अल्मोड़ा। अखिल भारतीय जनवादी महिला समिति की जिला कमेटी अल्मोड़ा ने आवश्यक वस्तु अधिनियिम में किए गए कतिपय संशोधनों पर अंगुली उठाते हएु इन संशोधनों को जनता, किसाना व महिला विरोधी करार दिया और बुधवार को विरोध करते हुए इन संशोधनों को अविलंब वापस लेने की मांग उठाई। समिति की सभी यूनिटों के सदस्यों ने लाॅकडाउन के मद्देनजर घरों से पोस्टरों के साथ विरोध किया। इसके बाद समिति के कुछ पदाधिकारी कलेक्टेट पहुंचे, जहां उन्होंने चार सूत्रीय मांगपत्र जिला प्रशासन के जरिये प्रधानमंत्री को भेजा। इस विरोध कार्यक्रम में प्रमुख रूप से संगठन की जिला सचिव राधा नेगी, प्रांतीय अध्यक्ष सुनीता पांडे, जिलाध्यक्ष मुन्नी प्रसाद, पूनम तिवारी, भावना, भगवती, ममता, पुष्पा, नलिनी पंत, व एड0 भावना जोशी शामिल थी।
प्रधानमंत्री को भेजे ज्ञापन में कहा गया है कि भाजपा सरकार ने उक्त अधिनियम में कुछ संशोधन पारित किए हैं। जो जन विरोधी होने के साथ ही किसान व महिला विरोधी भी हैं। जिनका समिति घोर विरोध करती है। इस संशोधन से आवश्यक व रोजमर्रा की चीजों के भंडारण की सीमा हटाकर तथा जरूरी खाद्य वस्तुओं की सूची से हटाकर जमाखोर व्यापारियों को मनमानी करने का मौका दे दिया है। जिससे जनता, किसान व महिलाएं परेशान होंगी। इन संशोधनों से किसानों को क्षति पहुंचाने तथा सरकारी क्रम केंद्रों को कमजोर करने का रास्ता साफ हो गया है। यह भी कहा है कि यदि सरकारी खरीद से सरकार हाथ खींच लेगी, तो सार्वजनिक वितरण प्रणाली प्रभावित होगी। समिति का कहना है कि ये संशोधन स्वामिनाथन कमेटी की रिपोर्ट को भी खारिज कर रही है, जबकि सरकार ने चुनाव के वक्त इस कमेटी की रिपोर्ट को लागू करने का वादा किया था। ज्ञापन में आवश्यक वस्तु अधिनियम में पारित जनता, किसान व महिला विरोधी संशोधन वापस लेने, किसानों की फसल खरीद की गारंटी लेने, फसल लागत का डेढ़ गुना किसानों को देने तथा किसानों से फल खरीदकर जरूरी खाद्यान्न राशन की दुकानों के जरिये रियायती दामों पर जनता को उपलब्ध कराने की मांगें शामिल हैं।
अल्मोड़ाः अधिनियम में संशोधनों की खिलाफत, जनवादी महिला समिति ने उठाई आवाज
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