HomeUttarakhandAlmoraअल्मोड़ा: आधी रात को होटल से निकलकर जंगल में जा फंसा पर्यटक

अल्मोड़ा: आधी रात को होटल से निकलकर जंगल में जा फंसा पर्यटक

खूंखार जानवरों के बीच ऐसे कटी रात, ऐसे किया रेस्क्यू

CNE REPORTER, अल्मोड़ा। उत्तराखंड के शांत पहाड़ों के बीच बीते कल एक ऐसी घटना घटी जिसने पुलिस और प्रशासन की सांसें अटका दीं। महाराष्ट्र से अल्मोड़ा घूमने आए एक पर्यटक की ‘होमसिकनेस’ (घर की याद) उसे मौत के करीब ले गई। घने अंधेरे और जंगली जानवरों की मौजूदगी के बीच चले तीन घंटे के हाई-वोल्टेज सर्च ऑपरेशन के बाद युवक को सकुशल बचा लिया गया है।

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महाराष्ट्र निवासी 20 वर्षीय जय प्रदीप सुनार अपने दोस्तों के साथ चितई क्षेत्र के एक होटल में ठहरा हुआ था। रात करीब 12:00 बजे, जब उसके साथी गहरी नींद में थे, जय अचानक बिना किसी को बताए होटल से बाहर निकल गया। उसे घर की याद सता रही थी, लेकिन उसे अंदाजा नहीं था कि देवभूमि के ये घने जंगल रात के वक्त कितने खतरनाक हो सकते हैं।

जंगल में प्रवेश करते ही जय का सामना जंगली जानवरों से हुआ। रात के सन्नाटे में जानवरों की आहट और चमकती आंखों ने उसे बुरी तरह डरा दिया। जान बचाने के लिए वह बेतहाशा भागा, लेकिन अंधेरे के कारण रास्ता भटक गया और पहाड़ी ढलान से नीचे गिरकर गंभीर रूप से घायल हो गया।

पुलिस और SDRF का ‘रेस्क्यू मिशन’

दोस्तों की सूचना पर कोतवाली अल्मोड़ा पुलिस और SDRF की टीमें तुरंत सक्रिय हुईं। टीम के सामने दोहरी चुनौती थी—एक तरफ दुर्गम पहाड़ और दूसरी तरफ गुलदार (तेंदुए) का संभावित खतरा। टॉर्च की रोशनी और आपसी तालमेल के साथ टीम ने चप्पा-चप्पा छान मारा।

ऑपरेशन की मुख्य बातें:

  • सर्च का समय: रात 12:00 बजे से तड़के 03:00 बजे तक।
  • चुनौती: अंधेरी रात और कठिन भौगोलिक परिस्थितियां।
  • सफलता: धारानौला क्षेत्र के पास युवक को खोज निकाला गया।

भावुक हुए दोस्त, पुलिस का जताया आभार

रेस्क्यू टीम ने जब जय को ढूंढा, तो वह चोटिल और सहमा हुआ था। टीम ने उसे मौके पर ही फर्स्ट एड देकर उसकी स्थिति को संभाला। जब जय को सुरक्षित लेकर टीम वापस पहुंची, तो उसके दोस्तों की आंखों में राहत के आंसू थे। उन्होंने अल्मोड़ा पुलिस की जांबाजी को सलाम करते हुए उनकी त्वरित कार्रवाई का आभार जताया।


एक जरूरी सलाह: पहाड़ी क्षेत्रों में रात के समय अनजान रास्तों और जंगलों की ओर अकेले न जाएं। जंगली जानवरों का व्यवहार अप्रत्याशित होता है और अंधेरे में पहाड़ी रास्ते जानलेवा साबित हो सकते हैं।

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Deepak Manral
Deepak Manralhttp://creativenewsexpress.com
तीन दशकों के करीब का कार्यानुभव रखने वाले दीपक मनराल पत्रकारिता जगत का एक सम्मानित नाम हैं। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत वर्ष 1996 में एक त्रैमासिक पत्रिका के सहयोगी संपादक के रूप में की थी। बीते 25 वर्षों में उन्होंने अमर उजाला, दैनिक भास्कर, दैनिक आज, उत्तरांचल दीप और चारधाम टाइम्स जैसे प्रतिष्ठित समाचार पत्रों में 'ब्यूरो प्रमुख' की महत्वपूर्ण जिम्मेदारियाँ निभाई हैं। वर्तमान में वे 'गंगोत्री अक्षर उजाला पोस्ट' के संपादक हैं और सीएनई (CNE) मीडिया हाउस के संस्थापक व स्वामी के रूप में डिजिटल मीडिया को नई दिशा दे रहे हैं। अपनी निष्पक्ष और ईमानदार पत्रकारिता के लिए पहचाने जाने वाले मनराल आज भी प्रतिदिन 'ग्राउंड ज़ीरो' से जुड़कर सक्रिय पत्रकारिता कर रहे हैं।
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