सरकार से संवाद और निष्पक्ष जांच की मांग
सीएनई रिपोर्टर, अल्मोड़ा। उत्तराखंड लोकवाहनी की एक महत्वपूर्ण बैठक में दिल्ली में आंदोलनरत छात्रों पर हुए कथित लाठीचार्ज की कड़ी निंदा करते हुए इसे लोकतांत्रिक मूल्यों के विपरीत बताया गया। बैठक में वक्ताओं ने कहा कि अपनी मांगों को शांतिपूर्ण एवं लोकतांत्रिक तरीके से रखने वाले छात्रों पर बल प्रयोग किसी भी स्थिति में उचित नहीं ठहराया जा सकता। उन्होंने सरकार से पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने तथा छात्रों की समस्याओं का समाधान संवाद और सहमति के माध्यम से निकालने की मांग की।

बैठक में वक्ताओं ने कहा कि लोकतंत्र की मूल भावना नागरिकों को अपनी बात शांतिपूर्ण ढंग से रखने का अधिकार प्रदान करती है। यदि छात्र अपनी समस्याओं और मांगों को लेकर शांतिपूर्ण आंदोलन कर रहे हैं तो उनके साथ बल प्रयोग के बजाय संवेदनशीलता और संवाद का रास्ता अपनाया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि छात्र देश का भविष्य हैं और उनके साथ सम्मानजनक व्यवहार लोकतांत्रिक व्यवस्था की पहचान है।

वक्ताओं ने इस बात पर भी जोर दिया कि लोकतंत्र में असहमति व्यक्त करना और शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन करना प्रत्येक नागरिक का संवैधानिक अधिकार है। ऐसे आंदोलनों को दमन की दृष्टि से देखने के बजाय सरकार को उनकी मांगों पर गंभीरता से विचार करना चाहिए। उनका कहना था कि संवाद ही किसी भी विवाद का स्थायी और सकारात्मक समाधान है।
बैठक में उपस्थित सभी वक्ताओं ने लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा करने की आवश्यकता पर बल देते हुए सरकार से अपील की कि वह छात्रों की मांगों को गंभीरता से सुने और किसी भी प्रकार की टकराव की स्थिति से बचते हुए सकारात्मक पहल करे। साथ ही कथित लाठीचार्ज की निष्पक्ष जांच कर दोषियों के विरुद्ध आवश्यक कार्रवाई सुनिश्चित करने की मांग भी उठाई गई।
बैठक में पूरन चन्द्र तिवारी, अधिवक्ता जगत रौतेला, दयाकृष्ण काण्डपाल, जंगबहादुर थापा, अजय मित्र सिंह बिष्ट, अधिवक्ता अजय सिंह मेहता, हारिस मुहम्मद सहित अन्य लोगों ने अपने विचार व्यक्त किए और घटना पर गहरा रोष प्रकट किया। सभी वक्ताओं ने लोकतांत्रिक परंपराओं को मजबूत बनाए रखने तथा छात्रों के हितों की रक्षा के लिए सरकार से संवेदनशील और सकारात्मक कदम उठाने का आग्रह किया।



