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मुखानी में अंतरराष्ट्रीय साइबर सिंडिकेट का भंडाफोड़, 5 करोड़ से अधिक की साइबर ठगी का खुलासा

अंतरराष्ट्रीय सिंडिकेट का सरगना समेत 6 गिरफ्तार

3 फीसदी कमीशन के लालच में बिक रहे थे बैंक खाते!

एक मकान, दर्जनों एटीएम और करोड़ों का राज!

सीएनई रिपोर्टर, हल्द्वानी। नैनीताल पुलिस ने साइबर अपराध के खिलाफ चलाए जा रहे ‘ऑपरेशन हॉटस्पॉट-2026’ के तहत मुखानी क्षेत्र में बड़ी कार्रवाई करते हुए करोड़ों रुपये के अवैध वित्तीय लेनदेन से जुड़े एक अंतरराष्ट्रीय साइबर सिंडिकेट का भंडाफोड़ किया है। पुलिस के अनुसार गिरोह म्यूल बैंक खातों, एटीएम कार्ड, सिम कार्ड और एक अनधिकृत मोबाइल ऐप के माध्यम से साइबर अपराध से प्राप्त धनराशि को अलग-अलग खातों में घुमाकर नकदी निकालने का काम कर रहा था। पुलिस ने गिरोह के मुख्य सरगना सहित छह आरोपियों को गिरफ्तार किया है, जबकि दो विधि-विवादित किशोरों को संरक्षण में लिया गया है। प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि गिरोह पिछले करीब चार माह में 5 करोड़ रुपये से अधिक की साइबर ठगी से जुड़ी धनराशि के लेनदेन में संलिप्त रहा है।

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नैनीताल के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक डॉ. मंजुनाथ टीसी की सटीक रणनीति और साइबर अपराध के हॉटस्पॉट चिह्नित कर कार्रवाई करने की नीति के तहत यह कार्रवाई की गई। पुलिस की इस कार्रवाई को साइबर अपराध के वित्तीय नेटवर्क पर सीधा प्रहार माना जा रहा है। खास बात यह है कि पुलिस ने केवल साइबर ठगी करने वालों पर ही नहीं, बल्कि ठगी की रकम को इधर-उधर करने के लिए इस्तेमाल किए जा रहे म्यूल बैंक खातों और उनसे जुड़े नेटवर्क पर भी शिकंजा कसा है।

लक्ष्मण विहार में देर रात छापा, मकान से चल रहा था नेटवर्क

पुलिस मुख्यालय उत्तराखंड द्वारा साइबर अपराधियों, म्यूल बैंक खातों, संदिग्ध मोबाइल नंबरों और अवैध नकदी निकासी के विरुद्ध चलाए जा रहे राज्यव्यापी विशेष अभियान ‘ऑपरेशन हॉटस्पॉट-2026’ के तहत नैनीताल जनपद में विशेष चेकिंग और निगरानी अभियान चलाया जा रहा है।

इसी क्रम में 5/6 सितंबर 2026 की रात वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक डॉ. मंजुनाथ टीसी के निर्देश पर पुलिस अधीक्षक अपराध डॉ. जगदीश चंद्र, पुलिस अधीक्षक नगर मनोज कत्याल तथा पुलिस उपाधीक्षक हल्द्वानी अमित सैनी के पर्यवेक्षण में मुखानी पुलिस, विशेष कार्य बल और साइबर सेल की संयुक्त टीम ने सटीक सूचना के आधार पर लक्ष्मण विहार कॉलोनी, थाना मुखानी क्षेत्र स्थित एक मकान पर छापा मारा।

कार्रवाई के दौरान पुलिस को मौके पर एक ऐसा नेटवर्क मिला, जहां साइबर अपराध से संबंधित धनराशि के लेनदेन, म्यूल बैंक खातों के संचालन और नकदी निकासी का काम किया जा रहा था। पुलिस ने मौके से मुख्य सरगना राहुल यादव निवासी इंदौर, मध्य प्रदेश सहित छह आरोपियों को गिरफ्तार किया तथा दो विधि-विवादित किशोरों को संरक्षण में लिया।

