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अयोध्या: गिराए जाएंगे रामलला के रास्ते में आने वाले मंदिर, तैयारी शुरू

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पीयूष मिश्रा

अयोध्या। राम मंदिर निर्माण के लिए अयोध्या में जगह का विस्तार किया जा रहा है। यानी मंदिर बनाने के दौरान आसपास आने वाले मंदिरों को ध्वस्त करने की तैयारी है। भव्य राम मंदिर की जद में कई प्राचीन और जर्जर हाल में पहुंच चुके मंदिर आ रहें है। जिन्हें खाली कराया जा रहा है। जिसके बाद इनके ध्वस्तीकरण की कार्रवाई शुरू होगी। बनने वाले राम मंदिर के पांच एकड़ विस्तार क्षेत्र में अभी तक सीता रसोई मंदिर, साक्षी गोपाल मंदिर और जन्म स्थान मंदिर के साथ मानस भवन का आधा हिस्सा आ रहा है। जिसे अब खाली करवाया जा रहा है।
रामलला मंदिर के प्रधान पुजारी आचार्य सत्येंद्र दास ने बताया कि सीता रसोई और जन्म स्थान मंदिर में से मूर्तियां हटा ली गई हैं। इनमें रखा सामान भी हटा लिया गया है। दरवाजे और खिड़कियां, बिजली की वायरिंग, पंखे, वॉटर पाइप लाइन आदि को हटाया जा रहा है। सारा सामान हटाने के बाद इसके ध्वस्तीकरण की कार्रवाई शुरू की जाएगी।
सत्येंद्र दास ने बताया कि पहले चरण में केवल उन्हीं मंदिरों और भवनों का ध्वस्तिकरण किया जाएगा जो राम मंदिर के विस्तार क्षेत्र में आ रहें है। श्री राम जन्म भूमि तीर्थ क्षेत्र ट्स्ट से जुड़े लोगों ने बताया कि मंदिर का निर्माण शुरू करने के लिए इसके क्षेत्र का दायरा बढ़ाया जा रहा है। जिसमें इससे सटे जर्जर भवन और मंदिर आ रहें हैं। लिहाजा इनको गिराने के पहले इन्हें खाली करवाया जा रहा है। ध्वस्तीकरण के पहले इनके दरवाजे और खिड़कियों को निकाला गया है। अब एलएंडटी कंपनी जल्द ही उनके ध्वस्तिीकरण की तैयारी में है।

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ये 13 प्राचीन मंदिर आएंगे जद में
जानकारी के मुताबिक 1992 में विवादित ढांचे के विध्वंस के बाद 70 एकड़ के अधिग्रहण क्षेत्र में करीब एक दर्जन मंदिर आ गए थे। जिनमें सुरक्षा के नाम पर धार्मिक कार्यक्रम आदि बंद हो गए। करीब 28 साल के बीच इन मंदिरों की हालत बिना देख रेख के जर्जर हो चुकी है, लेकिन अभी केवल उन्ही मंदिरों को ही हटाया जा रहा है। जो मंदिर के क्षेत्र में आ रहे हैं। नाप जोख केवल इसी के क्षेत्र की हो रही है। बाकी मंदिरों को लेकर आगे फैसला लिया जाएगा।

ये मंदिर नहीं तोड़े जाएंगे
कोहबर भवन, आनंद भवन, राम खजाना मंदिर को फिलहाल नहीं तोड़ा जाएगा। इनको सड़को के चौड़ीकरण के समय तोड़े जाने की जानकारी है। मंदिर के निर्माण को लेकर सामाग्री लाने मे मेन रोड का इस्तेमाल किया जा रहा है। जिस वजह से बाकी मंदिरों के बारे में ट्रस्ट की योजना अभी तय नहीं है। सूत्रों के मुतबिक इनको लेकर फैसला आगे आने वाले दिनों में किया जाएगा।

गिराया जाएगा प्रवेश द्वार
समाजवादी पार्टी सरकार द्वारा अयोध्या के नया घाट क्षेत्र स्थित प्रवेश मार्ग पर श्री राम प्रवेश द्वार बनाने की योजना को पलीता लग चुका है। इस निर्माणाधीन द्वार को तोड़ने के लिए जेसीबी मशीन लगाये जाने के साथ ही इस पर खर्च 50 लाख रुपए भी बर्बाद हो गए। सपा सरकार के बाद भारतीय जनता पार्टी की सरकार आने के साथ ही इस प्रवेश द्वार को लेकर कई शिकायतें हुईं। अयोध्या के मेयर के मुताबिक ऐसा प्रवेश द्वार होना चाहिए जो राम मंदिर और अयोध्या के अनुरूप हो।

सुप्रीम कोर्ट में याचिका
अयोध्या में 5 एकड़ वैकल्पिक जमीन में बन रही मस्जिद के ट्रस्ट में सरकारी प्रतिनिधि भी शामिल करने के लिए सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर हुई है। याचिका में कहा गया है कि अयोध्या में शांति और सौहार्द बनाए रखने के लिए ऐसा करना जरूरी है। यह याचिका वकील शिशिर चतुर्वेदी और करुणेश शुक्ला की तरफ से दाखिल की गई है

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