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पड़ताल : ऑनलाइन गेम फ्री फायर ने कैसे छीन ली मासूम यश की जिंदगी !

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14 लाख गंवाने के बाद फांसी लगाकर दी जान

CNE DESK/मोबाइल स्क्रीन पर चमकती रंगीन दुनिया ने एक मासूम की जिंदगी को अंधेरों में धकेल दिया। राजधानी लखनऊ के मोहनलालगंज क्षेत्र के धनुवासाड़ गांव में रहने वाला 13 साल का यश यादव, ऑनलाइन गेम फ्री फायर की लत में ऐसा उलझा कि उसने अपने पिता के खून-पसीने की कमाई के 14 लाख रुपये हार दिए, और अंततः सुसाइड कर ली।

पिता सुरेश, माता विमला और बीच में मृतक यश की फाइल फोटो

यश का गुनाह सिर्फ इतना था कि वह जीत की झूठी उम्मीदों में बार-बार पैसे लगाता चला गया, और जब हार गया तो डर और शर्म के बोझ तले उसकी नन्हीं जान टूट गई। यश के पिता सुरेश यादव ने खेत बेचकर एक मकान बनवाने के लिए बैंक में रकम जमा कर रखी थी। परिवार को क्या पता था कि यही रकम धीरे-धीरे एक मोबाइल गेम के जाल में फंसकर खत्म हो जाएगी।

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सोमवार को जब सुरेश बैंक गए और खाते में बैलेंस देखा, तो सब कुछ साफ हो गया। उन्होंने यश से पूछा तो वह रो पड़ा। पिता ने उसे प्यार से समझाया और ट्यूशन भेज दिया, लेकिन शाम को यश ने घर लौटकर कमरे में फांसी लगा ली।

परिजन उसे अस्पताल ले गए, जहां डॉक्टरों ने मृत घोषित कर दिया। पुलिस ने शव को पोस्टमॉर्टम के लिए भेज दिया।

दोस्तों को भी नहीं था अंदाजा

यश का दोस्त उत्कर्ष बताता है कि पहले वह हर छोटी-बड़ी बात शेयर करता था, लेकिन पिछले एक महीने से चुपचाप रहने लगा था। वह अक्सर घर पर ही रहता और रात को मोबाइल पर एक्टिव होता था।

उसके पास खुद का फोन नहीं था, लेकिन वह मां के फोन से गेम खेलता था। दो महीने पहले उसने बताया था कि इंस्टाग्राम की एक आईडी से फ्री फायर अकाउंट लिंक कर लिया है। दोस्तों ने उसे रोका, लेकिन उसने बात करना बंद कर दिया और पैसा लगाना शुरू कर दिया।

💰 गेम का लालच: स्किन्स, डायमंड और बुलेट्स

फ्री फायर में पावरफुल बनने के लिए महंगे आइटम, स्किन्स और डायमंड खरीदने पड़ते हैं। यश भी इन्हीं में उलझ गया। हर बार हारने के बाद वह रकम वापस पाने की कोशिश में और पैसे लगाता चला गया।

पहली बार पांच हजार रुपये हारने पर परिवार ने डांटा था, तो उसने रुक गया था। लेकिन इस बार डेढ़ महीने में ही 14 लाख रुपये हार गया।

मां का करुण विलाप : “सुबह तो हंसकर बाय किया था…”

यश की मां विमला रो-रोकर बार-बार बेहोश हो जा रही हैं। उनका कहना है,

“सुबह स्कूल जाते समय उसने हंसकर बाय कहा था… बोला मम्मी घर जाओ, अब यहां मत खड़ी रहो… हमें क्या पता था कि शाम को वो खुद को खत्म कर लेगा।”

परिजनों की गुहार : “अब किसी और का बच्चा न जाए”

यश की बुआ अंकिता का कहना है —

“भतीजा अभी 13 साल का था, उसे सही-गलत का अंदाजा नहीं था। जिस गेमिंग ऐप की वजह से एक घर उजड़ गया, उस पर कार्रवाई होनी चाहिए। आज हमारा बच्चा गया है, कल किसी और का जाएगा।”

गांव के दुकानदार भी बताते हैं कि रोज कई बच्चे गेम में पैसे लगाने के लिए आते हैं।

फ्री फायर की लत बन रही है खतरनाक

गेमिंग एक्सपर्ट्स बताते हैं कि हाल ही में फ्री फायर ने पेड आइटम्स का दायरा बढ़ाया है — महंगी गन स्किन्स, बैकपैक्स, कैरेक्टर अपग्रेड अब सिर्फ पैसे से ही मिलते हैं। इससे बच्चों में पैसा लगाने का दबाव और बढ़ रहा है।

कई गेमिंग कम्युनिटी सदस्य इसे विवादित मानते हैं, क्योंकि इससे बच्चों में लत और वित्तीय नुकसान की घटनाएं बढ़ सकती हैं।

⚡ चेतावनी की घंटी : माता-पिता करें सतर्कता, बच्चों को दें डिजिटल सुरक्षा

यश की दर्दनाक मौत एक चेतावनी है कि डिजिटल दुनिया के रंगीन जाल में बच्चे चुपचाप घुल सकते हैं।
माता-पिता को चाहिए कि बच्चों को मोबाइल केवल पढ़ाई के समय दें और संदिग्ध ऐप्स पर नजर रखें।

यश चला गया… लेकिन उसका जाना समाज को यह सोचने पर मजबूर कर गया है कि कहीं हम बच्चों को स्मार्टफोन देकर अनजाने में मौत का औजार तो नहीं थमा रहे।

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Deepak Manral
Deepak Manralhttp://creativenewsexpress.com
तीन दशकों के करीब का कार्यानुभव रखने वाले दीपक मनराल पत्रकारिता जगत का एक सम्मानित नाम हैं। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत वर्ष 1996 में एक त्रैमासिक पत्रिका के सहयोगी संपादक के रूप में की थी। बीते 25 वर्षों में उन्होंने अमर उजाला, दैनिक भास्कर, दैनिक आज, उत्तरांचल दीप और चारधाम टाइम्स जैसे प्रतिष्ठित समाचार पत्रों में 'ब्यूरो प्रमुख' की महत्वपूर्ण जिम्मेदारियाँ निभाई हैं। वर्तमान में वे 'गंगोत्री अक्षर उजाला पोस्ट' के संपादक हैं और सीएनई (CNE) मीडिया हाउस के संस्थापक व स्वामी के रूप में डिजिटल मीडिया को नई दिशा दे रहे हैं। अपनी निष्पक्ष और ईमानदार पत्रकारिता के लिए पहचाने जाने वाले मनराल आज भी प्रतिदिन 'ग्राउंड ज़ीरो' से जुड़कर सक्रिय पत्रकारिता कर रहे हैं।
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