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रानीखेत : गुहार लगाते थके समाजसेवी पांडे, मगर नहीं मिली बांस गृह बनाने की अनुमति, अपनी ही दुकान से शुरू की सेवा

रानीखेत। रानीखेत शहर तथा आसपास के करीब दो दर्जन गांवों को शवों के दाह संस्कार के ​लिए मुफ्त बांस उपलब्ध करा रहे सतीश पांडेय की पुरानी दरकार आज तक पूरी नहीं हो पाई। उन्होंने बांस को सुरक्षित रखने के लिए छावनी परिषद रानीखेत से बांस गृह बनाने की अनुमति मांगी। मगर आज तक उन्हें समाज सेवा के लिए यह अनुमति नहीं मिली पाई। जिससे वह बेहद नाखुश हैं। वह करीब 20 सालों से समाज सेवा का यह कार्य करते आ रहे हैं। उनकी इस सेवा से क्षेत्र से लोग परिचित हैं।
सतीश पाण्डेय व उनकी पत्नी यहां फर्नीचर विक्रेता है। उनकी रानीखेत बाजार में दुकान है। श्री पांडे स्वयं के खर्चे से अनेकों लावारिश शवों का दाह संस्कार कर चुके हैं और शवदाह के लिए असहाय परिवारों की मदद भी करते आ रहे हैं। वह दाह संस्कार के लिए बांस का इंतजाम कर एकत्रित किए रखते हैं। लेकिन कोई व्यवस्था नहीं होने से उन्हें बांस खुले में रखना पड़ता है। खुले में होने के कारण कई बार उनका बांस चोरी हो जाता है। बरसात में बांस सड़गल जाता है तथा गर्मी में सूख जाता है। इससे उन्हें हर साल 15—20 हजार रूपये का नुकसान हो जाता है। नाराजगी व्यक्त करते हुए श्री पांडे ने बताया कि वह परिषद से गुहार लगाते लगाते थक गये हैं। इस संबंध में वह कई बार अधिशासी अधिकारी व छावनी परिषद के अध्यक्ष से ​मिलकर वार्ता कर चुके हैं और उन्हें आश्वासन भी मिले, मगर किस्सा ढाक के तीन पात वाली कहावत को चरितार्थ करने वाला है। उन्हें आज तक बांस गृह बनाने की अनुमति नहीं मिली। अब मजबूर होकर उन्होंने अपनी ही दुकान से मुफ्त बांस की सेवा आरम्भ कर दी है। उन्होंने कहा है कि बांस गृह की अनुमति के लिए वह छावनी परिषद से अंतिम सांस तक लड़ाई लड़ते रहेंगे।

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