चार महीने में पांच करोड़ से अधिक के लेनदेन की जांच

पुलिस की प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि गिरोह पिछले करीब चार महीनों से साइबर अपराध से प्राप्त धनराशि के अवैध लेनदेन में सक्रिय था। पुलिस के अनुसार इस अवधि में गिरोह के माध्यम से 5 करोड़ रुपये से अधिक की साइबर ठगी से संबंधित धनराशि का लेनदेन किया गया है।

जांच एजेंसियां अब यह पता लगाने में जुटी हैं कि इस नेटवर्क से देश के किन-किन राज्यों के बैंक खाते जुड़े हुए थे और साइबर ठगी की रकम किन माध्यमों से गिरोह तक पहुंच रही थी। पुलिस आरोपियों के मोबाइल फोन, लैपटॉप, बैंकिंग दस्तावेजों और इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों की भी जांच कर रही है।

बाइनेंस से USDT खरीदकर अनधिकृत ऐप के जरिए कारोबार

पुलिस के मुताबिक गिरोह का मुख्य सरगना राहुल यादव बाइनेंस एप के माध्यम से नकदी की व्यवस्था कर यूएसडीटी (USDT) खरीदता था। इसके बाद टेलीग्राम के माध्यम से प्राप्त ‘UMASTER’ नामक अनधिकृत ऐप का इस्तेमाल किया जाता था।

पुलिस के अनुसार इस ऐप पर बिना किसी वैध दस्तावेज, ग्राहक की पहचान और स्रोत के सत्यापन के प्रतिदिन करीब 4 से 5 लाख रुपये मूल्य की यूएसडीटी बेची जाती थी। इसके बदले आरोपियों को करीब तीन प्रतिशत अतिरिक्त मुनाफे तथा बोनस का लालच दिया जाता था।

तीन प्रतिशत कमीशन के लालच में जुटाए जाते थे म्यूल खाते

गिरोह के संचालन का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा म्यूल बैंक खातों का नेटवर्क था। साइबर अपराध से प्राप्त धनराशि को अलग-अलग खातों में डालकर उसकी पहचान और वास्तविक स्रोत छिपाने के लिए स्थानीय युवकों को कमीशन का लालच दिया जाता था।

आरोपियों द्वारा भोले-भाले लोगों से उनके बैंक खाते, एटीएम या डेबिट कार्ड, चेकबुक, पासबुक और सिम कार्ड तक हासिल किए जाते थे। इसके बदले खाताधारकों को करीब तीन प्रतिशत कमीशन देने का लालच दिया जाता था।

पुलिस के अनुसार इन खातों का इस्तेमाल साइबर अपराध से प्राप्त रकम को एक स्थान से दूसरे स्थान पर स्थानांतरित करने के लिए किया जाता था। इसी प्रक्रिया को साइबर अपराध की भाषा में धनराशि की लेयरिंग से जोड़कर देखा जाता है।

एटीएम से नकदी निकासी, सीडीएम से दूसरे खातों में रकम ट्रांसफर

म्यूल खातों में रकम आने के बाद गिरोह के सदस्य एटीएम के माध्यम से नकदी निकालते थे। जब नकदी की मात्रा अधिक होती थी, तो उसे कैश डिपॉजिट मशीन के माध्यम से दूसरे बैंक खातों में जमा अथवा स्थानांतरित किया जाता था।

पुलिस के अनुसार खाताधारकों के सिम कार्ड भी आरोपी अपने पास रखते थे, जिससे बैंक खाते से संबंधित गतिविधियों पर खाताधारक की सीधी निगरानी नहीं रह पाती थी। इस तरह बैंक खाते, एटीएम कार्ड और मोबाइल सिम को एक साथ अपने नियंत्रण में लेकर गिरोह वित्तीय लेनदेन को संचालित करता था।

छह आरोपी गिरफ्तार

गिरफ्तार आरोपियों में राहुल यादव (30 वर्ष), पुत्र अजय यादव, निवासी पंचवटी नगर, इंदौर, मध्य प्रदेश, गिरोह का मुख्य सरगना बताया गया है। पुलिस के अनुसार वह पूरे नेटवर्क का संचालन करता था। उसके विरुद्ध पूर्व में थाना इंदौर ग्रामीण में धारा 420 और 409 भारतीय दंड संहिता के तहत कार्रवाई हो चुकी है और वह जेल जा चुका है।

