विशेष प्रशिक्षण सत्र में बताया कैसे फैल रहा डिजिटल फ्रॉड
CNE REPORTER, अल्मोड़ा। मां अंबे इंस्टीट्यूट ऑफ नर्सिंग एंड पैरामेडिकल साइंस में रेड क्रॉस समिति अल्मोड़ा द्वारा आयोजित एक विशेष प्रशिक्षण सत्र में छात्र-छात्राओं को आपातकालीन स्थिति में जान बचाने के लिए ‘गोल्डन ऑवर’ के महत्व और ‘सीपीआर’ (CPR) की बारीकियों से अवगत कराया गया। कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य भविष्य के स्वास्थ्य कर्मियों को न केवल चिकित्सा के क्षेत्र में दक्ष बनाना था, बल्कि उन्हें समाज में फैल रहे डिजिटल फ्रॉड जैसे खतरों के प्रति सचेत करना भी रहा।

कार्यक्रम का शुभारंभ संस्थान की प्रबंधक चंपा कनवाल द्वारा किया गया। उन्होंने संस्थान के विजन पर प्रकाश डालते हुए बताया कि मां अंबे इंस्टीट्यूट अल्मोड़ा और आसपास के क्षेत्रों में नर्सिंग शिक्षा और पैरामेडिकल प्रशिक्षण के क्षेत्र में किस प्रकार गुणवत्तापूर्ण कार्य कर रहा है। उन्होंने छात्र-छात्राओं को सेवा भाव के साथ आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया।


रेड क्रॉस का इतिहास और ‘गोल्डन ऑवर’ की महत्ता
सेवानिवृत्त स्वास्थ्य निदेशक डॉ. जी.सी. दुर्गपाल ने विद्यार्थियों के विशेष अनुरोध पर रेड क्रॉस के गौरवशाली इतिहास, इसकी संरचना और विश्व शांति में इसके योगदान पर विस्तृत व्याख्यान दिया। उन्होंने बताया कि:
- रेड क्रॉस को अब तक कई बार नोबेल शांति पुरस्कार से नवाजा जा चुका है।
- गोल्डन ऑवर: किसी भी दुर्घटना के बाद का शुरुआती एक घंटा ‘गोल्डन ऑवर’ कहलाता है, जिसमें सही प्राथमिक चिकित्सा मिलने पर घायल की जान बचने की संभावना 90% तक बढ़ जाती है।
- इसके साथ ही उन्होंने गर्मियों में आंखों की सुरक्षा और संक्रमण से बचाव के उपाय भी साझा किए।
CPR का जीवंत प्रदर्शन
रेड क्रॉस समिति के जिला चेयरपर्सन आशीष वर्मा ने जीवन रक्षक तकनीक सीपीआर (Cardiopulmonary Resuscitation) पर व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया। संस्थान द्वारा उपलब्ध कराई गई डमी के माध्यम से उन्होंने सिखाया कि:
- कैसे पहचानें कि मरीज को सीपीआर की आवश्यकता है या नहीं।
- आपातकाल के दौरान मानसिक संतुलन बनाए रखना क्यों जरूरी है।
- छाती को दबाने (Chest Compression) की सही तकनीक और गति क्या होनी चाहिए।
समिति के सदस्य हरीश कनवाल ने रेड क्रॉस की सेवा गतिविधियों का विवरण देते हुए बताया कि संस्था आपदा के समय कंबल, राशन, व्हीलचेयर और टेंट जैसे राहत उपकरण मुहैया कराने में सदैव तत्पर रहती है। उन्होंने युवाओं से रक्तदान को जीवन का हिस्सा बनाने की अपील की ताकि रक्त के अभाव में किसी की जान न जाए।
डिजिटल फ्रॉड से बचाव: एक नई पहल
कार्यक्रम में एक महत्वपूर्ण मोड़ तब आया जब सदस्य अनूप साह ने नर्सिंग को सेवा क्षेत्र बताते हुए छात्रों को आधुनिक युग के खतरों यानी डिजिटल फ्रॉड के प्रति आगाह किया। उन्होंने निम्नलिखित बिंदुओं पर जानकारी दी:
- फिशिंग और डिजिटल अरेस्ट: कैसे फर्जी कॉल और लिंक के जरिए लोगों को डराकर पैसे ठगे जाते हैं।
- सावधानी: क्यूआर कोड स्कैन करते समय और लॉटरी के प्रलोभनों से बचने की सलाह दी।
- वरिष्ठ नागरिकों की सुरक्षा: उन्होंने छात्रों से आह्वान किया कि वे अपने संपर्क में आने वाले बुजुर्गों को डिजिटल सुरक्षा के प्रति जागरूक करें, क्योंकि वे इन जालसाजों के आसान निशाने पर होते हैं।
सत्र में रेड क्रॉस अध्यक्ष आशीष वर्मा, पूर्व स्वास्थ्य निदेशक डॉ. जे.सी. दुर्गपाल, प्रबंधक चंपा कनवाल, हरीश कनवाल, अनूप साह सहित संस्थान के शिक्षक, प्रशिक्षक और बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं उपस्थित रहे।
मुख्य संदेश: “सेवा केवल अस्पताल तक सीमित नहीं है; सड़क पर दुर्घटनाग्रस्त व्यक्ति की जान बचाना और समाज को साइबर अपराध से जागरूक करना भी एक नर्स का मानवीय कर्तव्य है।”


