उत्तराखंड मुक्त विश्वविद्यालय की सराहनीय पहल
हल्द्वानी, 5 अगस्त: उत्तराखंड मुक्त विश्वविद्यालय द्वारा दिव्यांगजनों को उच्च शिक्षा की ओर प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से एक जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन हल्द्वानी स्थित नर्चरिंग इनोवेशन एक्शन ऑन करियर एंड एजुकेशन (NIACE) प्रशिक्षण संस्थान में किया गया। यह संस्थान दीनदयाल उपाध्याय ग्रामीण कौशल योजना के अंतर्गत संचालित है।

कार्यक्रम में विश्वविद्यालय की नैनीताल क्षेत्रीय टीम ने भाग लिया और उत्तराखंड के विभिन्न जिलों से आए लगभग 100 दिव्यांग प्रशिक्षुओं को विश्वविद्यालय द्वारा संचालित शैक्षणिक पाठ्यक्रमों के बारे में जानकारी दी। प्रशिक्षु वर्तमान में तीन माह के कौशल विकास प्रशिक्षण में संलग्न हैं।
शैक्षणिक अवसरों की विस्तृत जानकारी
कार्यक्रम के दौरान विश्वविद्यालय की टीम ने सर्टिफिकेट, डिप्लोमा, स्नातक तथा परास्नातक स्तर पर उपलब्ध कोर्सों के साथ-साथ उद्यमिता, कंप्यूटर एप्लिकेशन, गृह विज्ञान तथा विज्ञान संकाय से संबंधित पाठ्यक्रमों की जानकारी साझा की।
रसायन विज्ञान विभाग के प्रोफेसर डॉ. विनोद कुमार ने बीएससी, एमएससी तथा उद्यमिता आधारित कोर्सों पर प्रकाश डाला, जबकि डॉ. दीप प्रकाश ने विज्ञान संकाय की पूरी रूपरेखा विद्यार्थियों के समक्ष प्रस्तुत की।
दिव्यांगजनों के लिए विशेष सुविधाएं
सहायक क्षेत्रीय निदेशक रेखा बिष्ट ने विश्वविद्यालय द्वारा दिव्यांग छात्रों के लिए दी जा रही छात्रवृत्तियों एवं सहायक सुविधाओं की जानकारी दी। उन्होंने यह भी बताया कि जो विद्यार्थी लिखने में असमर्थ हैं, उनके लिए वैकल्पिक व्यवस्थाएं उपलब्ध हैं, जिससे वे भी सुगमता से परीक्षा दे सकें और पढ़ाई जारी रख सकें।
गृह विज्ञान और आत्मनिर्भरता की संभावनाएं
गृह विज्ञान विभाग की असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. मोनिका द्विवेदी ने गृह विज्ञान में करियर की संभावनाएं रेखांकित करते हुए बताया कि कैसे दिव्यांग छात्राएँ इस क्षेत्र में आत्मनिर्भर बन सकती हैं। उन्होंने यह भी बताया कि यह संकाय न केवल रोजगार के अवसर प्रदान करता है, बल्कि आत्म-निर्माण की दिशा में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
प्रेरणादायी संवाद और सहभागिता
विश्वविद्यालय के कम्युनिटी रेडियो से जुड़ीं सुनीता भास्कर और चंद्रा जोशी ने दिव्यांग विद्यार्थियों के अनुभव साझा किए तथा सकारात्मक संवाद के माध्यम से उनके आत्मविश्वास को प्रोत्साहित किया। प्रशिक्षणार्थियों ने खुले मन से सवाल पूछे और शंकाएं व्यक्त कीं, जिनका समाधान विश्वविद्यालय की टीम ने सहज और विस्तृत रूप से किया।
संस्थान की सराहना और भविष्य की योजनाएं
प्रशिक्षण संस्थान के संस्थापक सचिव के.डी. जोशी ने उत्तराखंड मुक्त विश्वविद्यालय की इस पहल के लिए आभार जताते हुए कहा, “दिव्यांगजनों को सही मार्गदर्शन और अवसरों की जानकारी देना बेहद ज़रूरी है। इस तरह के प्रयास इनका भविष्य संवारने में सहायक सिद्ध होंगे।”
इस अवसर पर संस्थान की क्वालिटी हेड गरिमा जोशी, सेंटर मैनेजर हेमंत सिंह और प्रोजेक्ट हेड कन्हैया जोशी भी उपस्थित रहे।
कार्यक्रम की सफलता पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए क्षेत्रीय निदेशक रेखा बिष्ट ने कहा कि शीघ्र ही एक और सत्र आयोजित कर हर विद्यार्थी से व्यक्तिगत रूप से संवाद स्थापित किया जाएगा, ताकि वे विश्वविद्यालय की शैक्षणिक मुख्यधारा से जुड़ सकें।
कार्यक्रम का संचालन डॉ. मोनिका द्विवेदी द्वारा किया गया। यह आयोजन न केवल दिव्यांगजनों के लिए शिक्षा की नई राह खोलने का माध्यम बना, बल्कि उनके आत्मबल और संभावनाओं को भी नई ऊर्जा प्रदान करने वाला साबित हुआ।

