सीएनई रिपोर्टर, बागेश्वर
बागेश्वर जिले में, हिमालय को बचाने के लिए एक अनूठी और महत्वपूर्ण पहल शुरू की गई है। प्रभागीय वनाधिकारी (DFO) आदित्य रत्न ने ‘हिमालय बचाओ’ कार्यक्रम के तहत विभाग के सभी अधिकारियों और कर्मचारियों को हिमालय की रक्षा करने की शपथ दिलाई।

मानव सभ्यता के लिए हिमालय का महत्व
DFO आदित्य रत्न ने इस मौके पर हिमालय के महत्व पर जोर देते हुए कहा कि यह सिर्फ पहाड़ों का समूह नहीं, बल्कि हमारी मानव सभ्यता का आधार है। उन्होंने कहा कि हिमालय की सुरक्षा सुनिश्चित करना हमारा सामूहिक कर्तव्य है, क्योंकि इसका सीधा संबंध जलवायु और जैव विविधता से है। हिमालयी इको-सिस्टम में किसी भी तरह की छेड़छाड़ का असर पूरे देश और विश्व पर पड़ सकता है।
ग्रीन इंडिया मिशन के तहत प्रयास
यह कार्यक्रम ग्रीन इंडिया मिशन योजना के तहत आयोजित किया गया था, जिसका उद्देश्य भारत के प्राकृतिक संसाधनों को बढ़ाना और जलवायु परिवर्तन के प्रभावों को कम करना है। बागेश्वर वन विभाग ने घोषणा की है कि वे इस मिशन के तहत पौधारोपण, प्लास्टिक उन्मूलन और जन-जागरूकता जैसे कार्यक्रम चलाएंगे।
गुलदार और दुर्लभ जड़ी-बूटियों का संरक्षण
वन विभाग ने बताया कि उच्च हिमालयी क्षेत्र में गुलदार (तेंदुआ) की संख्या का आकलन करने के लिए एक विशेष परियोजना “सिक्योरिंग स्नो लेपर्ड पापुलेशन, अल्पाइन इको-सिस्टम इन द कुमाऊं हिमालयाज” भी चल रही है। इस परियोजना के तहत स्थानीय ग्रामीणों को भी जोड़ा जा रहा है ताकि इको-सिस्टम को बेहतर ढंग से समझा और संरक्षित किया जा सके।
इसके साथ ही, दुर्लभ जड़ी-बूटियों और बुग्यालों (घास के मैदानों) को बचाने के लिए जियो जूट का उपयोग किया जा रहा है, जिससे मिट्टी का कटाव रोका जा सके और पौधों के लिए अनुकूल वातावरण बनाया जा सके।
इस कार्यक्रम में एसडीओ सुनील कुमार, तनुजा परिहार, रेंजर केएन पांडे, दीप्ति ओली सहित कई अधिकारी और कर्मचारी मौजूद थे, जिन्होंने हिमालय को सुरक्षित रखने की इस पहल का समर्थन किया। यह कदम दर्शाता है कि बागेश्वर वन विभाग न केवल जंगलों की सुरक्षा कर रहा है, बल्कि हिमालय के नाजुक पर्यावरण को बचाने के लिए भी प्रतिबद्ध है।

