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अब अल्मोड़ा में आ पहुंचे नए मेहमान ‘गुणि’ (लंगूर), बानर टोलियों में हड़कंप

अल्मोड़ा। लंबे समय से बंदरों का आतंक झेल रहे नगर क्षेत्र में अब ‘गुणियों’ (लंगूरों) ने भी पदार्पण कर दिया है। अल्मोड़ा में लंगूर का आना कृषि व बागवानी के लिए शुभ संकेत नहीं कहा जा सकता। आज एनटीडी इलाके में इनकी पहली टोली देखी गई। पहले से बंजर पड़ी खेती और बागवानी पर आधिपत्य के लिए अब लंगूर और बंदरों में संघर्ष की शुरूआत हो गई है। फिलहाल काले मुंह वाले इन लंगूरों को देख बंदरों की टोलियों में हड़कंप मच गया है। जहां-जहां लंगूर जा रहे हैं, वहां से बंदर भागने लगे हैं।

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अल्मोड़ा के एनटीडी में गुणियों (लंगूरों) की टोली
अल्मोड़ा के एनटीडी में गुणियों (लंगूरों) की टोली : फोटो – बलवंत मेहता

बंदरों से आज तक नहीं निपटा जा सका, खेती तो दूर किचन गार्डनिंग तक बंद

उल्लेखनीय है कि संपूर्ण जनपद सहित नगर क्षेत्र में लंबे समय से बंदरों का आतंक व्याप्त है। बंदर लंबे समय से न केवल राह चलते लोगों पर हमला करते हैं, ​बल्कि खेती व बागवानी को भी नुकसान पहुंचाते हैं। नगर के रानीधारा, ढूंगाधारा, चीनाखान, धारानौला, खत्याड़ी, सरकार की आली, एनटीडी, नृसिंहबाड़ी आदि मोहल्लों में बंदरों का सर्वाधिक आतंक है। प्रशासन, वन विभाग और पालिका इनका आतंक समाप्त करने के लिए जो भी योजना बनाती रही। आज तक वह धरातल पर कहीं नहीं उतरी। हालत इतनी बदतर है कि लेागों ने खेती तो दूर किचन गार्डनिंग भी इन बंदरों के आतंक से बंद कर दी है।

बंदरों से परेशान थी जनता, अब लंगूरों की टोली आ पहुंची

अब तक तो केवल शहर में बंदर आतंक मचा रहे थे, लेकिन अब तो अल्मोड़ा में लंगूरों की टोलियां भी यहां आ पहुंची हैं। आज बृहस्पतिवार को एनटीडी क्षेत्र में लंगूरों की टोलियों को देखा गया। स्थानीय लोगों के अनुसार लंगूरों के आने के साथ ही इलाके के बंदरों में भगदड़ देखी गई। माना जाता है कि लंगूरों से बंदर बहुत भय खाते हैं। इलाके में जब वर्चस्व की लड़ाई होती है तो लंगूर ही बंदरों पर भारी पड़ते हैं। अतएव जहां भी लंगूर आते हैं वहां बंदरों में भगदड़ मच जाया करती है। इसके बावजूद कई इलाकों में बंदर और लंगूर साथ-साथ निवास करते भी देखे गए हैं।

लंगूरों ने आबादी बढ़ाई तो क्या होगा !

अलबत्ता अब यह तो तय है कि नगर क्षेत्र में यदि लंगूरों ने अपनी आबादी बढ़ाई तो बंदर भले ही भाग जायें, लेकिन इंसानों को बहुत दिक्कत होगी। चूंकि बंदरों की तुलना में लंगूर ज्यादा नुकसान करता है। किसी इलाके में बंदर तो कहीं लंगूरों की टोलियां अब समस्या का कारण बनेंगी। वैसे समझा जा रहा है कि इन लंगूरों को जरूर कहीं अन्य जगह से लाकर यहां छोड़ा गया है। लोगों ने पालिका, प्रशासन व वन विभाग से समय रहते समस्या का समाधान करने की अपील की है।

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Deepak Manral
Deepak Manralhttp://creativenewsexpress.com
तीन दशकों के करीब का कार्यानुभव रखने वाले दीपक मनराल पत्रकारिता जगत का एक सम्मानित नाम हैं। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत वर्ष 1996 में एक त्रैमासिक पत्रिका के सहयोगी संपादक के रूप में की थी। बीते 25 वर्षों में उन्होंने अमर उजाला, दैनिक भास्कर, दैनिक आज, उत्तरांचल दीप और चारधाम टाइम्स जैसे प्रतिष्ठित समाचार पत्रों में 'ब्यूरो प्रमुख' की महत्वपूर्ण जिम्मेदारियाँ निभाई हैं। वर्तमान में वे 'गंगोत्री अक्षर उजाला पोस्ट' के संपादक हैं और सीएनई (CNE) मीडिया हाउस के संस्थापक व स्वामी के रूप में डिजिटल मीडिया को नई दिशा दे रहे हैं। अपनी निष्पक्ष और ईमानदार पत्रकारिता के लिए पहचाने जाने वाले मनराल आज भी प्रतिदिन 'ग्राउंड ज़ीरो' से जुड़कर सक्रिय पत्रकारिता कर रहे हैं।
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