HomeBreaking Newsदेशभर में मानसून की धमाकेदार एंट्री, उत्तराखंड में सबसे कठिन चार दिन

देशभर में मानसून की धमाकेदार एंट्री, उत्तराखंड में सबसे कठिन चार दिन

1500 किमी लंबी मानसून ट्रफ सक्रिय

1 से 4 जुलाई तक भारी से बहुत भारी बारिश का अलर्ट

देहरादून/नई दिल्ली, 30 जून। देशभर में दक्षिण-पश्चिम मानसून अब निर्णायक चरण में पहुंच गया है। मंगलवार को मानसून ने उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश, जम्मू-कश्मीर, लद्दाख और उत्तर प्रदेश में भी आधिकारिक रूप से दस्तक दे दी। इसके साथ ही देश के 26 राज्यों में मानसून सक्रिय हो चुका है। इसी बीच भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने उत्तर भारत के लिए बड़ी चेतावनी जारी करते हुए बताया है कि बंगाल की खाड़ी से जम्मू-कश्मीर तक करीब 1500 किलोमीटर लंबी मानसून ट्रफ (Monsoon Trough) सक्रिय हो गई है। इसका सबसे अधिक प्रभाव उत्तराखंड पर देखने को मिलेगा, जहां 1 से 4 जुलाई के बीच कई जिलों में भारी से बहुत भारी बारिश, आकाशीय बिजली, 30 से 40 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं और कुछ स्थानों पर अत्यंत तीव्र वर्षा (Extremely Intense Rainfall) होने की संभावना है। मौसम विभाग ने चारधाम यात्रा, पर्वतीय मार्गों और नदी-नालों के आसपास विशेष सतर्कता बरतने की सलाह दी है।

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छह दिन की सुस्ती के बाद अचानक रफ्तार में आया मानसून

मानसून ने 24 जून को मध्य प्रदेश और गुजरात में प्रवेश किया था, लेकिन उसके बाद लगभग छह दिनों तक इसकी रफ्तार धीमी पड़ गई। इसी वजह से उत्तर और मध्य भारत के कई हिस्सों में भीषण गर्मी और उमस बनी रही। मंगलवार को मौसम में बड़ा बदलाव आया और मानसून तेजी से आगे बढ़ते हुए उत्तराखंड सहित उत्तर भारत के कई राज्यों तक पहुंच गया।

मौसम वैज्ञानिकों का कहना है कि मानसून की इस तेज प्रगति के पीछे सबसे बड़ा कारण 1500 किलोमीटर लंबी मानसून ट्रफ का सक्रिय होना है, जिसने पूरे उत्तर भारत में नमी की आपूर्ति बढ़ा दी है।

क्या होती है मानसून ट्रफ और क्यों होती है अहम?

मानसून ट्रफ कम दबाव वाले क्षेत्र की एक लंबी पट्टी होती है, जिसे दक्षिण-पश्चिम मानसून की रीढ़ (Backbone of Monsoon) माना जाता है। यह अरब सागर और बंगाल की खाड़ी से नमी से भरी हवाओं को उत्तर और मध्य भारत तक पहुंचाती है। जब यह ट्रफ सक्रिय होती है तो व्यापक और तेज बारिश का दौर शुरू हो जाता है।

फिलहाल यह ट्रफ उत्तरी बंगाल की खाड़ी से जम्मू-कश्मीर तक फैली हुई है। मौसम विभाग के अनुसार यह धीरे-धीरे दक्षिण की ओर अपनी सामान्य स्थिति में आएगी, जिससे बिहार, उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश, पंजाब, हरियाणा और जम्मू-कश्मीर में 1 से 4 जुलाई के बीच व्यापक वर्षा होने की संभावना है।

उत्तराखंड में 1 जुलाई से सबसे कठिन दौर

मौसम विज्ञान केंद्र, देहरादून के अनुसार 1 जुलाई से 4 जुलाई तक उत्तराखंड में मानसून अपने सबसे सक्रिय चरण में रहेगा।

1 जुलाई

भारी से बहुत भारी वर्षा की संभावना—

  • देहरादून
  • टिहरी गढ़वाल
  • पौड़ी गढ़वाल
  • चंपावत
  • पिथौरागढ़
  • नैनीताल
  • बागेश्वर
  • ऊधमसिंह नगर

इसके अलावा अधिकांश पर्वतीय जिलों में—

  • गरज-चमक
  • आकाशीय बिजली
  • 30–40 किमी प्रति घंटे की तेज हवाएं
  • अत्यंत तीव्र वर्षा के दौर

देखने को मिल सकते हैं।

2 जुलाई

देहरादून, टिहरी, पौड़ी, नैनीताल और बागेश्वर में भारी से बहुत भारी बारिश की संभावना है। हरिद्वार, उत्तरकाशी, चमोली और रुद्रप्रयाग में भी भारी बारिश का अलर्ट जारी किया गया है।

3 जुलाई

देहरादून, उत्तरकाशी, चमोली, टिहरी, पौड़ी, नैनीताल और बागेश्वर में तेज बारिश जारी रहने की संभावना है। कई स्थानों पर कम समय में अत्यधिक वर्षा होने से भूस्खलन और फ्लैश फ्लड का खतरा बढ़ सकता है।

