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कमरे में लटक रही पिता की लाश के पास 03 दिन तक भूखे—प्यासे बैठे रहे दो मासूम, पुलिस आई तो खुला यह राज…..

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सीएनई रिपोर्टर

एक तो लॉकडाउन में नौकरी जाने का गम, दूसरा पत्नी का झगड़े के बाद मायके चले जाना। यह गम जब युवक नही सहन कर पाया तो अपने साथ रह रहे दो मासूम बच्चों की जिम्मेदारी से मुंह मोड़ उसने फांसी के फंदे से लटक आत्महत्या कर ली।

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बच्चे इतने मासूम थे कि उन्हें तो बस इतना पता था कि पापा कुंडे से लटके हैं और कुछ बोल नही रहे। तीन दिन तक बच्चे अपने पापा की लाश के साथ भूखे—प्यासे रहे। यह राज तब ​खुला, जब​ भूख से बिलबिलाते बच्चों ने रोते हुए पड़ोसियों से खाना मांगा। तब जाकर पड़ोसियों को पता चला कि इस घर में तो बच्चों को खाना देने वाला भी कोई नही है।

मृतक के दो मासूम बच्चे, जिन्हें पता भी नही कि पिता इस दुनिया में नही रहे

आपको बता दें कि यह मामला उत्तर प्रदेश के बरेली में घटित हुआ है। घटनाक्रम के अनुसार इज्जतनगर थाना क्षेत्र के गायत्री नगर निवासी मनोज दयाल (35 साल) नोएडा में एक निजी कंपनी में काम करता था। नोएडा में जब लॉकडाउन लगा तो कंपनी का काम मंदा हो गया और उसे घर वापस लौटना पड़ा।

नौकरी चले जाने से जहां मनोज मायूस हो चुका था, वहीं उसके समक्ष अब पत्नी व छह साल के पुत्र व चार साल की बिटिया की परवरिश की जिम्मेदारी भी थी, जो पूरी नही हो पा रही थी। पति अगर बेकाम के घर में बैठ जाये तो पत्नी को यह अखरने लगता है। फिर उन दोनों पर रोज झगड़े होने लगे। मासूम बच्चों के आगे ही पति—पत्नी झगड़ने लगते थे। गत दिनों झगड़ा करे मनोज की पत्नी अपने मायके चली गई। वह दो मासूम बच्चों को भी अपने साथ नही ले गई थी।

इस घटना ने मजोज को इतना विचलित कर दिया कि उसने आत्महत्या करने का फैसला ले लिया। ऐसा करते वक्त उसे एक वक्त के लिए भी शायद अपने मासूम बच्चों का ख्याल नही आया। वह चुपचाप घर के भीतर ही एक कुंडे के सहारे लटक गया और फांसी लगाकार उसने जान दे दी।

मृतक का फाइल फोटो

इस बीच दोनों छोटे बच्चे यह समझते रहे कि पापा पता नही क्यों कुंडे से लटके हैं और वह शव के पास ही बैठे रहे। वह पापा को आवाज़ देते तो कोई उत्तर नही मिलता। उन्होंने सोचा कि पापा गुस्से में हैं, इसलिए बोल नही रहे। जब ऐसे ही तीन दिन बीत गये तो बच्चों को अब भूख बर्दाश्त नही हुई तो उन्होंने खिड़की खोलकर रोते हुए पड़ोसियों से खाना मांगा।

हैरानी की बात यह है कि पड़ोसियों ने तीन दिन तक घर का दरवाजा नही खुलने पर भी स्वयं कुछ जानने—समझने का प्रयास ही नही किया था। जब बच्चों ने उन्हें आवाज लगाई तो उन्होंने खिड़की से झांका तो पाया कि मनोज की लाश एक कुंडे के सहारे लटक रही है। इसके बाद पुलिस को फोन किया गया। पुलिस ने मौके पर पहुंच घटना का जायजा लिया और शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजा।

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पुलिस ने जब बच्चों से प्यार से जानकारी ली तो उन्होंने बताया कि तीन दिन तक वह सिर्फ बिस्कुट और बासी खाना खाते रहे, लेकिन वह भी जब समाप्त हो गया तो पड़ोसियों से खाना मांगा। इज्जतनगर पुलिस के मुताबिक इस मामले में आगे की कार्रवाई चल रही है।

अलबत्ता वर्तमान की आधुनिक जीवन शैली ने कई बड़े सवाल खड़े कर दिये हैं। आज के दौर में हर कोई अपने में इतना व्यस्त है कि उसे यह फुर्सत भी नही कि उसके पड़ोस में क्या हो रहा है। तीन दिन तक पड़ोस के घर का दरवाजा नही खुलता, रोज आंगन में खेलने वाले बच्चे दिखाई नही देते, घर का मुखिया एक पल भी बाहर नही आता। फिर भी वह कैसा पड़ोस है जो उस घर में झांकने भी नही गये। अगर यह बच्चे खुद खिड़की खोल पड़ोसियों को आवाज नही लगाते तो शायद यहां से एक नही, तीन लाशें निकलती।

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Deepak Manral
Deepak Manralhttp://creativenewsexpress.com
तीन दशकों के करीब का कार्यानुभव रखने वाले दीपक मनराल पत्रकारिता जगत का एक सम्मानित नाम हैं। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत वर्ष 1996 में एक त्रैमासिक पत्रिका के सहयोगी संपादक के रूप में की थी। बीते 25 वर्षों में उन्होंने अमर उजाला, दैनिक भास्कर, दैनिक आज, उत्तरांचल दीप और चारधाम टाइम्स जैसे प्रतिष्ठित समाचार पत्रों में 'ब्यूरो प्रमुख' की महत्वपूर्ण जिम्मेदारियाँ निभाई हैं। वर्तमान में वे 'गंगोत्री अक्षर उजाला पोस्ट' के संपादक हैं और सीएनई (CNE) मीडिया हाउस के संस्थापक व स्वामी के रूप में डिजिटल मीडिया को नई दिशा दे रहे हैं। अपनी निष्पक्ष और ईमानदार पत्रकारिता के लिए पहचाने जाने वाले मनराल आज भी प्रतिदिन 'ग्राउंड ज़ीरो' से जुड़कर सक्रिय पत्रकारिता कर रहे हैं।
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