परदेश में मित्र विद्या होती है, घर में मित्र स्त्री होती है, रोगियों का मित्र औषणि और मरणोपरांत धर्म ही मित्र होता है। — चाण्यक्य नीति
सामने दूध—सा मधुर बोलने वाले और पीठ पीछे विष भरी छुरी मारने वाले मित्र को छोड़ देना चाहिए। — हितोपदेश
जीवन में केवल तीन सच्चे मित्र हैं — वृद्ध पत्नी, पुराना कुत्ता और वर्तमान धन। — वैजामिन फ्रेंकलिन
महान व्यक्तियों की मित्रता नीचों से नहीं होती, हाथी सियारों के मित्र नहीं होते। — भारवि
मित्र बनाना सरल है, मैत्री पालन दुष्कर है। चित्तों की अस्थिरता के कारण अल्म मतभेद होने पर भी मित्रता टूट जाती है। — वाल्मीकी रामायण
मित्रता करने में धैर्य से काम लो, किंतु मित्रता कर ही लो तो उसे अचल और दृढ़ होकर निबाहो।— सुकरात
मित्र को उधार देना और मित्र द्वारा उसे नही लौटाना, मित्रता समाप्ति के प्रमुख कारकों में शामिल है। — सुकरात
मित्रों से जहां लेन—देन शुरू हुआ, वहां मन मुटाव होते देर नही लगती। — मुंशी प्रेमचंद, ‘गबन से’
आपका सबसे सच्चा और सबसे अच्छा दोस्त वह है जो आपकी कमजोरियों की दूसरों से चर्चा नहीं करता, लेकिन आपसे साफ—साफ कह डालता है। — सेकर
न कोई तुम्हारा मित्र है और न शत्रु, तुम्हारा अपना व्यवहार ही शत्रु अथवा मित्र बनाने का उत्तरदायी है। — चाणक्य
अच्छे मित्र का यही लक्षण है कि वह मित्र को पाप से रोकता है, हितकारी कार्यों में लगाता है, उसकी गुप्त बातों को छुपाता है, उसके गुणों को जग के सामने प्रकट करता है और विपत्ति काल में कभी साथ नही छोड़ता। — भर्तहरि, नीतिशतक
तीन दशकों के करीब का कार्यानुभव रखने वाले दीपक मनराल पत्रकारिता जगत का एक सम्मानित नाम हैं। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत वर्ष 1996 में एक त्रैमासिक पत्रिका के सहयोगी संपादक के रूप में की थी। बीते 25 वर्षों में उन्होंने अमर उजाला, दैनिक भास्कर, दैनिक आज, उत्तरांचल दीप और चारधाम टाइम्स जैसे प्रतिष्ठित समाचार पत्रों में 'ब्यूरो प्रमुख' की महत्वपूर्ण जिम्मेदारियाँ निभाई हैं। वर्तमान में वे 'गंगोत्री अक्षर उजाला पोस्ट' के संपादक हैं और सीएनई (CNE) मीडिया हाउस के संस्थापक व स्वामी के रूप में डिजिटल मीडिया को नई दिशा दे रहे हैं। अपनी निष्पक्ष और ईमानदार पत्रकारिता के लिए पहचाने जाने वाले मनराल आज भी प्रतिदिन 'ग्राउंड ज़ीरो' से जुड़कर सक्रिय पत्रकारिता कर रहे हैं।