हल्द्वानी बनभूलपुरा रेलवे अतिक्रमण मामले में 50 हजार लोगों को फ़िलहाल राहत। सुप्रीम कोर्ट ने 02 दिसंबर की सुनवाई टालकर नई तारीख 10 दिसंबर तय की। जानिए क्या है मामला और मौके पर कैसी है पुलिस-प्रशासन की तैयारी।
हल्द्वानी, उत्तराखंड। उत्तराखंड के हल्द्वानी स्थित बनभूलपुरा इलाके में रेलवे की जमीन पर हुए अतिक्रमण को हटाने के मामले में आज (02 दिसंबर, 2025) सुप्रीम कोर्ट में होने वाली महत्वपूर्ण सुनवाई टल गई है। इस बहुचर्चित मामले में अब अगली सुनवाई 10 दिसंबर को होगी, जिससे अतिक्रमण की जद में आए करीब 50 हजार लोगों को कुछ समय के लिए राहत मिली है।
चूंकि यह मामला लगभग दो दशकों से चल रहा है और 4,365 से अधिक परिवारों के आशियाने से जुड़ा है, इसलिए पूरे बनभूलपुरा इलाके में तनाव का माहौल बना हुआ था। सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई टलने के बावजूद, दरअसल, पुलिस और प्रशासन ने किसी भी अप्रिय घटना से निपटने के लिए इलाके को हाई-अलर्ट पर रखा था।
🏛️ न्यायिक घटनाक्रम और अहम बातें
- सुनवाई स्थगित: सुप्रीम कोर्ट ने 02 दिसंबर को होने वाली सुनवाई को टाल दिया है। अब यह मामला 10 दिसंबर को सुना जाएगा। हालांकि, कुछ मीडिया रिपोर्ट्स में 09 दिसंबर का भी उल्लेख है, परंतु अधिकतर स्रोत 10 दिसंबर की तारीख बता रहे हैं।
- रेलवे की अपील: रेलवे ने कोर्ट से जल्द सुनवाई का अनुरोध किया था, क्योंकि उन्हें ट्रैक निर्माण कार्य आगे बढ़ाना है।
- अंतरिम रोक बरकरार: इस समय, उत्तराखंड हाईकोर्ट के अतिक्रमण हटाने के आदेश पर सुप्रीम कोर्ट की अंतरिम रोक अभी भी लागू है।
- मास्टर प्लान पर सवाल: पिछली सुनवाई में, सुप्रीम कोर्ट ने उत्तराखंड प्रशासन से पूछा था कि राज्य सरकार के पास इन बस्तियों में रह रहे लोगों के पुनर्वास के लिए क्या मास्टर प्लान है। यह टिप्पणी इस मामले के मानवीय पहलू को उजागर करती है।
- अतिक्रमण का दायरा: रेलवे के अनुसार, हल्द्वानी में 29 एकड़ रेलवे भूमि पर अवैध कब्जा है, जिसमें लगभग 4365 अतिक्रमणकारी शामिल हैं। यह विवाद 2007 से चला आ रहा है।
पुलिस-प्रशासन पूरी तरह सतर्क
सुप्रीम कोर्ट के संभावित फैसले के मद्देनजर, बनभूलपुरा इलाके में पुलिस प्रशासन पूरी तरह से सतर्क था। किसी भी तरह की अफवाह या उपद्रव को रोकने के लिए चप्पे-चप्पे पर सुरक्षा बल तैनात किए गए थे। इतना ही नहीं, पुलिस ने 21 उपद्रवियों को हिरासत में भी लिया।
एसएसपी डॉ. टीसी ने जीरो टॉलरेंस की नीति अपनाते हुए सुरक्षा तैयारियों की बारीकी से निगरानी की। इसके अलावा, कई वरिष्ठ पुलिस अधिकारी, जिनमें एसपी हल्द्वानी मनोज कुमार कत्याल, एसपी/क्षेत्राधिकारी लालकुआं दीपशिखा अग्रवाल, क्षेत्राधिकारी हल्द्वानी अमित कुमार सैनी और प्रभारी थानाध्यक्ष सुशील जोशी शामिल हैं, मैदान में मोर्चा संभाले हुए थे। इस प्रकार, प्रशासन ने यह सुनिश्चित किया कि कानून व्यवस्था बनी रहे।
संक्षेप में, 10 दिसंबर को होने वाली अगली सुनवाई पर पूरे देश की निगाहें टिकी हैं। अतः, यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि सुप्रीम कोर्ट रेलवे की जरूरत और 50 हजार लोगों के आशियाने के बीच किस तरह संतुलन साधता है।

