➤ उत्तराखंड एकता मंच की गोष्ठी में मसले पर व्यापक चर्चा

सीएनई रिपोर्टर, बागेश्वर: उत्तराखंड के पर्वतीय क्षेत्रों में 5वीं अनुसूची एवं जनजातीय दर्जा लागू करने की मांग को लेकर उत्तराखंड एकता मंच ने स्थानीय होटल में गोष्ठी आयोजित की। जिसमें विभिन्न जिलों से आए सामाजिक कार्यकर्ताओं, बुद्धिजीवियों और स्थानीय प्रतिनिधियों ने भाग लेते हुए पर्वतीय क्षेत्रों के मूल निवासियों के अधिकारों और संवैधानिक सुरक्षा पर चर्चा की।
गोष्ठी में मंच के राष्ट्रीय संयोजक अनूप बिष्ट ने कहा कि उत्तराखंड के पर्वतीय क्षेत्रों के मूल निवासियों को जल, जंगल, जमीन, रोजगार और सांस्कृतिक पहचान से जुड़े अधिकारों को मजबूत करने के लिए विशेष संवैधानिक प्रावधानों की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि राज्य के सीमांत और पर्वतीय क्षेत्रों में लगातार हो रहे पलायन, बदलती जनसांख्यिकी तथा भूमि संबंधी चुनौतियों को देखते हुए इस विषय पर गंभीरता से विचार किया जाना चाहिए। गोष्ठी में वक्ताओं ने कहा कि देश के कई पर्वतीय एवं आदिवासी क्षेत्रों में विशेष संवैधानिक व्यवस्थाएं लागू हैं, जबकि उत्तराखंड के पर्वतीय इलाकों के लिए भी ऐसी व्यवस्था होनी चाहिए। उन्होंने राज्य सरकार से इस मुद्दे पर व्यापक अध्ययन और जनभावनाओं को ध्यान में रखते हुए आवश्यक कदम उठाने की मांग की।
इस दौरान संगठन की ओर से 22 नवंबर को देहरादून के परेड ग्राउंड में चलो देहरादून कार्यक्रम में अधिक से अधिक लोगों से शामिल होने का आह्वान किया गया। मंच के पदाधिकारियों ने कहा कि यह अभियान पर्वतीय समाज के अधिकारों और पहचान से जुड़े मुद्दों को लेकर जनजागरण का प्रयास है। कार्यक्रम में उपस्थित लोगों ने पर्वतीय क्षेत्रों की सामाजिक, आर्थिक और सांस्कृतिक चुनौतियों पर भी विस्तार से चर्चा की तथा इस विषय को लेकर व्यापक जनसंवाद चलाने की आवश्यकता पर जोर दिया। इस दौरान महेंद्र सिंह रावत, दलीप सिंह खेतवाल, बाला दत्त तिवारी, वरुण चंदोला, कवि जोशी, प्रमोद मेहता,रमेश कृषक पांडे, भुवन कांडपाल, इंद्र सिंह परिहार, दिगम्बर सिंह परिहार आदि मौजूद रहे।


