Himachal

नालागढ़ : 67 साल से सेरी झांडियां में शिवलिंग बना हुआ है आस्था का केंद्र

नालागढ़। नालागढ़ के सेरी झांडियां स्थित मंदिर में कई साल पहले अचानक से निकला शिवलिंग आस्था व श्रद्धा का केंद्र बना हुआ है। निकले हुए शिवलिंग को हिलाने का भरपूर प्रयास किया, लेकिन यह अपनी जगह से टस से मस नहीं हुआ। इस शिवलिंग के चारों ओर गड्ढा खोदा गया और रस्से डालकर इसे हिलाने की चेष्टा की गई, लेकिन यह अपनी जगह से हिला नहीं, लेकिन अपनी मर्जी के अनुसार यह दिशा बदल देता था। लोगों की यहां प्रगाढ़ आस्था बनती गई और इस शिवलिंग के निकलने के उपरांत गांव के किसी भी व्यक्ति यहां तक कि मवेशी को भी नुकसान नहीं हुआ। सैंकड़ों वर्ष पूर्व स्वयं प्रकट शिवलिंग निकलने के बाद यहां मई, 1954 में यहां मंदिर की स्थापना करवाई गई और भल्लेश्वर महादेव मंदिर के पुजारी स्व.लभूराम ने यहां संत सम्मेलन का भी आयोजन किया। तब से लेकर यहां पर मंदिर स्थापना के अवसर पर यहां शिव पुराण की कथा का आयोजन करने के साथ भंडारे का आयोजन किया जाता है। क्षेत्र के बुजुर्गों के अनुसार उन्हें यह तो मालूम नहीं है कि यह शिवलिंग कितना पुराना है, लेकिन उन्हें इस बात का अपने पूर्वजों से पता चला कि जिस समय यहां शिवलिंग की उत्पत्ति हुई थी तो यहां पर कंटीलें झाड़ थे और केंदू के पेड़ के नीचे स्वयं निकला हुआ शिवलिंग था। क्षेत्र के बुजुर्गों का कहना है कि शिवलिंग के प्रस्फुटित होने के बाद ग्रामीण यहां पर रोट, अनाज व अन्य प्रसाद सामग्री चढ़ाने के साथ पूजा अर्चना करने लगे।

तत्कालीन भल्लेश्वर मंदिर के पुजारी स्वर्गीय भगवती दास के पिता स्वर्गीय लभू राम ने यहां आकर शिवलिंग देखा तो उन्होंने इसकी खुदाई करवाने के लिए ग्रामीणों को कहा। ग्रामीणों ने इसे निकालने के लिए एक बहुत बड़ा करीब दस फुट गहरा गडढा खोदा और इसे निकालने की भरसक कोशिश की। जब प्रयास असफल रहें और शिवलिंग टस से मस न हुआ तो उन्होंने रस्से डालकर इसे निकालने का भी प्रयास किया और इसका मुंह विपरीत दिशा में मोडऩा चाहा, लेकिन शिवलिंग वह हिला न सकें। इसके बाद लभू राम ने ग्रामीणों को यहां मंदिर की स्थापना करने के लिए कहा। जब यहां शिवलिंग निकला और मंदिर बनाने की योजना पर कार्य चल रहा था तो लभू राम ने गांव के एक व्यक्ति को शिवलिंग स्थल पर पूजा अर्चना करने के लिए तैनात किया, जिसका जिम्मा स्व. अच्छू राम को सौंपा गया। ग्रामीणों के पास साधन संपन्न न होने के कारण यहां पूजा सामग्री के लिए पैसे नहीं थे, जिस पर नंबरदार रामदितू ने मंदिर के साथ लगती करीब दो बीघा भूमि मंदिर के नाम दान दी और इसमें उगने वाली फसलों से प्राप्त आय को मंदिर में पूजा अर्चना व अन्य कामों में प्रयोग में लाया जाता है।

लोगों का मत है कि जब से यहां शिवलिंग की उत्पति हुई है और मंदिर स्थापना हुई है, सेरी व झांडिया गांव के लोगों का कोई नुकसान नहीं हुआ है। यहां तक कि वर्ष 1990 में चिकनी नदी के भारी उफान में आने पर कई मवेशी बह गए थे और एक बच्चा भी बह गया था, लेकिन नदी के बहाव से कुछ दूर जाने पर मवेशी व बच्चा भोलेनाथ के आशीर्वाद से सही सलामत मिले, जिन्हें खरोंच तक नहीं आई है। आज यहां खासतौर पर शिवरात्रि में भारी संख्या में श्रद्धालुओं का सैलाब उमड़ता है और लोग यहां पूजा अर्चना करते है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *


Back to top button
error: Content is protected !!
किचन गार्डन में जरूर लगाएं ये पौधे, सेहत के लिए भी फायदेमंद Uttarakhand : 6 PCS अधिकारियों के तबादले शाहरूख खान की फिल्म डंकी 100 करोड़ के क्लब में शामिल हिमाचल में वर्षा, बर्फबारी होने से बढ़ी सर्दी Uttarakhand Job : UKSSSC ने निकाली 229 पदों पर भर्ती
News Hub