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VIDEO, अर्थी से लिपटा बंदर : इंसान की मौत पर अर्थी से लिपट खूब रोया बंदर

✍️ इंसान और बंदर के अजब प्रेम की ग़ज़ब कहानी

CNE DESK/उत्तर प्रदेश के अमरोहा से एक ‘अजब प्रेम की ग़ज़ब कहानी’ देखने में आई है। जो कि एक इंसान और बंदर के बीच है। यहां एक बुजुर्ग इंसान की मौत पर एक बंदर की संवेदनाओं ने सबको हैरान कर दिया है। यह बंदर शव से लिपट रोता रहा और पूरे अंतिम संस्कार तक साथ रहा।

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अजीब विडंबना है कि आज के दौर में जब इंसान ही इंसान का दर्द नहीं समझता, वहीं एक जानवर के भीतर इतनी भावनाएं होती हैं कि वह अंतिम क्षण तक अपनों का साथ नहीं छोड़ता। ऐसा ही एक दृश्य उत्तर प्रदेश के अमरोहा में देखने को मिला है।

अर्थी से लिपटा बंदर

कहा जाता है कि इंसान के बच्चे को कितने ही लाड—प्यार से पाल लो, लेकिन इस बात की कोई गारंटी नहीं कि वह आपका सगा हो जायेगा। इसके विपरीत सिर्फ दो वक्त की रोटी किसी जानवर के बच्चे को दे कर देखिए वह आजन्म साथ निभायेगा। मामला यहां अमरोहा का है। जहां एक बंदर को इंसान ने पाल लिया था। वह उसे दो वक्त की रोटी देते थे। जब वह मरे तो बंदर उनसे लिपट कर बहुत रोया। यह घटना देख हर कोई शोकाकुल के साथ हैरान भी है।

सिर्फ दो वक्त की रोटी में इ​तना प्रेम !

बता दें किअमरोहा जिले के कस्बा जोया के मोहल्ला जाटव कालोनी में एक अजीब घटना घटी। यहां रामकुंवर सिंह नाम के एक बुजुर्ग की गत दिनों मौत हो गई। बताया जा रहा है कि रामकुंवर बीते दो माह से एक बंदर को रोज रोटी दे रहे थे। यह बंदर उनके घर रोज आता था और रामकुंवर के साथ बैठ जाया करता था।

मोक्ष धाम तक शव से लिपट गया साथ

मंगलवार की सुबह अचानक रामकुंवर का निधन हो गया। तभी वहां बंदर भी आ पहुंचा और सारा दिन उनकी अर्थी के पास बैठा रहा। परिजनों जब शव को तिगरी धाम ले जा रहे थे तो वह बुजुर्ग की अर्थी पर ही बैठ गया। मोक्ष धाम तक वह अर्थी से लिपट रोता रहा। अंतिम संस्कार होने तक चिता के पास ही रहा। जब लोग दाह संस्कार कर लौटे तो वह भी घर तक पहुंच गया।

घटना से हर कोई हैरान

प्रत्यक्षदर्शियों का कहना है कि बंदर सुबह 10 बजे जब रोज की तरह पहुंचा तो बुजुर्ग की मौत हो चुकी थी। जिसके बाद वह बंदर सीधा जाकर शव पर ही बैठ गया। बंदर का अघाद प्रेम देख हर कोई भाव—विभोर हो गया। किसी ने बंदर को अलग नहीं किया।

VIDEO, अर्थी से लिपटा बंदर

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Deepak Manral
Deepak Manralhttp://creativenewsexpress.com
तीन दशकों के करीब का कार्यानुभव रखने वाले दीपक मनराल पत्रकारिता जगत का एक सम्मानित नाम हैं। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत वर्ष 1996 में एक त्रैमासिक पत्रिका के सहयोगी संपादक के रूप में की थी। बीते 25 वर्षों में उन्होंने अमर उजाला, दैनिक भास्कर, दैनिक आज, उत्तरांचल दीप और चारधाम टाइम्स जैसे प्रतिष्ठित समाचार पत्रों में 'ब्यूरो प्रमुख' की महत्वपूर्ण जिम्मेदारियाँ निभाई हैं। वर्तमान में वे 'गंगोत्री अक्षर उजाला पोस्ट' के संपादक हैं और सीएनई (CNE) मीडिया हाउस के संस्थापक व स्वामी के रूप में डिजिटल मीडिया को नई दिशा दे रहे हैं। अपनी निष्पक्ष और ईमानदार पत्रकारिता के लिए पहचाने जाने वाले मनराल आज भी प्रतिदिन 'ग्राउंड ज़ीरो' से जुड़कर सक्रिय पत्रकारिता कर रहे हैं।
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