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अल्मोड़ा : जंगल छोड़ प्राण त्यागने बाजार आई बाघिन, घावों से बह रहा था खून

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सीएनई रिपोर्टर, अल्मोड़ा

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यहां जंगल से घायल अवस्था में बाजार क्षेत्र में पहुंचे एक टाइगर की मौत हो गई। समझा जा रहा है कि किसी अन्य वन्य जीव से हुए संघर्ष के बाद उसकी मौत हुई है। यह मामला सल्ट विकासखंड की मर्चुला बाजार का है। वन विभाग के अनुसार यह एक बाघिन थी, जिसकी अनुमानित आयु करीब 11 साल रही होगी।

बताया जा रहा है कि मर्चुला बाजार में बीती देर रात एक बाघिन घूमती हुई दिखी। जिसे देख वहां मौजूद लोगों में हड़कंप मच गया। यह टाइगर अपनी जान बचाने के लिए पहले एक ढाबे में, फिर पंजाब नेशनल बैंक के पास वाली गैलरी में घुस गया। जब तक वन विभाग से रेस्क्यू दल पहुंचा, तब तक टाइगर की मौत हो गई थी।

वन विभाग के अधिकारियों के अनुसार सोमवार रात करीब 9 बजे के आस-पास बाघ को सर्वप्रथम देखा गया। लोगों ने बताया कि वन विभाग के रेस्क्यू दल ने जब टाइगर को भगाने के लिए फायर किए, तब वह डर कर मरचूला बाजार स्थित पीएनबी बैंक के पास एक गली में जा घुसा और वहीं कुछ देर बाद उसकी मौत हो गई। फिलहाल वन विभाग की टीम ने बाघ के शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए रेसक्यू सेंटर ढैला, रामनगर भेज दिया है।

इधर रेंजर अमोल इष्टवाल के अनुसार बाघ की शरीर में कई घावों के निशान हैं। जिनसे खून बहता हुआ देखा गया है। हालांकि मौत का स्पष्ट कारण नहीं पता चल पाया है, लेकिन प्रथम दृष्टया यही लगता है कि उसका किसी अन्य बाघ या अन्य विशाल जानवर से संघर्ष हुआ होगा। इस मादा बाघ की अनुमानित आयु करीब 11 वर्ष रही होगी। ज्ञात रहे कि कॉर्बेट पार्क के कालागढ़ टाइगर रिजर्व एरिया का सीमावर्ती क्षेत्र मर्चुला है। यहां कई बार बाघ जंगल से आ जाया करते हैं। कुछ दिन पूर्व भी मंदाल रेंज के अंतर्गत जमरिया में बाघ ने एक महिला पर हमला कर दिया था।

ज्ञात रहे कि जंगलों में रहने वाले बाघ अकसर विपरीत परिस्थितियों के चलते केवल 10 से 12 साल तक ही जीवित रह पाते हैं, लेकिन पर्याप्त भोजन व अनुकूल वातावरण मिले तो यह 25 साल तक का जीवन चक्र पूरा करते पाये गये हैं। अमूमन बाघ असमय बीमारी, आपसी संघर्ष या किसी अन्य दुर्घटना के चलते मारे जाते हैं। आम तौर पर देखा गया है कि घायल होने के बाद काफी दिनों तक शिकार नहीं कर पाने के कारण बाघ कमजोर हो जाते हैं और इनकी मौत हो जाया करती है।

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SOURCE: YOUTUBE SHORTS
Deepak Manral
Deepak Manralhttp://creativenewsexpress.com
तीन दशकों के करीब का कार्यानुभव रखने वाले दीपक मनराल पत्रकारिता जगत का एक सम्मानित नाम हैं। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत वर्ष 1996 में एक त्रैमासिक पत्रिका के सहयोगी संपादक के रूप में की थी। बीते 25 वर्षों में उन्होंने अमर उजाला, दैनिक भास्कर, दैनिक आज, उत्तरांचल दीप और चारधाम टाइम्स जैसे प्रतिष्ठित समाचार पत्रों में 'ब्यूरो प्रमुख' की महत्वपूर्ण जिम्मेदारियाँ निभाई हैं। वर्तमान में वे 'गंगोत्री अक्षर उजाला पोस्ट' के संपादक हैं और सीएनई (CNE) मीडिया हाउस के संस्थापक व स्वामी के रूप में डिजिटल मीडिया को नई दिशा दे रहे हैं। अपनी निष्पक्ष और ईमानदार पत्रकारिता के लिए पहचाने जाने वाले मनराल आज भी प्रतिदिन 'ग्राउंड ज़ीरो' से जुड़कर सक्रिय पत्रकारिता कर रहे हैं।
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