HomeBreaking Newsगुप्तेश्वर महादेव मंदिर के महंत कृष्णा गिरि महाराज भू-समाधि में विलीन

गुप्तेश्वर महादेव मंदिर के महंत कृष्णा गिरि महाराज भू-समाधि में विलीन

मौत के कारणों पर जनता में गहरा आक्रोश और सस्पेंस

सीएनई रिपोर्टर, सुयालबाड़ी। क्षेत्र के प्रसिद्ध धार्मिक स्थल गुप्तेश्वर महादेव मंदिर के महंत कृष्णा गिरि बाबा का पार्थिव शरीर शनिवार को पोस्टमार्टम के बाद जब मंदिर परिसर पहुंचा, तो पूरा माहौल गमगीन हो गया।

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सनातन परंपरा और संन्यासी रीति-रिवाजों के अनुसार, पूज्य महाराज के पार्थिव शरीर को मंदिर प्रांगण में ही भू-समाधि दी गई। इस दौरान उपस्थित हजारों भक्तों और स्थानीय निवासियों ने अश्रूपूर्ण नेत्रों और भारी मन से अपने प्रिय संत को अंतिम विदाई दी।

रहस्यमयी परिस्थितियों में मिला था शव

उल्लेखनीय है कि बीते दिन गुप्तेश्वर महादेव मंदिर परिसर के बरामदे में महाराज कृष्णा गिरि का शव संदिग्ध परिस्थितियों में रस्सी के फंदे से लटकता हुआ मिला था। घटना की सूचना मिलते ही पुलिस प्रशासन की टीम तुरंत मौके पर पहुंची और शव को कब्जे में लेकर जांच शुरू की। पुलिस ने शव का पंचनामा भरकर पोस्टमार्टम के लिए भेजा था, जिसकी रिपोर्ट आने के बाद आज शव परिजनों और मंदिर समिति को सौंपा गया।

आत्महत्या या साजिश? जनता उठा रही सवाल

यद्यपि पुलिस और प्रशासन शुरुआती जांच के आधार पर प्रथम दृष्टया इसे आत्महत्या का मामला मान रहे हैं, लेकिन क्षेत्र की जनता इस थ्योरी को आसानी से स्वीकार करने के लिए तैयार नहीं है। स्थानीय लोगों और श्रद्धालुओं के बीच महाराज की मौत को लेकर गहरा सस्पेंस बना हुआ है और वे इसे संदिग्ध मान रहे हैं।

आम जनता के मन में उठ रहे तीखे सवालों का जवाब फिलहाल किसी भी अधिकारी के पास नहीं है। क्षेत्रवासियों का तर्क है कि:

“एक सिद्ध संत, जो लोगों को जीवन का मर्म सिखाते थे, वह बिना किसी बेहद गंभीर या विशेष कारण के ऐसा आत्मघाती कदम नहीं उठा सकते। यदि उन्होंने ऐसा किया भी है, तो पुलिस को उस मुख्य वजह या उन परिस्थितियों को स्पष्ट करना चाहिए जिन्होंने उन्हें इस कदम के लिए मजबूर किया।”

स्थानीय नागरिकों ने मांग की है कि मामले की निष्पक्ष और उच्च स्तरीय जांच की जाए ताकि सच सामने आ सके।

संतों और गणमान्य नागरिकों ने दी विदाई

दिवंगत बाबा कृष्णा गिरि महाराज का संबंध प्रतिष्ठित जूना अखाड़े से था। उनके महाप्रयाण की खबर मिलते ही बेतालघाट, गरमपानी, बागेश्वर तथा आसपास के कई अन्य धार्मिक स्थलों से भारी संख्या में साधु-संत सुयालबाड़ी पहुंचे और उनकी अंतिम यात्रा में सम्मिलित हुए।

महाराज की समाधि के इस अत्यंत भावुक क्षण पर मंदिर समिति के मदन जीना, रमेश सुयाल, अर्जुन नेगी (स्थानीय प्रतिनिधि), रणजीत जीना (सामाजिक कार्यकर्ता) व सांसद प्रतिनिधि मदन मोहन कैड़ा आदि मौजूद रहे।

इसके अतिरिक्त क्षेत्र के व्यापार मंडल के पदाधिकारी, जनप्रतिनिधि और हजारों की संख्या में आम जनमानस उपस्थित रहा, जिन्होंने नम आंखों से बाबा को नमन किया।

इधर आम जन में इस घटना को लेकर संदेह व आक्रोश का माहौल है। लोगों का कहना है कि आस्था के केंद्र में इस तरह की घटना बहुत निंदनीय है। सबसे बड़ी बात तो यह है कि महंत की मौत एक रहस्य बनकर रह गई है।

इस संबंध में पूर्व प्रकाशित समाचार —

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Deepak Manral
Deepak Manralhttp://creativenewsexpress.com
तीन दशकों के करीब का कार्यानुभव रखने वाले दीपक मनराल पत्रकारिता जगत का एक सम्मानित नाम हैं। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत वर्ष 1996 में एक त्रैमासिक पत्रिका के सहयोगी संपादक के रूप में की थी। बीते 25 वर्षों में उन्होंने अमर उजाला, दैनिक भास्कर, दैनिक आज, उत्तरांचल दीप और चारधाम टाइम्स जैसे प्रतिष्ठित समाचार पत्रों में 'ब्यूरो प्रमुख' की महत्वपूर्ण जिम्मेदारियाँ निभाई हैं। वर्तमान में वे 'गंगोत्री अक्षर उजाला पोस्ट' के संपादक हैं और सीएनई (CNE) मीडिया हाउस के संस्थापक व स्वामी के रूप में डिजिटल मीडिया को नई दिशा दे रहे हैं। अपनी निष्पक्ष और ईमानदार पत्रकारिता के लिए पहचाने जाने वाले मनराल आज भी प्रतिदिन 'ग्राउंड ज़ीरो' से जुड़कर सक्रिय पत्रकारिता कर रहे हैं।
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