4 जुलाई

पौड़ी और बागेश्वर में भारी वर्षा का विशेष अलर्ट है। अन्य पर्वतीय जिलों में भी गरज-चमक और तेज बारिश जारी रहने की संभावना है।

चारधाम यात्रा पर सबसे बड़ा असर

लगातार बारिश का सबसे अधिक असर चारधाम यात्रा पर पड़ सकता है।

  • बदरीनाथ राष्ट्रीय राजमार्ग
  • केदारनाथ यात्रा मार्ग
  • गंगोत्री हाईवे
  • यमुनोत्री मार्ग

पर भूस्खलन, बोल्डर गिरने, मलबा आने और सड़कें बाधित होने की आशंका काफी बढ़ गई है। प्रशासन यात्रियों से अपील कर रहा है कि मौसम और सड़क की ताजा स्थिति की जानकारी लेकर ही यात्रा करें।

उत्तराखंड में क्यों बढ़ गया खतरा?

उत्तराखंड की पर्वतीय भौगोलिक परिस्थितियों में कम समय में होने वाली अत्यधिक वर्षा सबसे अधिक नुकसान पहुंचाती है। मौसम विशेषज्ञों के अनुसार अगले चार दिनों में—

  • छोटे नदी-नाले और गदेरे अचानक उफान पर आ सकते हैं।
  • भूस्खलन संभावित क्षेत्रों में मलबा और बोल्डर गिर सकते हैं।
  • पर्वतीय सड़कें कई जगह बाधित हो सकती हैं।
  • राष्ट्रीय राजमार्गों पर यातायात प्रभावित हो सकता है।
  • निचले इलाकों में जलभराव और तेज बहाव की स्थिति बन सकती है।

देश के कई राज्यों में भी भारी बारिश

1 जुलाई को छत्तीसगढ़, ओडिशा, तेलंगाना, केरल, गोवा, तमिलनाडु, पश्चिम बंगाल, सिक्किम, अरुणाचल प्रदेश, असम और मेघालय में भी भारी बारिश की संभावना जताई गई है।

2 जुलाई को आंध्र प्रदेश, झारखंड, ओडिशा, असम, मेघालय, पश्चिम बंगाल और सिक्किम में भी तेज बारिश का पूर्वानुमान है।

पूर्वोत्तर में बाढ़ ने बढ़ाई चिंता

मानसून की सक्रियता का असर पूर्वोत्तर भारत में पहले ही दिखाई देने लगा है। अरुणाचल प्रदेश में लगातार बारिश से लेकू नदी उफान पर है, जबकि असम के कई हिस्सों में बाढ़ की स्थिति गंभीर बनी हुई है।

असम राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (ASDMA) के अनुसार छह जिलों के 22 हजार से अधिक लोग बाढ़ से प्रभावित हुए हैं। धेमाजी जिला सबसे अधिक प्रभावित है। 96 गांव जलमग्न हैं, 1690 हेक्टेयर कृषि भूमि और 48 हजार से अधिक पशुधन प्रभावित हुआ है।

कई राज्यों में अभी भी गर्मी बरकरार

मानसून के आगे बढ़ने के बावजूद देश के कुछ हिस्सों में गर्मी का असर अभी खत्म नहीं हुआ है।

हरियाणा के रोहतक में 43.5°C, दिल्ली में 43.4°C, उत्तर प्रदेश के बांदा में 43.2°C, मध्य प्रदेश के खजुराहो में 41.2°C, पंजाब के आनंदपुर साहिब में 40.6°C और गुजरात के सुरेंद्रनगर में 40.5°C तापमान दर्ज किया गया। मौसम विभाग ने मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश और विदर्भ के कुछ हिस्सों में हीटवेव की स्थिति बने रहने की संभावना जताई है।

लोगों के लिए जरूरी सलाह

मौसम विभाग ने नागरिकों और यात्रियों से अपील की है कि—

  • नदी, नालों और गदेरों के किनारे न जाएं।
  • भूस्खलन संभावित क्षेत्रों से दूरी बनाए रखें।
  • गरज-चमक के दौरान खुले स्थानों और पेड़ों के नीचे खड़े न हों।
  • चारधाम यात्रा पर निकलने से पहले मौसम और सड़क की स्थिति अवश्य जांच लें।
  • जिला प्रशासन और मौसम विभाग की एडवाइजरी का पालन करें।

निष्कर्ष

देशभर में मानसून के पूरी तरह सक्रिय होने के साथ अब उत्तराखंड भी उसके सबसे प्रभावशाली क्षेत्र में शामिल हो गया है। 1500 किलोमीटर लंबी सक्रिय मानसून ट्रफ के कारण अगले चार दिन राज्य के लिए बेहद संवेदनशील माने जा रहे हैं। भारी से बहुत भारी बारिश, आकाशीय बिजली, तेज हवाएं, भूस्खलन और फ्लैश फ्लड की आशंका को देखते हुए आम लोगों, पर्यटकों और चारधाम यात्रियों को विशेष सतर्कता बरतने की आवश्यकता है। मौसम विभाग का स्पष्ट संदेश है—अनावश्यक जोखिम से बचें और केवल आधिकारिक मौसम अपडेट के आधार पर ही यात्रा या अन्य गतिविधियों की योजना बनाएं।

नोट : उक्त समाचार केंद्र व राज्य सरकारों के मौसम विज्ञान केंद्रों द्वारा प्रदान की की लेटस्ट जानकारी पर आधारित है।

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