अल्मोड़ा से इस वक्त की बड़ी खबर- Video
सीएनई रिपोर्टर, अल्मोड़ा। जिले के लमगड़ा ब्लॉक और उसके आसपास के इलाकों में हुई बेमौसम भारी ओलावृष्टि ने भारी तबाही मचाई है। इस प्राकृतिक आपदा से क्षेत्र के किसानों की कमर पूरी तरह टूट गई है। आसमान से बरसी इस आफत ने देखते ही देखते महीनों की मेहनत पर पानी फेर दिया है।

ओलों की भयंकर मार से लमगड़ा के प्रसिद्ध बागान पूरी तरह से बर्बाद हो गए हैं। ओलों के अत्यधिक वजन और रफ्तार के कारण सेब, आड़ू, प्लम, खुबानी, आम, लीची, माल्टा, संतरा, नाशपाती और नींबू जैसे फलों के पेड़ों से फल टूटकर जमीन पर बिखर गए हैं। कई जगहों पर फलों के साथ-साथ पेड़ों की टहनियां भी टूट गई हैं, जिससे बागवानों को आने वाले सालों में भी नुकसान झेलना पड़ सकता है।
यहां देखिए, लमगड़ा में ओलावृष्टि से हुए नुकसान की वीडियो —
खेतों में ही चौपट हुईं मौसमी सब्जियां
बागानों के साथ-साथ नकदी फसलों और मौसमी सब्जियों पर भी इस ओलावृष्टि का जानलेवा असर पड़ा है। स्थानीय किसानों की आजीविका का मुख्य साधन मानी जाने वाली शिमला मिर्च, बैंगन, गोभी, टमाटर, आलू और अन्य पत्तेदार सब्जियां खेतों में ही नष्ट हो गई हैं। कई क्षेत्रों में तो खेतों में तैयार खड़ी फसलें इस कदर बर्बाद हुई हैं कि अब वहां कुछ भी शेष नहीं बचा है।
किसानों के सामने रोजी-रोटी का संकट, मुआवजे की मांग
इस अप्रत्याशित प्राकृतिक आपदा ने काश्तकारों को गहरे सदमे में डाल दिया है। सालभर की गाढ़ी कमाई डूब जाने से स्थानीय किसानों के सामने अब रोजी-रोटी और परिवार के भरण-पोषण का गंभीर संकट खड़ा हो गया है। बेबसी के इस आलम में स्थानीय लोगों और काश्तकारों ने राज्य सरकार और जिला प्रशासन से गुहार लगाई है। पीड़ित किसानों की मांग है कि नुकसान का तत्काल निष्पक्ष आकलन कराया जाए और उन्हें जल्द से जल्द उचित मुआवजा दिया जाए।
नुकसान की भयावहता और किसानों के आक्रोश को देखते हुए उम्मीद की जा रही है कि प्रशासन स्तर पर जल्द ही प्रभावित क्षेत्रों में वास्तविक नुकसान का सटीक अंदाजा लगाने के लिए राजस्व, कृषि और उद्यान विभाग की संयुक्त टीमों को भेजा जायेगा, ताकि जल्द से जल्द रिपोर्ट तैयार कर शासन को भेजी जा सके और प्रभावितों को राहत पहुंचाई जा सके।


