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खूंखार और चालाक शिकारी हैं गुलदार ! ऐसे बचायें अपने पालतू जानवर

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सीएनई डेस्क

आए दिन गुलदारों द्वारा पालतू मवेशियों का शिकार किए जाने की घटनाएं आम हो चुकी हैं। आंकड़े बताते हैं कि झुंडों में घूमने वाले आवारा जानवरों के बजाए आपके घरों में रहने वाले पालतू कुत्ते और अन्य मवेशी गुलदारों का आसान शिकार बनते हैं।

दरअसल, गुलदार का सबसे प्रिय भोजन में कुत्ता शामिल ही नहीं है। वन्य जीव विशेषज्ञों के अनुसार गुलदार यानी लेपर्ड का सबसे प्रिय भेजन में चीतल, हिरण और जंगली सूअर आते हैं। अगर यह मानवीय इलाकों में आ जाये तो बकरियों, भेड़ों, गाय-भैंस के बछड़ों को सबसे पहले चुनता है। इन शिकारों के नहीं मिलने पर कुत्तों को अपना निवाला बनाता है।

कुछ शोधों में यह बात सामने आई है कि जब गुलदार इंसानी बस्तियों में घुसकर जानवरों का शिकार करने लगता है तो बाद में उसके आदमखोर होने की आशंका भी बड़ जाती है। खास तौर पर यदि वह कुत्तों को अपना शिकार बनाने लगता है तो इंसानों के बहुत करीब वह पहुंच जाता है। कई बार शिकार में सफल हो जाने पर उसका धीरे-धीरे आत्म विश्वास बढ़ने लगता है और वह रोजाना इंसानी घनी बस्तियों की तरफ पहुंचने लगता है।

गुलदार की आदतें:

⏩ गुलदार अकसर देर रात को शिकार की तलाश में निकला करते हैं, लेकिन यदि इलाका सुनसान हो और खतरा महसूस नहीं हो तो वह शाम ढलते ही धमक जाते हैं।

⏩ गुलदार पेड़ों में चढ़ने में माहिर शिकारी है। जहां बाघ व शेर अधिक बड़े पेड़ों पर नहीं चढ़ पाते, वहीं गुलदार न केवल ऊंचे पेड़ों, बल्कि देर रात को मकानों की छतों में भी आसानी से चढ़ जाया करते हैं।

⏩ गुलदार यदि नरभक्षी हो जाये तो वह पहले के मुकाबले और अधिक चालाक हो जाता है।

⏩ यह वन्य जीव एक माहिर शिकारी है और 50 से 60 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से दौड़ सकता है।

⏩ इसका औसत जीवन काल 12 से 15 साल होता है, लेकिन यदि पर्याप्त भोजन व अनुकूल वातावरण मिले तो और अधिक जी सकता है।

⏩ नर के मुकाबले मादा गुलदार अधिक माहिर शिकारी होती है।

⏩ यह न सिर्फ पेड़ों में चढ़ने में माहिर है, बल्कि नदी-नालों को भी आसानी से तैर कर पार कर लेता है।

कैसे बचाऐं अपने मवेशियों को –

उत्तराखंड सहित देश भर में गुलदार सबसे अधिक तादाद में पाये जाते हैं। यह एकांत वन्य क्षेत्रों, पहाड़ी इलाकों ही नहीं, बल्कि महानगरों तक में देखे जाने लगे हैं। ऐसे में आवश्यक है कि इनके हमले से पालतू जीवों को बचाने के लिए विशेष सतर्कता बरती जाये। यदि आप सोचते हैं कि अपने घर की चाहर दीवारी ऊंची करने से आप गुलदार की एंट्री बैन कर सकते हैं तो ऐसा नहीं है। गुलदार पर शोध करने वालों ने पाया है कि यह 10 फीट तक की सीधी छलांग लगा सकते हैं। यानि किसी भी भवन की चाहरदीवारी को फांदना इनके लिए बांये हाथ का खेल है।

The most feared and cunning hunters are Guldars

ऐसे बचायें पालतू जानवरों को –

⏩ शहरी क्षेत्रों में सबसे अधिक हमले गुलदारों द्वारा पालतू कुत्तों पर किया जाता है। अतएव जरूरी है कि यदि आपने घर में कुत्ता पाला है तो उसे देर रात घर से बाहर कतई नहीं रहने दें। सुबह ठीक से उजाला होने पर ही पालतू कुत्ते को शौच आदि के लिए ले जायें।

⏩ हिमाचल प्रदेश व उत्तराखंड के कुछ इलाकों में लोग अपने कुत्तों के गले में टिन व लौह धातु मिश्रित एक विशेष तरह का नुकीला पट्टा गर्दन पर लगा देते हैं, जिससे वह गुलदार के हमले से सुरक्षित हो जाते हैं। जिसका कारण यह है कि गुलदार शिकार के सीधे गर्दन पर हमला करता है और अपने नुकीले दांतों से शिकार की सांस की नली को काट देता है। यदि गले में नुकीला पट्टा हो तो गुलदार शिकार की जान नहीं ले पाता।

⏩ गाय-भैंस, भेड़-बकरी आदि के लिए कमजोर टिन शैड की बजाए पक्का निर्माण करायें। जिन कमरों में रात को इन मवेशियों को रखा जाये उसका दरवाजा मजबूत होना चाहिए। देखा गया है कि पुराने समय के टिन के कमजोर दरवाजों को गुलदार आसानी से खोल लिया करते हैं। इनमें गजब की फुर्ती और ताकत भी होती है।

⏩ यदि मवेशियों को जंगलों में चराने ले जा रहे हैं तो विशेष सावधानी बरतें। गुलदार प्रभावित इलाकों में लाठी-डंडों के साथ चलें और तेज आवाज करें। इससे गुलदार मवेशियों से दूर रहेंगे।

⏩ सांय ढलने से पूर्व ही अपने पालतू मवेशियों को जंगलों से हांक कर वापस ले आयें।

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SOURCE: YOUTUBE SHORTS
Deepak Manral
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तीन दशकों के करीब का कार्यानुभव रखने वाले दीपक मनराल पत्रकारिता जगत का एक सम्मानित नाम हैं। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत वर्ष 1996 में एक त्रैमासिक पत्रिका के सहयोगी संपादक के रूप में की थी। बीते 25 वर्षों में उन्होंने अमर उजाला, दैनिक भास्कर, दैनिक आज, उत्तरांचल दीप और चारधाम टाइम्स जैसे प्रतिष्ठित समाचार पत्रों में 'ब्यूरो प्रमुख' की महत्वपूर्ण जिम्मेदारियाँ निभाई हैं। वर्तमान में वे 'गंगोत्री अक्षर उजाला पोस्ट' के संपादक हैं और सीएनई (CNE) मीडिया हाउस के संस्थापक व स्वामी के रूप में डिजिटल मीडिया को नई दिशा दे रहे हैं। अपनी निष्पक्ष और ईमानदार पत्रकारिता के लिए पहचाने जाने वाले मनराल आज भी प्रतिदिन 'ग्राउंड ज़ीरो' से जुड़कर सक्रिय पत्रकारिता कर रहे हैं।
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