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Panchak 2023: सोमवार से पंचक प्रारम्भ, गलती से भी मत करना यह कार्य

CNE DESK/ सोमवार, 20 जनवरी, 2023 से फाल्गुन अमावस्या की साथ पंचक शुरू होने जा रहा है। हिंदू धर्म शास्त्रों में पंचक काल में बेहद सावधान रहने के निर्देश निहित हैं। यह उन पांच दिनों की अवधि होती है, जिसे ज्योतिष शास्त्र बहुत अशुभ मानता है। हालांकि सभी पंचक अशुभ नहीं होते, लेकिन फिर भी पंचक को लेकर काफी सारी प्राचीन मान्यताएं विद्यमान हैं।

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ज्ञात रहे कि हिंदू पंचांग के अनुसार, फाल्गुन अमावस्या का आरंभ 19 फरवरी, सोमवार 2023 (February 19, Monday 2023) को दोपहर 04 बजकर 21 मिनट पर होगा। इसकी समाप्ति 20 फरवरी 2023 (20 February 2023) को दोपहर 12.38 पर होगी। अर्थात इस साल फाल्गुन अमावस्या को 20 फरवरी 2023 को मनाया जाना है।

जानिए, क्या होता है यह पंचक

यह वह पांच दिवस हैं, जब चंद्रमा धनिष्ठा नक्षत्र के तृतीय चरण में प्रवेश कर जाता है। इसके उपरांत जब चंद्रमा शतभिषा, पूर्वाभाद्रपद, उत्तराभाद्रपद और रेवती नक्षत्र के चार पदों पर गोचर करता है। तब इस क्रिया को पंचक के नाम से जाना जाता है। ज्योतिष शास्त्री बताते हैं कि आसान भाषा में जब चंद्रमा कुंभ और मीन राशि में गोचर करता है तो इसे पंचक कहा जाता है। या इसे ऐसे भी समझ सकते है कि पंचक 05 नक्षत्रों का एक समूह होता है। कुल 27 नक्षत्रों में से 05 को दूषित माना गया है। ऐसे ही नक्षत्रों को पंचक कहा जाता है। ऐसे दोषपूर्ण नक्षत्र हैं – धनिष्ठा, पूर्वाभाद्रपद, उत्तराभाद्रपद, शतभिषा और रेवती नक्षत्र। (धनिष्ठा नक्षत्र के तृतीय चरण के आरंभ से होकर रेवती नक्षत्र के अंतिम चरण तक पंचक रहता है।)

पंचक का सबसे बड़ा भय

पंचक को लेकर एक बात जग प्रसिद्ध है। कहा जाता है कि इस अवधि में यदि किसी की मृत्यु हो जाये तो यह बहुत अशुभ होती है। मृत्यु को प्राप्त हुआ व्यक्ति अपने साथ अन्य परिजनों को भी ले जाता है। यानि जिस घर में मृत्यु होती है, उस परिवार के अन्य सगे-संबंधियों को भी मृत्यु का भय सताने लगता है।

अगले पांच दिन नहीं करें यह काम –

दक्षिण दिशा की ओर यात्रा नहीं करें। यह यम की दिशा है। यदि यात्रा अत्यंत महत्वपूर्ण है और टाली नहीं जा सकती तो दही का सेवन कर ही निकलें।

यदि आपका भवन निर्माण कार्य चल रहा है तो इन पांच दिनों में घर की छत नहीं डालें। यानी लेंटर डालना टाल दें। मान्यता है कि ऐसा करने पर धन का नुकसान होता है।

इस अवधि में शादी-ब्याह, मुंडन संस्कार, नामकरण आदि कार्य नहीं करें।

कहा जाता है कि पंचक अवधि में लकड़ी से जुड़े कार्य वर्जित हैं। यानि फर्निचर आदि का निर्माण नहीं किया जाये।

यदि पंचक में किसी की मौत हो जाए तो ऐसे करें अंतिम संस्कार –

कहा जाता है कि पंचक में मृत्यु होना काफी दिक्कत पैदा कर सकता है। अतएव कहा गया है कि यदि पंचक अवधि में किसी परिजन की मौत हो जाए तो परिवार के सदस्यों को विशेष सावधानी बरतनी चाहिए। कहा गया है कि शव का दाह संस्कार के वक्त आटे, बेसन और कुश (घास) से 5 पुतलों का निर्माण करें। फिर मृतक के साथ सभी 05 पुतलों का अंतिम संस्कार कर दीजिए। मान्यता है कि इससे परिजनों पर आने वाला मृत्यु का संकट टल जाता है।

विशेष – उक्त आलेख सूचना के विभिन्न माध्यमों से एकत्रित की गई जानकारियों के आधार पर लिखा गया है। हमारा उद्देश्य किसी की मान्यता को चुनौती देना नहीं है। ना ही हम आलेख में दी गई जानकारियों के पूरी तरह सत्य होने का दावा कर रहे हैं।

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Deepak Manral
Deepak Manralhttp://creativenewsexpress.com
तीन दशकों के करीब का कार्यानुभव रखने वाले दीपक मनराल पत्रकारिता जगत का एक सम्मानित नाम हैं। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत वर्ष 1996 में एक त्रैमासिक पत्रिका के सहयोगी संपादक के रूप में की थी। बीते 25 वर्षों में उन्होंने अमर उजाला, दैनिक भास्कर, दैनिक आज, उत्तरांचल दीप और चारधाम टाइम्स जैसे प्रतिष्ठित समाचार पत्रों में 'ब्यूरो प्रमुख' की महत्वपूर्ण जिम्मेदारियाँ निभाई हैं। वर्तमान में वे 'गंगोत्री अक्षर उजाला पोस्ट' के संपादक हैं और सीएनई (CNE) मीडिया हाउस के संस्थापक व स्वामी के रूप में डिजिटल मीडिया को नई दिशा दे रहे हैं। अपनी निष्पक्ष और ईमानदार पत्रकारिता के लिए पहचाने जाने वाले मनराल आज भी प्रतिदिन 'ग्राउंड ज़ीरो' से जुड़कर सक्रिय पत्रकारिता कर रहे हैं।
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