HomeUttarakhandBageshwarबागेश्वर: वनाग्नि-वन्यजीव संघर्ष पर मानवाधिकार आयोग सख्त

बागेश्वर: वनाग्नि-वन्यजीव संघर्ष पर मानवाधिकार आयोग सख्त

पर्यावरण संरक्षण के लिए दिए कड़े निर्देश

सीएनई रिपोर्टर, बागेश्वर। जिले में पर्यावरण संरक्षण और मानवाधिकारों की रक्षा को लेकर एक महत्वपूर्ण समीक्षा बैठक संपन्न हुई। राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) के विशेष मॉनिटर (पर्यावरण, जलवायु परिवर्तन एवं मानवाधिकार) विद्या भूषण कुमार ने जनपद का दौरा कर वन संरक्षण, वनाग्नि नियंत्रण और मानव-वन्यजीव संघर्ष जैसे संवेदनशील मुद्दों पर अधिकारियों के साथ विस्तृत चर्चा की।

ADVERTISEMENTSAd
Advertisement

बैठक के दौरान जिलाधिकारी आकांक्षा कोंडे और प्रभागीय वनाधिकारी (DFO) आदित्य रत्ना ने जनपद की वर्तमान स्थिति पर एक पावरपॉइंट प्रेजेंटेशन दिया। जिलाधिकारी ने बताया कि वनाग्नि की घटनाओं को न्यूनतम करने के लिए जिले में एक प्रभावी रणनीति पर काम हो रहा है। चीड़ की पत्तियों (पिरूल) का निस्तारण केवल आग रोकने के लिए ही नहीं, बल्कि आजीविका के लिए भी किया जा रहा है। पिरूल संग्रहण को बाजार से जोड़कर स्थानीय ग्रामीणों के लिए आय के नए स्रोत विकसित किए जा रहे हैं।

सामुदायिक सहभागिता और नवाचार

DFO आदित्य रत्ना ने बताया कि वन विभाग तकनीक के साथ-साथ पारंपरिक तरीकों का भी उपयोग कर रहा है। वन्यजीव संघर्ष कम करने के लिए नुक्कड़ नाटकों और प्रशिक्षण कार्यक्रमों के जरिए ग्रामीणों को जागरूक किया जा रहा है। बैठक में हंस फाउंडेशन द्वारा पिरूल प्रबंधन में किए जा रहे कार्यों की सराहना की गई।

विशेष मॉनिटर के मुख्य निर्देश: ‘वन क्षेत्र डंपिंग यार्ड नहीं’

विद्या भूषण कुमार ने समीक्षा के दौरान भविष्य की चुनौतियों को देखते हुए कई महत्वपूर्ण सुझाव और निर्देश दिए:

अग्निशमन कर्मियों की सुरक्षा: उन्होंने जोर देकर कहा कि वनाग्नि बुझाते समय फील्ड स्टाफ और कर्मियों की सुरक्षा सर्वोपरि होनी चाहिए। उन्हें आधुनिक सुरक्षा उपकरण उपलब्ध कराए जाएं।

ठोस अपशिष्ट प्रबंधन (Waste Management): उन्होंने सख्त लहजे में कहा कि वन क्षेत्रों को कूड़ा डंपिंग ग्राउंड न बनाया जाए। प्लास्टिक और गंदगी के कारण वन्यजीव अपने प्राकृतिक आवास छोड़कर आबादी की ओर रुख कर रहे हैं, जो मानव-वन्यजीव संघर्ष का मुख्य कारण है।

जल स्रोतों का पुनरुद्धार: उत्तराखंड की पारंपरिक जल प्रणालियों यानी ‘नौलाओं’ के संरक्षण के लिए जन-आंदोलन चलाने और आकर्षक अभियान शुरू करने पर बल दिया गया।

“वनाग्नि की पिछली घटनाओं से सीख लेकर हमें ऐसी रणनीति बनानी होगी कि भविष्य में इसकी पुनरावृत्ति न हो। पर्यावरण और मानवाधिकार एक-दूसरे से जुड़े हैं, और प्रकृति का संरक्षण ही मानवता का संरक्षण है।”
— विद्या भूषण कुमार, विशेष मॉनिटर (NHRC)

बैठक में आर.सी. तिवारी, मुख्य विकास अधिकारी (CDO), प्रियंका रानी, उप जिलाधिकारी (SDM), शिखा सुयाल, जिला आपदा प्रबंधन अधिकारी स​हित कई आला अधिकारी मौजूद थे।

ADVERTISEMENTS
भारत का पहला प्राइवेट ऑर्बिटल रॉकेट Vikram-1

🚀 भारत का पहला Private Orbital Rocket

Vikram-1 ने रचा इतिहास • पूरी वीडियो देखने के लिए नीचे क्लिक करें

▶️ अभी वीडियो देखें
RELATED ARTICLES

Leave a reply

Please enter your comment!
Please enter your name here

Most Popular

Recent Comments