दानों में नमी की मात्रा लगभग 20 प्रतिशत से कम रह जाती है।
पत्तों का रंग पीला हो जाता है और पत्ते गिरने लगते हैं।
दानों एवं फलियाँ सूखने लगते हैं एवं इनका रंग बदल जाता है।
फसल का जीवन-चक्र पूरा हो जाता है जो कि फसल एवं इसकी प्रजाति पर निर्भर करता है।
धान्य फसलों जैसे गेहूँ व जौ में नीचे की पतियाँ गिरने लगती हैं, तने का रंग पीला हो जाता है और तने में गूदा बनने लगता है, बालियों का रंग पीला हो जाता है, दाने कठोर/सख्त हो जाते है।
दलहनी फसलों में फलियों का रंग भूरा हो जाता है, दाने सख्त/कठोर हो जाते हैं, नीचे की पत्तियाँ पीली होकर गिरनी शुरू हो जाती हैं।
प्याज एवं लहसुन जैसी सब्जी वाली फसलों में पौधों की गर्दन गिरने लगती है। लहसुन में पत्तों का रंग पीला-भूरा होकर सूखने लगते हैं।
चारा वाली फसलों की कटाई वनस्पतिक अवस्था में की जाती है क्योंकि इस अवस्था के बाद चारा वाली फसलों की पोषकता में कमी आती है व रेशे की मात्रा बढ़ जाती है।
तीन दशकों के करीब का कार्यानुभव रखने वाले दीपक मनराल पत्रकारिता जगत का एक सम्मानित नाम हैं। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत वर्ष 1996 में एक त्रैमासिक पत्रिका के सहयोगी संपादक के रूप में की थी। बीते 25 वर्षों में उन्होंने अमर उजाला, दैनिक भास्कर, दैनिक आज, उत्तरांचल दीप और चारधाम टाइम्स जैसे प्रतिष्ठित समाचार पत्रों में 'ब्यूरो प्रमुख' की महत्वपूर्ण जिम्मेदारियाँ निभाई हैं। वर्तमान में वे 'गंगोत्री अक्षर उजाला पोस्ट' के संपादक हैं और सीएनई (CNE) मीडिया हाउस के संस्थापक व स्वामी के रूप में डिजिटल मीडिया को नई दिशा दे रहे हैं। अपनी निष्पक्ष और ईमानदार पत्रकारिता के लिए पहचाने जाने वाले मनराल आज भी प्रतिदिन 'ग्राउंड ज़ीरो' से जुड़कर सक्रिय पत्रकारिता कर रहे हैं।