हर्षित कुमार (26 वर्ष), पुत्र भरतवीर, निवासी गैस गोदाम रोड, शिव विहार, मुखानी, नैनीताल पर एटीएम से नकदी निकालने और कैश डिपॉजिट मशीन के माध्यम से रकम जमा करने की भूमिका सामने आई है।

कमल गोस्वामी (21 वर्ष), पुत्र नवीन गोस्वामी, निवासी तल्ली दीनी, मुक्तेश्वर, नैनीताल पर कमीशन के आधार पर म्यूल बैंक खाते उपलब्ध कराने का आरोप है।

साहिल कुमार (21 वर्ष), पुत्र स्वर्गीय जीवन राम, निवासी कांडा, बागेश्वर, हाल निवासी दमुवाढुंगा, नैनीताल पर म्यूल खाते उपलब्ध कराने की भूमिका सामने आई है।

मौ. अयान (20 वर्ष), पुत्र मौ. यामीन, निवासी ग्राम कोरबकू, भोजपुर, मुरादाबाद, उत्तर प्रदेश तथा मौ. शुभान (24 वर्ष), पुत्र वाजिद हुसैन, निवासी ग्राम सलारपुरकला, सम्भल, उत्तर प्रदेश को पुलिस ने निवेशक के रूप में गिरफ्तार किया है।

इसके अलावा पुलिस द्वारा दो वांछित आरोपियों की गिरफ्तारी के प्रयास किए जा रहे हैं।

दो विधि-विवादित किशोर संरक्षण में

कार्रवाई के दौरान दो विधि-विवादित किशोरों को भी पुलिस ने संरक्षण में लिया। दोनों को बाल कल्याण पुलिस अधिकारी के संरक्षण में अग्रिम विधिक कार्रवाई के लिए प्रस्तुत किया गया है।

एक लाख से अधिक नकदी और बड़ी मात्रा में इलेक्ट्रॉनिक उपकरण बरामद

पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से कुल 1,18,800 रुपये नकद बरामद किए हैं। इसके अलावा एक डेल लैपटॉप मय चार्जर, एक एप्पल आईपैड और 11 आधुनिक स्मार्ट मोबाइल फोन बरामद हुए हैं। इनमें आईफोन 17 प्रो, आईफोन 14 प्रो, सैमसंग गैलेक्सी एस24 और एस22 अल्ट्रा सहित अन्य मोबाइल फोन शामिल हैं।

पुलिस ने अलग-अलग बैंकों के 24 सक्रिय एटीएम या डेबिट कार्ड, विभिन्न कंपनियों के 12 सक्रिय सिम कार्ड, छह चेकबुक, चार पासबुक और 16 बैंक जमा अथवा कैश डिपॉजिट मशीन की पर्चियां भी बरामद की हैं।

बरामद बैंकिंग सामग्री की जांच से पुलिस को गिरोह के वित्तीय नेटवर्क की कड़ियां जोड़ने में महत्वपूर्ण मदद मिलने की उम्मीद है।

इन धाराओं में दर्ज हुई कार्रवाई

मामले में थाना मुखानी में सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम की धारा 66(सी), 66(डी) तथा भारतीय न्याय संहिता की धारा 3(5) और 318(4) के तहत कार्रवाई की जा रही है।

पुलिस आरोपियों से पूछताछ कर यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि साइबर अपराध से प्राप्त रकम का वास्तविक स्रोत क्या था, इस नेटवर्क से और कौन-कौन लोग जुड़े हैं तथा देश के अन्य हिस्सों में इस गिरोह की गतिविधियों का कितना विस्तार है।

पुलिस टीम को 2500 रुपये का पुरस्कार

सटीक सूचना पर त्वरित कार्रवाई कर अंतरराष्ट्रीय साइबर वित्तीय नेटवर्क का पर्दाफाश करने वाली पुलिस टीम के उत्साहवर्धन के लिए वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक डॉ. मंजुनाथ टीसी ने 2500 रुपये नकद पुरस्कार देने की घोषणा की है।

