स्वजल : कभी थी पौ बारह, आज वेतन के भी लाले
कार्मिकों ने निदेशक को भेजा मार्मिक ज्ञापन

कहा, ”हमारा भी घर है, बच्चे हैं”
सीएनई रिपोर्टर, बागेश्वर। एक दशक पहले स्वजल कभी भारी भरकम संस्था थी, जो ग्रामीण क्षेत्रो में पेयजल योजना का निर्माण कराने के साथ साथ महिलाओं को समूह से भी जोड़ती थी। लगभग 10 वर्ष पहले तक ग्रामीण समूह का गठन कर संस्थान ने कई पेयजल योजनाएं बनाई, लेकिन वर्तमान में नौ माह से कर्मचारी वेतन के लिए तरस रहे हैं। उनके सामने आर्थिक संकट पैदा हो गया है।
स्वजल के कार्मिकों ने परियोजना प्रबंधक के माध्यम से निदेशक को ज्ञापन भेजा है। कहा कि मार्च का महीना चल रहा है। उनके भी बच्चे हैं। वह भी स्कूल पढ़ते हैं। इसके अलावा घर भी है। जहां हर माह खर्च के लिए पैसे की जरूरत होती है, लेकिन नौ माह से उन्हें वेतन नहीं मिल सका है।
जून 2024 से वह मानदेय को लेकर संघर्ष कर रहे हैं। न्यायालय के आदेश तथा शासन स्तर पर निर्णय लिए गए। उनका भी उन्हें लाभ नहीं मिल सका है। जिसके कारण परिवार का भरण—पोषण करने में परेशानी हो रही है।
कर्मचारियों ने शीघ्र वेतन का भुगतान करने की मांग की है। इस मौके पर गिरिजा शंकर भट्ट, ध्यान चंद्र जोशी, चंदन सिंह मलड़ा, पूरन सिंह टंगड़िया, कौस्तुबानंद पांडे आदि उपस्थित थे।