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सड़क नहीं तो मतदान नहीं: ऐरोली के ग्रामीणों ने दी विधानसभा चुनाव के बहिष्कार की चेतावनी

आपातकाल में झेलनी पड़ती है भारी मुसीबत

सीएनई संवाददाता, रानीखेत : “सड़क नहीं तो मतदान नहीं” के नारे के साथ रानीखेत के निकटवर्ती ग्राम ऐरोली के निवासियों ने आगामी 27 तारीख को होने वाले विधानसभा चुनाव के पूर्ण बहिष्कार का ऐलान कर दिया है। लंबे समय से सड़क निर्माण की मांग उपेक्षित रहने से आक्रोशित ग्रामीणों ने सोमवार को संयुक्त मजिस्ट्रेट के माध्यम से मुख्यमंत्री को एक ज्ञापन भेजकर दो टूक चेतावनी दी कि यदि चुनाव से पहले सड़क स्वीकृत नहीं हुई, तो पूरा गांव मतदान का सामूहिक रूप से बहिष्कार करेगा।

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सोमवार को तहसील मुख्यालय पहुंचे दर्जनों ग्रामीणों ने अपनी वर्षों पुरानी पीड़ा को शासन-प्रशासन के सामने रखा। संयुक्त मजिस्ट्रेट को सौंपे गए ज्ञापन में ग्रामीणों ने कहा कि देश और प्रदेश के विकास के बड़े-बड़े दावों के बीच ऐरोली ग्राम आज भी एक अदद सड़क के लिए तरस रहा है। सड़क संपर्क न होने के कारण सबसे ज्यादा परेशानी आपातकालीन परिस्थितियों में होती है। बीमारों, बुजुर्गों और गर्भवती महिलाओं को डोली के सहारे मुख्य मार्ग या स्वास्थ्य केंद्र तक पहुँचाना पड़ता है, जिससे कई बार मरीजों की जान पर बन आती है।

आश्वासन से थके ग्रामीण, इन अधिकारियों को भी भेजी प्रतिलिपि

ग्रामीणों का आरोप है कि इस गंभीर समस्या को लेकर वे कई बार स्थानीय जनप्रतिनिधियों से लेकर प्रशासनिक अधिकारियों के चक्कर काट चुके हैं, लेकिन हर बार उन्हें केवल खोखले आश्वासन ही हाथ लगे हैं। शासन के इसी ढुलमुल रवैये से तंग आकर अब उन्होंने आर-पार की लड़ाई का मन बना लिया है। ग्रामीणों ने इस मामले की गंभीरता को देखते हुए मुख्यमंत्री को संबोधित ज्ञापन की प्रतिलिपि जिलाधिकारी अल्मोड़ा, मुख्य विकास अधिकारी अल्मोड़ा, प्रांतीय वनाधिकारी अल्मोड़ा और ग्रामीण निर्माण विभाग भिकियासैंण के मुख्य अभियंता को भी सूचनार्थ प्रेषित की है, ताकि सभी संबंधित विभाग इस पर तत्काल संज्ञान लें।

सर्वसम्मति से लिया गया चुनाव बहिष्कार का फैसला

ज्ञापन में स्पष्ट तौर पर कहा गया है कि उत्तराखंड सरकार अविलंब ऐरोली ग्राम के लिए सड़क निर्माण की स्वीकृति प्रदान करे। यदि इस बार भी ग्रामीणों की जायज मांग को निराशा हाथ लगती है, तो गांव का कोई भी नागरिक पोलिंग बूथ पर वोट डालने नहीं जाएगा। ग्रामीणों ने सर्वसम्मति से प्रस्ताव पास कर “रोड नहीं तो वोट नहीं” के संकल्प को दोहराया है।

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