतों वाले बुजुर्ग मौत के बाद क्यों हो गये ‘लवारिस’!

सीएनई रिपोर्टर, अल्मोड़ा कोरोना काल का सबसे दु:खद पहलू  रोजाना हो रही मौतों से भी ज्यादा भयानक और घृणित यदि कुछ है तो वह खत्म…


सीएनई रिपोर्टर, अल्मोड़ा

कोरोना काल का सबसे दु:खद पहलू  रोजाना हो रही मौतों से भी ज्यादा भयानक और घृणित यदि कुछ है तो वह खत्म हो चुकी मानवीय संवेदनाएं और पारिवारिक मूल्य।

अल्मोड़ा में विगत 15 रोज में लगभग 07 कोरोना संक्रमित ऐसे शवों का दाह संस्कार ‘लावारिस’ की श्रेणी में किया गया है, जिनमें से कोई भी सही मायने में लवारिस था ही नही। यह वह बदनसीब लोग थे, जिन्होने जीते जी कोरोना संक्रमण की चपेट में आने के बाद शारीरिक और मानसिक कष्ट झेला, वही मरने की बाद भी शायद इनकी आत्मा को कभी शांति नही मिल पायेगी।

आपको बता दें कि सनातन धर्म में जन्म से लेकर मृत्यु तक तमाम संस्कार व कर्म—काण्ड निर्धारित हैं। मृत्यु के बाद तर्पण, पिंडदान, 13वीं, श्राद्ध आदि की परंपरा है। अंतिम क्रिया संपन्न कराने की भी कई रस्में हैं। मान्यता है कि यदि अंतिम संस्कार सही तरीके से संपन्न नही हो तो आत्मा ‘प्रेत योनी’ में भटकती है, लेकिन दुर्भाग्य से यहां कोरोना संक्रमण से मरने वाले लोगों की अंतिम क्रिया भी ढंग से नही हो पा रही है। जिनके परिजन शवों को ले जा रहे हैं और पीपीई किट पहन संस्कार कर रहे हैं, उनका गत क्रिया में संदेह नही किया जा सकता है। किंतु उन दुर्भाग्यशालियों को तो मृत्यु के उपरांत भी अपनों का साथ नसीब नही हुआ, जिन्हे लावारिस की श्रेणी में रख दाह संस्कार पुलिस व एसडीआरएफ के जवानों द्वारा किया गया है।

कोविड अस्पताल सूत्रों के मुताबिक कई ऐसे परिजन भी हैं, जो अपने परिजन को अस्पताल में भर्ती कराने के बाद जैसे गायब ही हो गये। एक बार भी उनकी ख़बर नही पूछी। फिर जब वह कोरोना से चल बसे तो अंतिम क्रिया से या तो इंकार कर दिया अथवा अपना मोबाइल ही स्विच आफ कर बैठ गये।

एक सूत्र ने नाम नही छापने की शर्त पर बताय है कि उनकी आंखों के सामने एक कोरोना से मरीं एक वृद्धा के शव के पास उनकी बहू पीपीई किट पहन कर आई और शव से सोने का गलोबंद निकाला। फिर मृतका का मोबाइल अपने पास रखा और सीधे चल दी।

निश्चित रूप से कोरोना काल ने वह दिन दिखाये हैं, जिनकी पहले कभी कोई कल्पना भी नही कर सकता था। इससे बड़ी विडंबना क्या होगी कि अब तक अल्मोड़ा के भैसवाड़ा फार्म में जितने भी लावारिस शवों का दाह संस्कार किया गया है, उनमें एक को छोड़ सभी बुजुर्ग थे और बहू—बेटों, नाती—पोतों वाले थे।

लावारिस कहे जाने वाहे यह वह बदनसीब वृद्ध थे, जिन्होने अपना पूरा जीवन जिन बच्चों की परवरिस और उन्हें एक बड़ा काबिल आदमी बनाने में लगा दिया। उनकी मौत के बाद वह उनके दाह संस्कार की जिम्मेदारी तक लेने को तैयार नही रहे।

मरने वालों में 05 महिलाएं व 02 पुरूष, परिजनों के होते हुए भी लवारिस की सूची में हुए शामिल
इधर एसडीआरएफ सरिया पानी अल्मोड़ा की ओर से दी गई जानकारी में बताया गया है कि एसडीआरएफ टीम द्वारा 3 मई, 2021 से 15 मई, 2021 तक 7 कोरोना संक्रमित शवों का दाह संस्कार भैंसवाड़ा फार्म अल्मोड़ा में कर चुकी है।
इनमें से छह मृतकों की उम्र 58 से 75 साल तक है, जबकि मात्र एक मृतक की आयु 43 वर्ष है। इन मृतकों में पांच महिलाएं हैं, जो सभी वयोवृद्ध थीं। वहीं दो पुरूष हैं। एसडीआरएफ ने यह भी बताया कि इन सभी मृतकों के परिजन है, लेकिन उन्होंने शव के दाह संस्कार की जिम्मेदारी नही ली। अतएव टीम को ही दाह संस्कार संपन्न करना पड़ा।

उत्तराखंड : 25 मई तक बढ़ाया जा सकता है covid curfew, फिलहाल जारी नही हुआ है कोई लिखित आदेश, आज देर शाम तक लिया जायेगा निर्णय

Big News : उत्तराखंड में रूप बदल रहा कोरोना, दर्जन भर से ज्यादा Variant ढ़ा रहे कहर, पढ़िये पूरी ख़बर….

ब्रेकिंग न्यूज़ : श्रीनगर में सुरक्षा बलों के साथ मुठभेड़ में दो आतंकवादी ढेर

तूफ़ान ‘ताउ ते’ अपडेट : आज रात गुजरात तट से टकराने की आशंका, एनडीआरएफ व एसडीआरएफ टीमें तैनात

Breaking News : रानीखेत में खुला 50 बेड का कोविड अस्पताल, सीएम ने किया वर्चुअल उद्घाटन, पढ़िये पूरी ख़बर…

सराहनी : हल्द्वानी का यह school कोरोना काल में भी कायम रखे है उच्च शैक्षिक स्तर, वैंडी स्कूल ने निभाया Quality Education का वायदा

ALMORA NEWS: अपहृता और आरोपी को फरीदाबाद से ले आई पुलिस, राजस्व क्षेत्र का यह मामला पुलिस को हुआ था सुपुर्द

Almora News : राजस्व निरीक्षक और उप निरीक्षक सीख रहे भूलेख नियम और सर्वे बारीकियां, विपरीत परिस्थितियों में भी जारी है प्रशिक्षण

Almora News : मंदी की मार झेल रहे है व्यापारियों के लिए तत्काल जारी करें आर्थिक पैकेज, देवभूमि व्यापार मंडल ने करी मांग

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *