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रानीखेत ब्रेकिंग : पैत्रक गांव सरना पहुंचा शहीद बृजेश सिंह रौतेला का पार्थिव शरीर, खेराड़ेश्वर महादेव में सैन्य सम्मान के साथ हुई अंत्येष्टि, सैकड़ों नम आंखों ने दी विदाई

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सीएनई रिपोर्टर, अल्मोड़ा/रानीखेत

पूर्वी सिक्किम से हासीमारा, असम जाते समय वाहन दुर्घटना में शहीद हुए 07 कुमाऊं रेजीमेंट के जवान जिला अल्मोड़ा के ताड़ीखेत ब्लॉक स्थित सरना गांव निवासी बृजेश सिंह रौतेला का ​पार्थिव शरीर आज रानीखेत पहुंचा। जहां से उसे उनके पैत्रक गांव सरना ले जाया गया और खेराड़ेश्वर महादेव में उनकी पूरे सैन्य सम्मान के साथ अंत्येष्टि की गई। ताजा खबरों के लिए WhatsApp Group को जॉइन करें 👉 Click Now 👈

उल्लेखनीय है कि पूर्वी सिक्किम में सेना का वाहन खाई में गिर जाने से कुमाऊं रेजीमेंट के तीन जवान शहीद हो गए थे। इनमें एक ताड़ीखेत ब्लॉक व दूसरा रामनगर (नैनीताल) के थे, जब​कि तीसरा जवान हरियाणा का था। यह हादसा न्यू जवाहलाल नेहरू रोड पर हुआ था, जो कि गंगटोक को सोमगो झील व भारत चीन सीमा के निकट नाथुला से जोड़ता है। हादसे में शहीद हुए जांबाजों की पहचान 07-कुमाऊं के हिमांशु नेगी पुत्र हीरा सिंह नेगी वर्तमान निवासी हेमपुर पांडे कॉलोनी काशीपुर (ऊधम सिंह नगर) व सरना गांव, ताड़ीखेत ब्लॉक के बृजेश सिंह रौतेला पुत्र दलवीर सिंह के रूप में हुई थी।

अपने परिवार के साथ बृजेश सिंह रौतेला, फाइल फोटो

उल्लेखनीय है कि शहीद बृजेश के पिता दलवीर सिंह भी भारतीय सेना में रह चुके हैं। उन्हें सेना मेडल भी मिला था। बृजेश की शहादत का समाचार सुनकर उनके पैतृक गांव सरना सहित पूरे क्षेत्र में शोक की लहर फैल गई थी। उनकी मां पुष्पा देवी, बड़े भाई अमित तथा छोटी बहन कल्पना का अब भी रो-रोकर बुरा हाल है।

बताया गया है कि बृजेश ने 17 वर्ष 4 माह की उम्र में ही रानीखेत के ऐतिहासिक, देश के पहले परमवीर चक्र विजेता मेजर सोमनाथ शर्मा के नाम से बने मैदान में कुमाऊं रेजीमेंट की भर्ती में भाग लिया था और दौड़ पूरी कर ली थी। लेकिन 18 से कम की उम्र होने के कारण उन्हें तब लौटा दिया था। बाद में वह 18 के होते ही सेना में भर्ती हो गए थे। वह भारतीय कमांडो बनना चाहते थे। ताजा खबरों के लिए WhatsApp Group को जॉइन करें 👉 Click Now 👈

सरना निवासी दलवीर सिंह की आंखें अब भी नम हैं। उन्होंने बताया कि उनका 22 वर्षीय पुत्र बृजेश रौतेला 2019 में केआरसी में भर्ती हुआ। ट्रेनिंग के बाद वह जम्मू के कुपवाड़ा में तैनात था। इसके बाद उसकी पोस्टिंग असोम के हासिमआरा में हुई। तीन महीने के लिए वह सिक्किम स्थित नाथुलापोस्ट पर तैनात थे। चौकी पर गोला-बारूद पहुंचाकर लौटते वक्त वाहन दुर्घटना में वह शहीद हो गए।

जवान बेटे की मौत की सूचना के बाद मां पुष्पा सुधबुध खो बैठी हैं। उनका रो—रोकर बुरा हाल बना हुआ है। बृजेश तीन भाई बहनों में बीच के थे। उनका बड़ा भाई अमित रौतेला दिल्ली में कोचिंग कर रहा है और बहन 11वीं की छात्रा है।

बृजेश रौतेला की माता पुष्पा रौतेला ने बताया कि मंगलवार शाम बृजेश का फोन भी आया था और वह पानी लेने गई थीं। अपने जिगर के टुकड़े से आखिरी बार बात न कर पाने का मलाल उन्हें जीवन भर रहेगा। ताजा खबरों के लिए WhatsApp Group को जॉइन करें 👉 Click Now 👈

इससे पूर्व शहीद का पार्थिव शरीर जब ताड़ीखेत स्थित उनके ताऊ जी के घर आया तो तमाम लोगों की भीड़ वहां जमा हो गई, फिर उन्हें खेराड़ेश्वर ले जाया गया। जहां शहीद को सेना की ओर से गार्ड आफ आनर व सलामी दी गई। इस मौके पर सांसद अजय टम्टा, डॉ. प्रमोद नैनवाल, तहसीलदार, एसडीएम गौरव पांडे, प्रधान मंजीत ​भगत सहित सैकड़ों की संख्या में लोग मौजूद थे।

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Deepak Manral
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तीन दशकों के करीब का कार्यानुभव रखने वाले दीपक मनराल पत्रकारिता जगत का एक सम्मानित नाम हैं। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत वर्ष 1996 में एक त्रैमासिक पत्रिका के सहयोगी संपादक के रूप में की थी। बीते 25 वर्षों में उन्होंने अमर उजाला, दैनिक भास्कर, दैनिक आज, उत्तरांचल दीप और चारधाम टाइम्स जैसे प्रतिष्ठित समाचार पत्रों में 'ब्यूरो प्रमुख' की महत्वपूर्ण जिम्मेदारियाँ निभाई हैं। वर्तमान में वे 'गंगोत्री अक्षर उजाला पोस्ट' के संपादक हैं और सीएनई (CNE) मीडिया हाउस के संस्थापक व स्वामी के रूप में डिजिटल मीडिया को नई दिशा दे रहे हैं। अपनी निष्पक्ष और ईमानदार पत्रकारिता के लिए पहचाने जाने वाले मनराल आज भी प्रतिदिन 'ग्राउंड ज़ीरो' से जुड़कर सक्रिय पत्रकारिता कर रहे हैं।
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