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अल्मोड़ा न्यूज: पिरुल को आजीविका का साधन बनाने की मुहिम, पर्यावरण संस्थान ने डेढ़ सौ किसानों को ​तकनीकी प्रशिक्षण दिया

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सीएनई रिपोर्टर, अल्मोड़ा
जीबी पंत राष्ट्रीय हिमालयी पर्यावरण संस्थान कोसी—कटारमल अल्मोड़ा ग्रामीण तकनीकी परिसर में प्रसार प्रशिक्षण केन्द्र, हवालबाग के तत्वाधान में प्रशिक्षण शिविर आयोजित किए गए। प्रशिक्षण हिमालयी आजीविका सुधार परियोजना के तहत गठित किसान समूहों को दिया गया। इसमें हवालबाग ब्लाक के डेढ़ सौ किसानों को पीरूल से जैविक ईंधन (बायोब्रिकेट) तैयार करने की ट्रेनिंग दी गई।
प्रशिक्षण शिविरों का संचालन करते हुए पर्यावरण संस्थान के वैज्ञानिक एवं ग्रामीण तकनीकी परिसर के प्रभारी डा. हर्षित पन्त जुगरान ने किसानों का स्वागत किया करते हुए जैविक ईंधन बनाने के विषय में जानकारी दी। प्रशिक्षण का शुभारंभ करते हुए संस्थान के निदेशक डा. आरएस रावल ने किसानों को संबोधित करते हुए कहा कि प्रशिक्षण किसानों की कार्य क्षमता बढ़ाते हैं। उन्होंने किसानों से कहा कि प्रशिक्षण से ली गई सीख एवं तकनीक को अपने क्षेत्रों में अपनायें और आजीविका का जरिया बनाएं। उन्होंने कहा कि प्रशिक्षण की तकनीकों को अपने दैनिक जीवन में अपनाना जरूरी है। संस्थान के वरिष्ठ वैज्ञानिक एवं सामाजिक आर्थिक विकास केन्द्र के केन्द्र प्रमुख डा. जीएस नेगी ने कहा कि पीरूल से बायोब्रिकेट (कोयला) बनाने से ईंधन के लिए वनों पर निर्भरता कम होगी। साथ ही पिरुल की खपत होने से वनाग्नि की घटनाएं कम होंगी।
प्रसार प्रशिक्षण केन्द्र के आचार्य केके पन्त, मुख्य प्रशासनिक अधिकारी अंजू एवं प्रशिक्षण प्रभारी आनन्द भटट् ने किसानों से कहा कि प्रशिक्षण में सीखी तकनीकों को अपने व्यवहारिक जीवन में अपनाने पर जोर दिया। उन्होंने समूहों को बायोब्रिकेट बनाने हेतु सांचा उपलब्ध कराने तथा प्रशिक्षणार्थियों को अंगीठी देने का आश्वासन दिया।
प्रशिक्षण में वैज्ञानिक डा. हर्षित पन्त ने डाक्युमेंट्री प्रस्तुतीकरण के माध्यम से किसानों को पिरुल से जैविक ईंधन बनाने की विस्तृत जानकारी दी। डा. हर्षित पन्त एवं डीएस बिष्ट ने पिरुल से तैयार चारकोल का सांचे के माध्यम से ब्रिकेट बनाने पर प्रयोगात्मक प्रशिक्षण दिया। प्रत्येक प्रतिभागी ने

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एक-एक ब्रिकेट तैयार किया। प्रशिक्षण के दौरान किसानों को ग्रामीण तकनीकी परिसर का भ्रमण कराया गया। उन्हें पीरूल से तैयार होने वाले हैण्डमेड पेपर की प्रसंस्करण इकाई का अवलोकन कराया। जिसमें डा. देवेन्द्र चौहान ने किसानों को पिरुल के उपयोग एवं इससे मोटा कागज तैयार कर विभिन्न उत्पाद जैसे फाइल कबर, मीटिंग फोल्डर, कैरी बैग, नोट पैड, इत्यादि बनाने की विस्तृत जानकारी प्रदान की। अंत में प्रशिक्षणार्थियों को प्रमाण पत्र बांटे गए। इसके साथ ही सांचा और अंगीठी प्रदान की गई।

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