इस कार्रवाई में थाना मुखानी पुलिस से उपनिरीक्षक विरेन्द्र चन्द, कांस्टेबल सुनील आगरी और कांस्टेबल दिगम्बर ज्याला; विशेष कार्य बल नैनीताल से उपनिरीक्षक मोहन सौन प्रभारी विशेष कार्य बल, हेड कांस्टेबल त्रिलोक रौतेला, हेड कांस्टेबल कुन्दन कठायत, कांस्टेबल भूपेन्द्र ज्येष्ठा, कांस्टेबल भानू प्रताप ओली, कांस्टेबल अशोक रावत और कांस्टेबल अरविन्द सिंह तथा साइबर सेल नैनीताल से उपनिरीक्षक मीनू गौतम प्रभारी साइबर सेल, सहायक उपनिरीक्षक बिहारीलाल कुशवाहा, हेड कांस्टेबल शिवेन्द्र बोरा, हेड कांस्टेबल परमदीप सिंह और कांस्टेबल नरेन्द्र धामी शामिल रहे।

एसएसपी की रणनीति से वित्तीय नेटवर्क पर सीधा प्रहार

इस पूरी कार्रवाई में वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक डॉ. मंजुनाथ टीसी की रणनीति विशेष रूप से उल्लेखनीय रही। साइबर अपराध में केवल ठगी करने वाले व्यक्ति तक सीमित रहने के बजाय म्यूल बैंक खातों, संदिग्ध वित्तीय लेनदेन, नकदी निकासी और साइबर अपराधियों को आर्थिक ढांचा उपलब्ध कराने वाले नेटवर्क पर फोकस किया गया।

‘ऑपरेशन हॉटस्पॉट-2026’ के तहत की गई यह कार्रवाई इस लिहाज से भी महत्वपूर्ण है कि इससे साइबर अपराध की उस कड़ी को निशाना बनाया गया है, जिसके माध्यम से ठगी की रकम को बैंक खातों में घुमाकर वैध दिखाने और फिर नकदी के रूप में निकालने का प्रयास किया जाता है।

नैनीताल पुलिस की अपील

नैनीताल पुलिस ने आम जनता से अपील की है कि किसी भी अनजान व्यक्ति को कमीशन अथवा पैसों के लालच में अपना बैंक खाता, पासबुक, चेकबुक, एटीएम या डेबिट कार्ड अथवा सिम कार्ड इस्तेमाल के लिए न दें। पुलिस ने स्पष्ट किया है कि साइबर ठगी में किसी व्यक्ति का बैंक खाता इस्तेमाल किए जाने पर खाताधारक के विरुद्ध भी कठोर कानूनी कार्रवाई की जा सकती है।

पुलिस ने नागरिकों से किसी भी संदिग्ध वित्तीय गतिविधि की सूचना तत्काल नजदीकी पुलिस थाने अथवा साइबर हेल्पलाइन नंबर 1930 पर देने की अपील की है।

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Deepak Manral
Deepak Manralhttp://creativenewsexpress.com
तीन दशकों के करीब का कार्यानुभव रखने वाले दीपक मनराल पत्रकारिता जगत का एक सम्मानित नाम हैं। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत वर्ष 1996 में एक त्रैमासिक पत्रिका के सहयोगी संपादक के रूप में की थी। बीते 25 वर्षों में उन्होंने अमर उजाला, दैनिक भास्कर, दैनिक आज, उत्तरांचल दीप और चारधाम टाइम्स जैसे प्रतिष्ठित समाचार पत्रों में 'ब्यूरो प्रमुख' की महत्वपूर्ण जिम्मेदारियाँ निभाई हैं। वर्तमान में वे 'गंगोत्री अक्षर उजाला पोस्ट' के संपादक हैं और सीएनई (CNE) मीडिया हाउस के संस्थापक व स्वामी के रूप में डिजिटल मीडिया को नई दिशा दे रहे हैं। अपनी निष्पक्ष और ईमानदार पत्रकारिता के लिए पहचाने जाने वाले मनराल आज भी प्रतिदिन 'ग्राउंड ज़ीरो' से जुड़कर सक्रिय पत्रकारिता कर रहे हैं।
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