गौला और शिप्रा नदी के लिए बनी बड़ी योजना
सूखते जल स्रोतों को मिलेगा नया जीवन
CNE REPORTER : नैनीताल जनपद में जल संरक्षण और पेयजल आपूर्ति को सुदृढ़ करने के उद्देश्य से मुख्य विकास अधिकारी अरविन्द कुमार पाण्डे ने धरातलीय निरीक्षण के साथ-साथ समीक्षा बैठक कर विभागीय अधिकारियों को कड़े दिशा-निर्देश जारी किए। सोमवार को आयोजित इन कार्यक्रमों में जल स्रोतों के पुनर्जीवीकरण और निर्माणाधीन परियोजनाओं की गुणवत्ता पर विशेष जोर दिया गया।


मुख्य विकास अधिकारी ने नैनीताल के चोपड़ा क्षेत्र के अंतर्गत बसगांव में खनन न्यास मद से निर्मित हो रही पेयजल योजना का जायजा लिया। लगभग 59 लाख रुपये की लागत से बन रही इस योजना के निरीक्षण के दौरान उन्होंने महिला नर्सरी समूह द्वारा जल स्रोत को लेकर उठाई गई आपत्तियों को गंभीरता से सुना। उन्होंने मौके पर उपस्थित ग्रामीण महिलाओं, स्थानीय निवासियों और विभागीय अधिकारियों से विस्तृत वार्ता की। मुख्य विकास अधिकारी ने स्पष्ट किया कि पेयजल योजना का निर्माण जनहित और सभी पक्षों की सहमति के आधार पर ही सुनिश्चित किया जाए ताकि क्षेत्रवासियों को बिना किसी बाधा के सुचारु जल आपूर्ति मिल सके।
सारा परियोजना के कार्यों की समीक्षा
क्षेत्र भ्रमण के दौरान मुख्य विकास अधिकारी ने स्प्रिंग एंड रिवर रिजूवनेशन आथोरिटी (सारा) परियोजना के तहत निर्मित चेक डैम का भी निरीक्षण किया। उन्होंने अधिकारियों को निर्देशित किया कि सरकारी योजनाओं का निर्माण जिस उद्देश्य से किया गया है, उसका सीधा लाभ जनता तक पहुँचना चाहिए। उन्होंने विभागीय अधिकारियों को नियमित रूप से क्षेत्रों का भ्रमण करने और विकास कार्यों की निगरानी करने के निर्देश दिए।
सोमवार को ही मुख्य विकास अधिकारी की अध्यक्षता में सारा परियोजना की समीक्षा बैठक संपन्न हुई। बैठक में जनपद के विभिन्न क्षेत्रों में संचालित 15 योजनाओं की प्रगति रिपोर्ट पेश की गई। उन्होंने सभी खंड विकास अधिकारियों को अपने-अपने विकास खंडों में पाँच-पाँच प्राचीन नौलों को चिह्नित कर उनके पुनर्जीवीकरण और सौंदरीकरण के निर्देश दिए। इसके साथ ही सूखे गधेरों और जल स्रोतों का सर्वे कर उन्हें पुनर्जीवित करने की योजना पर कार्य करने को कहा गया।
मुख्य विकास अधिकारी ने गौला नदी के संपूर्ण क्षेत्र के उपचार और संरक्षण के लिए एक विस्तृत परियोजना रिपोर्ट तैयार करने के आदेश दिए हैं। इसके लिए सभी रेखीय विभागों और खंड विकास अधिकारियों को निर्देशित किया गया है कि वे अपने क्षेत्रों से संबंधित कार्ययोजना 20 मई 2026 तक अनिवार्य रूप से प्रस्तुत करें। इस रिपोर्ट को संकलित कर जलागम निदेशालय को भेजा जाएगा।
बैठक में विभिन्न जल संरक्षण कार्यों के लिए धनराशि भी अवमुक्त की गई। लघु सिंचाई विभाग को रिचार्ज पिट निर्माण हेतु 62.4 लाख रुपये, शिप्रा नदी के कैचमेंट एरिया में गधेरों के उपचार हेतु वन विभाग को 66.15 लाख रुपये और भालूगाड जलप्रपात के पुनर्जीवीकरण हेतु 50.34 लाख रुपये की राशि स्वीकृत की गई। मुख्य विकास अधिकारी ने निर्देश दिए कि योजनाओं में दोहराव से बचने के लिए सभी विभागों से अनापत्ति प्रमाण पत्र लिया जाए और कार्यों की पारदर्शिता के लिए कार्य शुरू होने से पहले और पूर्ण होने के बाद की फोटोग्राफी अनिवार्य रूप से की जाए।
मुख्य विकास अधिकारी ने इस वर्ष जनपद में एक आदर्श ताल के निर्माण, एक मॉडल नौला या धारा के पुनर्जीवीकरण और एक बड़े सीमेंट चेक डैम के निर्माण को प्राथमिकता पर रखने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि चेक डैम का निर्माण इस प्रकार किया जाए कि उसके पीछे एक बड़े क्षेत्र में जल संरक्षण संभव हो सके। बैठक में सहायक परियोजना निदेशक चंद्रा फर्त्याल सहित वन, कृषि, उद्यान और सिंचाई विभाग के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।


