AlmoraBageshwarUttarakhand

शोषण के चलते दरबारी के रुप में काम कर रहे पत्रकार

पत्रकारिता की चुनौतियों पर पत्रकारों ने जताई गहरी चिंता
हिंदी पत्रकारिता दिवस पर अल्मोड़ा/बागेश्वर में गोष्ठियां

सीएनई रिपोर्टर, अल्मोड़ा/बागेश्वरः हिंदी पत्रकारिता का समाज के विकास व दिशा देने में अहम् योगदान रहा है और है, लेकिन वर्तमान में पत्रकारिता के मापदंड बदल गए हैं। पत्रकारिता के समक्ष अनेकानेक चुनौतियां खड़ी हो गई हैं। हालात ये है कि समाज को आईना दिखाने का काम करने वाले पत्रकार आज दरबारी के रूप में कार्य करने लगे हैं और शोषण का सामना कर रहे हैं। ऐसे में पत्रकारों को एकजुट रहकर इन चुनौतियों का मुकाबला करना होगा। यह बात आज अल्मोड़ा व बागेश्वर में पत्रकारिता दिवस पर आयोजित गोष्ठियों में कही गई।

अल्मोड़ाः हिन्दी पत्रकारिता दिवस के उपलक्ष्य में यहां पत्रकारों ने सूचना विभाग में एक गोष्ठी आयोजित की। जिसमें ’पत्रकारिता की चुनौती’ विषय पर चर्चा हुई। वरिष्ठ पत्रकार पीसी तिवारी की अध्यक्षता में आयोजित गोष्ठी में कई पत्रकारों ने अपने विचार रखते हुए कहा कि कहा कि पूरे समाज को पत्रकारिता दिशा देती है और पत्रकार समाज को आईना दिखाने का काम करता है। लेकिन इसके बावजूद आज के दौर में पत्रकारिता एक बेहद चुनौतीपूर्ण कार्य बन चुका है। वक्ताओं ने चिंता जताते हुए कहा कि एक ओर माफिया तरह-तरह से पत्रकारों पर दवाब डालते हैं, वहीं दूसरी तरफ देश में आतंकवाद व नक्सलवाद के बीच में पत्रकारिता करना भी चुनौतीपूर्ण बन गया है।

गोष्ठी के अंत में दैनिक जनमोर्चा के प्रधान सम्पादक एवं प्रेस काउन्सिल आफ इण्डिया के अध्यक्ष रहे शीतला सिंह तथा युवा पत्रकार उमेश पंत के असामयिक निधन पर गहरा दुख व्यक्त किया और दो मिनट का शोक कर श्रद्वांजलि अर्पित की गयी। संचालन वरिष्ठ पत्रकार राजेन्द्र रावत ने किया। बैठक में किशन जोशी, हरीश भण्डारी, निर्मल उप्रेती, सुरेश तिवारी, उदय किरौला, शिवेन्द्र गोस्वामी, नवीन उपाध्याय, नसीम अहमद, विनोद जोशी, अशोक पाण्डे, दिनेश भट्ट, राजीव कर्नाटक, दीपांशु पाण्डे, संतोष बिष्ट, दयाकृष्ण काण्डपाल, एमडी खान आदि उपस्थित रहे।

बागेश्वरः हिंदी पत्रकारिता दिवस के अवसर पर जिला पत्रकार संगठन एवं एनयूजे के संयुक्त तत्वाधान में गोष्ठी आयोजित कर वर्तमान दौर में पत्रकारों एवं पत्रकारिता की चुनौतियों पर चिंता व्यक्त की गई। इस अवसर पर वक्ताओं ने हिन्दी पत्रकारिता पर विस्तार से चर्चा की। गोष्ठी में पत्रकारों ने कहा कि हिंदी पत्रकारिता तब तक जिंदा रहेगी, जब तक पत्रकार जिंदा रहेंगे, क्योंकि हिंदी पत्रकारिता का अस्तित्व जितना पूर्व में प्रासंगिक था, उतना आज के दौर में भी है। उम्मीद है भविष्य में और अधिक रहेगी।

वक्ताओं ने कहा कि बीते वर्षाे में जो पत्रकारिता थी, वो आज के दौर में नहीं रह गयी है। हर जगह मीडिया कर्मियों पर दबाव व चुनौतियां बढ़ रही है, जो बेहद चिंताजनक है। मुख्य अतिथि त्रिलोक चन्द्र भट्ट ने कहा कि समाज को दिशा देने का काम पत्रकारिता करती है, जबकि समाज को आईना दिखाने का काम पत्रकार करता है। जो समय के साथ अब चुनौतीपूर्ण हो चुका है। इसलिए समय रहते पत्रकारों को एकजुट होकर कार्य करना होगा। वरिष्ठ पत्रकार रमेश कृषक ने कहा कि पत्रकारिता के मापदंड आज के दौर में बदल गए है। पत्रकार अब दरबारी के रूप में कार्य करने लगे हैं। जिस कारण उनका शोषण भी हो रहा है।

सुरेश पांडेय ने कहा कि पत्रकार व पत्रकार यूनियनों के अलग अलग गुटों के चलते आज पत्रकारों के ऊपर झूठे मुकदमे दर्ज हो रहे हैं। प्रशासन उन पर जबरन दबाव बना रहा है। जो चिंतनीय है। उन्होंने सभी से एकजुटता की अपील भी की। अंत में पत्रकार उमेश पंत के निधन पर शोक व्यक्त किया गया। बैठक को अध्यक्षता संजय साह व संचालन दीपक पाठक ने किया। इस मौके पर त्रिलोक चंद्र भट्ट, केशव भट्ट, घनश्याम जोशी, लोकपाल कोरंगा, हिमांशु जोशी, पूरन तिवारी, शंकर पांडेय, नीरज पांडेय, संजय साह, पंकज डसीला, सुंदर सुरकाली, लता प्रसाद, रमेश कृषक, कुलदीप मटियानी, जगदीश उपाध्यक्ष आदि मौजूद थे।

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