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‘किसानी में कमाल’: अल्मोड़ा की लता ने चितई में पुष्प उत्पादन व जैविक खेती से गढ़ी पहचान

★ मॉडल बन उभरी लता की काश्तकारी, हर काश्तकार उनकी खेतीबाड़ी के ढंग का मुरीद
★ पहले उद्यान विभाग से शाबासी, अब टिहरी से सीख लेने पहुंची महिला काश्तकार

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सीएनई रिपोर्टर, अल्मोड़ा: जिला मुख्यालय के निकटवर्ती चितई में महिला कृषक लता कांडपाल की किसानी का हर कोई मुरीद है। कड़ी मेहनत से उनके द्वारा की जा रही खेती मिशाल व मॉडल बनकर अन्य काश्तकारों को प्रेरणा दे रही है। हाल में उद्यान महकमे की टीम ने उनके प्रयासों की काफी सराहना की। अब टिहरी जनपद के विभिन्न विकासखंडों से महिला स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी कृषक महिलाओं ने चितई में लता कांडपाल के पुष्प उत्पादन एवं जैविक खेती को सीख लेने के उद्देश्य से भ्रमण किया। इस मौके पर राज्य जैविक केंद्र के वैज्ञानिक डॉ. देवेंद्र नेगी एवं सुमन भी मौजूद रहे।

भ्रमण के दौरान लता कांडपाल ने महिलाओं को पर्वतीय क्षेत्रों में बंदरों से फसलों को हो रहे नुकसान से निपटने के अपने अनुभव साझा किए। उन्होंने बताया कि लगातार हो रहे नुकसान के बावजूद उन्होंने हिम्मत नहीं हारी, बल्कि खेती की दिशा बदल ली और पुष्प उत्पादन को अपनी आजीविका का प्रमुख माध्यम बनाया। आज उनके खेतों में उगाए गए ताजे एवं सुगंधित फूल प्रतिदिन गोलू देवता मंदिर, चितई में पूजा-अर्चना के लिए उपलब्ध कराए जा रहे हैं। इसके साथ ही स्थानीय बाजार के दुकानदारों को भी नियमित रूप से फूल उपलब्ध कराकर वे अच्छी आय अर्जित कर रही हैं।

लता कांडपाल ने महिला कृषकों को बताया कि बदलती परिस्थितियों में यदि किसान नई सोच, नवाचार और स्थानीय मांग के अनुरूप खेती करें, तो सीमित संसाधनों में बेहतर आमदनी अर्जित की जा सकती है। उन्होंने महिलाओं को पुष्प उत्पादन, जैविक खेती और स्थानीय बाजार से जुड़कर स्वरोजगार के नए अवसर विकसित करने के लिए प्रेरित किया। महिला कृषकों ने लता कांडपाल के कार्यों की मुक्त कंठ से सराहना करते हुए कहा कि उनका मॉडल पर्वतीय क्षेत्रों के किसानों, विशेषकर महिलाओं के लिए अत्यंत प्रेरणादायक है। उन्होंने कहा कि एक शिक्षित महिला ने चुनौतियों को अवसर में बदलकर यह साबित कर दिया है कि मेहनत, नवाचार और सकारात्मक सोच के बल पर खेती को सम्मानजनक एवं लाभकारी व्यवसाय बनाया जा सकता है। यह मॉडल अन्य महिलाओं और युवाओं के लिए भी प्रेरणादायी है।

राज्य जैविक केंद्र के वैज्ञानिकों ने भी लता कांडपाल के प्रयासों की प्रशंसा करते हुए कहा कि उन्होंने आस्था, जैविक खेती और स्वरोजगार का उत्कृष्ट समन्वय प्रस्तुत किया है। उनका यह प्रयास न केवल किसानों के लिए एक सफल मॉडल है, बल्कि समाज को यह सकारात्मक संदेश भी देता है। आज लता कांडपाल का यह पुष्प उत्पादन मॉडल क्षेत्र में प्रेरणा का केंद्र बन चुका है। स्थानीय लोग भी उनके कार्यों की सराहना कर रहे हैं।

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