सब-रजिस्ट्रार कार्यालय में मिलीं अनियमितताएं
पटवारियों की लापरवाही पर अनुशासनात्मक कार्यवाही
सीएनई रिपोर्टर, नैनीताल। कुमाऊं आयुक्त एवं मुख्यमंत्री के सचिव दीपक रावत ने सोमवार को नैनीताल स्थित उपजिलाधिकारी कार्यालय, तहसील तथा निबंधन कार्यालय का औचक निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान वर्ष 2002 से लंबित राजस्व वादों और कार्यप्रणाली में भारी अनियमितताएं पाए जाने पर आयुक्त ने कड़ी नाराजगी जताई। उन्होंने लापरवाही बरतने वाले राजस्व अहलमद और पटवारियों को प्रतिकूल प्रविष्टि (एडवर्स एंट्री) देने तथा सब-रजिस्ट्रार से स्पष्टीकरण तलब करने के सख्त आदेश जारी किए हैं।


निरीक्षण के दौरान कुमाऊं आयुक्त ने राजस्व वादों की समीक्षा की, जिसमें यह तथ्य सामने आया कि धारा 229-बी के अंतर्गत कुछ मामले पिछले 15 से 20 वर्षों से लंबित पड़े हैं। उन्होंने उपजिलाधिकारी को निर्देशित किया कि इतने पुराने मामलों में अनावश्यक लंबी तिथियां न दी जाएं। उन्होंने आदेश दिया कि प्रत्येक सप्ताह या हर तीन दिन में सुनवाई की तिथि निर्धारित कर इन वादों का त्वरित निस्तारण सुनिश्चित किया जाए। साथ ही, सभी दर्ज वादों को राजस्व न्यायालय प्रबंधन प्रणाली (आरसीएमएस) पोर्टल पर अनिवार्य रूप से अपलोड करने के निर्देश दिए।
संपत्ति बंटवारे से संबंधित धारा 176 के मामलों की समीक्षा करते हुए आयुक्त ने पाया कि उपजिलाधिकारी के स्पष्ट आदेशों के बाद भी संबंधित पटवारियों द्वारा ‘कुर्रे’ (बंटवारे का विवरण) दाखिल नहीं किए गए हैं। इस पर उन्होंने सख्त रुख अपनाते हुए उपजिलाधिकारी को निर्देश दिए कि ऐसे लापरवाह कर्मचारियों की सूची तैयार कर उन्हें कारण बताओ नोटिस जारी किया जाए और आवश्यकतानुसार कठोर अनुशासनात्मक कार्यवाही अमल में लाई जाए।
भूमि को अकृषक घोषित करने से संबंधित धारा 143 के आवेदनों की जांच के दौरान राजस्व अहलमद रोहित पालीवाल संतोषजनक उत्तर नहीं दे सके। पत्रावलियों के रखरखाव में लापरवाही और कार्यों के प्रति अनभिज्ञता पाए जाने पर आयुक्त ने उपजिलाधिकारी नैनीताल को निर्देश दिए कि संबंधित कार्मिक को तत्काल कारण बताओ नोटिस जारी किया जाए और उनकी सेवा पंजिका में प्रतिकूल प्रविष्टि दर्ज की जाए।
अधिकारियों को फटकार और रात्रि तक कार्य का अल्टीमेटम
निरीक्षण के दौरान सम्मन तामिली और इश्तहार पंजिका में भी कमियां पाई गईं। कार्यों की नियमित समीक्षा न करने पर आयुक्त ने उपजिलाधिकारी और तहसीलदार को फटकार लगाई। उन्होंने निर्देश दिए कि सोमवार को ही तहसील क्षेत्र के सभी राजस्व निरीक्षकों और उप निरीक्षकों के साथ बैठक कर धारा 143 के सभी लंबित प्रकरणों का निस्तारण किया जाए। उन्होंने स्पष्ट किया कि जब तक निस्तारण की कार्यवाही पूर्ण नहीं हो जाती और उन्हें रिपोर्ट नहीं मिल जाती, तब तक कार्यालय खुला रखा जाए।
उपजिलाधिकारी कार्यालय के बाद आयुक्त ने निबंधन कार्यालय (सब-रजिस्ट्रार ऑफिस) का रुख किया। वहां रजिस्ट्री दस्तावेजों के रखरखाव में भारी खामियां मिलीं। जमीन की रजिस्ट्री के बाद क्रेता को दस्तावेज सौंपने की कोई रिसीविंग पंजिका उपलब्ध नहीं थी और न ही मौके पर रजिस्ट्री का पूर्ण विवरण मिल पाया। इस कुप्रबंधन पर आयुक्त ने सब-रजिस्ट्रार से स्पष्टीकरण मांगा है और भविष्य के लिए व्यवस्थाएं दुरुस्त करने की चेतावनी दी है।
निरीक्षण के समय अपर जिलाधिकारी सौरभ असवाल, प्रशिक्षु भारतीय प्रशासनिक सेवा अधिकारी दिव्यांशु मीणा, तहसीलदार अक्षत कुमार भट्ट सहित विभिन्न विभागों के कार्मिक और अधिकारी उपस्थित रहे। आयुक्त ने अंत में दोहराया कि जनहित के कार्यों में पारदर्शिता और जवाबदेही अनिवार्य है और किसी भी स्तर पर अनावश्यक विलंब स्वीकार नहीं किया जाएगा।


