….जब तक गंगा—यमुना—कोसी का पानी रहे, मेरे सजना की जिंदगानी रहे ! अल्मोड़ा में सुहागिनों ने रखा निर्जला व्रत, अपने पतियों के दीर्घायु की करी कामना

सीएनई रिपोर्टर, अल्मोड़ा पति—पत्नि के प्रेम, आस्था और विश्वास का प्रतीक करवाचौथ सांस्कृतिक नगरी अल्मोड़ा में पूरी श्रद्धा व व्रत—पूजन के साथ मनाया गया। सुहागिनों…


सीएनई रिपोर्टर, अल्मोड़ा

पति—पत्नि के प्रेम, आस्था और विश्वास का प्रतीक करवाचौथ सांस्कृतिक नगरी अल्मोड़ा में पूरी श्रद्धा व व्रत—पूजन के साथ मनाया गया। सुहागिनों ने निर्जला करवा चौथ का व्रत रखकर पति की सलामती एवं उन्नति की कामना की। शाम को चांद निकलने से पहले पूजन-अर्चन किया और चंद्र दर्शन के बाद सुहागिनों ने व्रत तोड़ा और पति व अपने बड़ों का आशीर्वाद प्राप्त किया। पतियों ने भी अपनी अद्धांगनियों को उपहार दिए।
बुधवार को ‘जब तक पहाड़ की सदानीरा नदियों पानी रहे, मेरे सजना की जिंदगानी रहे’ कि कामना के साथ सुहागिनों ने अपने सुहाग की लम्बी उम्र के लिए व्रत रखा। आज यहां सुहागिनों ने पारम्परिक कुमाउनी व रंग—बिरंगे परिधान, आभूषण पहन कर तथा विविध प्रकार के श्रृंगार कर जोड़े में करवा की पूजा की। उल्लेखनीय है कि संपूर्ण पदेश सहित सांस्कृतिक नगरी अल्मोड़ा में भी महिलाएं अब पूरी श्रद्धा के साथ करवाचौथ का व्रत रखती हैं। सीधे कहें तो आज करवाचौथ को पहाड़ की महिलाओं ने पूर्ण श्रद्धा भाव के साथ अपना लिया है। महिलाओं का मानना है कि वट सावित्री की तरह करवाचौथ भी अब यहां की परम्परा का हिस्सा बन चुका है। इस दिन वह अपने अखंड सुहाग की रक्षा के लिए विशेष पूजन करती हैं। आज करवा चौथ पर चंद्रमा उदय होने के बाद सुहागिनें ने चलनी से चांद का दीदार किया और इसके बाद व्रत तोड़ते हुए पति के हाथों से ही जल और फल ग्रहण किया। इससे पूर्व परंपरा के अनुसार सुबह श्री गणेश भगवान, शिवजी एवं मां पार्वती की पूजा भी की गई। विभिन्न मुहल्लों में हुए भजन—कीर्तन कार्यक्रम में तमाम सुहागिन महिलाएं सम्मलित हुईं।

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