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अल्मोड़ा न्यूज : विधेयक को लेकर फूटा आक्रोश, विरोध दिवस के तहत धरना—प्रदर्शन, किसान विरोधी नीतियों की पुरजोर खिलाफत

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सीएनई रिपोर्टर, अल्मोड़ा
अखिल भारतीय किसान संघर्ष समन्वय समिति के आह्वान पर यहां उत्तराखंड किसान सभा, अखिल भारतीय जनवादी महिला समिति, जनवादी नौजवान सभा, सीटू, दलित शोषण मुक्ति संगठन आदि संगठनों ने एकजुट होकर विरोध दिवस मनाया। इन संगठनों के सदस्यों ने यहां चौघानपाटा गांधी पार्क में धरना—प्रदर्शन करते हुए किसान विरोधी नीतियों की पुरजोर खिलाफत की। संसद के मानसून सत्र में पारित कृषि बिल को किसान विरोधी करार देते हुए सरकार की घोर निंदा की और इसे तत्काल वापस लेने की मांग की।
धरने के दौरान वक्ताओं ने कहा कि अपने 6 साल के कार्यकाल में भाजपा सरकार का जन विरोधी चेहरा बेनकाब हो चुका है। उन्होंने कहा कि यह सरकार पूरी तरह से साम्राज्यवादी ताकतों के आगे घुटने टेक चुकी है तथा पूरी तरह से कार्पोरेट परस्त सरकार है। वक्ताओं ने कहा कि इस सरकार को जन सरोकारों को कोई लेनादेना नहीं रह गया है। इसी कारण अब तक सभी निर्णय पूरी तरह अदूरदर्शी हैं और जनता की तकलीफें बढ़ाने वाले हैं। वक्ताओं ने नोटबन्दी, जीएसटी, कोरोना से संबंधित निर्णयों पर सरकार की खिंचाई की। वक्ताओं ने कहा कि यही वजह है कि आज जनता बेरोजगारी, भुखमरी, महंगाई का सामना कर रही है। यह आरोप भी लगाया कि सरकार आपने कार्पोरेट मित्रों के मीडिया चैनलों द्वारा जनता की एकता को खंडित करने का काम कर रही है।
वक्ताओं ने कहा कि मौजूदा किसान विरोधी विधेयक भारतीय खेती और देश के किसानों को बर्बाद करने वाला है। समूचे कृषि क्षेत्र को एग्रो कॉरपोरेट के हवाले करने से किसानों के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य की व्यवस्था के खात्मे की ओर ले जाएगा। सार्वजनिक वितरण व्यवस्था को पूरी तरह खत्म कर देगा। इतना ही नहीं इस विधेयक से कार्पोरेट को खाद्यान्न की जमाखोरी का मौका मिलेगा और खाद्य वस्तुओं की तंगी पैदा हो जाएगी। उन्होंने कहा कि य​ह बिल भविष्य में देश की खाद्य सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा पैदा कर देगा। कार्यक्रम में दिनेश पांडे, आरपी जोशी, यूसुफ तिवारी, मुमताज़ अख्तर, अरुण जोशी, योगेश कुमार, स्वप्निल पांडे, सुनीता पांडे, ममता, पूनम तिवारी, जया पांडे, मुन्नी पांडे प्रमोद जोशी आदि कई लोग शामिल हुए।

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