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ऐसे कैसे पूरा होगा काकड़ीघाट से क्वारब तक टू लेन बनाने का कार्य !

क्वारब-चौसली लिंक मार्ग खुशखबरी
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🔥 कछुवा गति से चल रहा काम,  आज तक नहीं तोड़े गए कई भवन

— अनूप सिंह जीना —

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सुयालबाड़ी/गरमपानी। काकडी़घाट से क्वारब तक राष्ट्रीय राजमार्ग को टू लेन किए जाने का कार्य आज भी कछुवा गति से चल रहा है। बीते कई सालों में सड़क चौड़ीकरण की जद में आने वाले भवनों तक को आज तक पूरी तरह हटाया नहीं जा सका है। जिन लोगों को मुआवजा मिल चुका है उनके भवन तक आधे—अधूरे ही तोड़े गए हैं। वहीं, कुछ लोगों को आज तक मुआवजा राशि तक नहीं मिल पाई है।

ऐसे कैसे पूरा होगा काकड़ीघाट से क्वारब तक टू लेन बनाने का कार्य
ऐसे कैसे पूरा होगा काकड़ीघाट से क्वारब तक टू लेन बनाने का कार्य

उल्लेखनीय है कि 45 करोड़ से अधिक धनराशि की लागत से यह काम शुरू हुआ था। इस दौरान मनरसा, गंगोरी, गंगरकोट, औलियागांव, चोपड़ा, सुयालबाड़ी, क्वारब समेत हाईवे से सटे कई गांवों की जमीन अधिग्रहण किया गया। इसके लिए मुआवजा राशि का वितरण भी हुआ। विगत वर्ष जिन लोगों को मुआवजा राशि का भुगतान भी हो गया, उनके भवन तक आज तक पूरी तरह नहीं तोड़े जा सके हैं। ऐसे में सवाल यह उठता है कि काकडी़घाट से क्वारब तक राष्ट्रीय राजमार्ग अब नए स्वरुप में कब दिखेगा।

सड़क चौड़ीकरण के दौरान होने थे यह कार्य

विभाग का दावा था कि सड़क चौड़ीकरण के दौरान सुरक्षित यातायात को ध्यान में रखकर क्रश बैरियर के साथ ही मजबूत पैराफिटो का निर्माण भी किया जाएगा। दस किलोमीटर चौड़ीकरण के दौरान विभागीय अधिकारियों की टीम लगातार मॉनिटरिंग भी करेगी। रोड कटिंग का मलवा कोसी नदी में जाने से रोकने के लिए संबंधित विभाग विशेष वायरक्रैट (पत्थरों का जाल) का निर्माण भी करायेगा। काकडी़घाट से क्वारब तक चार नए पुल भी बनेंगे। दो 36–36 मीटर जबकि अन्य दो पुल 12–12 मीटर के बनाए जाएंगे। एनएच के अधिकारियों के अनुसार क्वारब, नैनीपुल, खीनापानी, सुयालबाड़ी के समीप नए पुलो का निर्माण होगा। राजमार्ग पर दस किलोमीटर दायरे में कई तीखे मोड़ भी समाप्त हो जाएंगे। तीखे मोड़ होने से दुर्घटना कई दुर्घटनाएं हो चुकी हैं। निर्माण के दौरान तीव्र मोड़ को विशेष प्रकार की कटिंग कर समाप्त किया जाएगा।

दावों के विपरीत बन गए डेंजर जोन

विभागीय दावा खतरों को कम करने का रहा है, लेकिन निर्माणाधीन सड़क को देखकर ऐसा लगता है कि यहां डेंजर जोन ही अधिक तैयार हो रहे हैं। मिसाल के तौर पर यहां करतियागाड़ पुल (कत्यागाढ़ पुल) के पास तो डेंजर जोन ही बन गया है। इससे आगे की भूमि का आज तक मआवजा नहीं मिल पाया है। जिस कारण सड़क चौड़ीकरण यहां प्रभावित हुआ है और अकसर वाहन दुर्घटनाएं हो रही हैं। यदि विभागीय लापरवाही इसी तरह रही तो भविष्य में सुयालबाड़ी बाजार में कभी भी कोई बड़ा हादसा हो सकता है।

कार्यप्रणाली पर सवाल उठा रहे आधे—अधूरे टूटे मकान

राजमार्ग की यदि बात करें तो जिन भवन स्वामियों को मुआवजा काफी समय पहले मिल चुका है उनके मकान आधे—अधूरे ही टूटे हैं। वहीं, कई तो ऐसे हैं ​जिन्होंने मुआवजा राशि प्राप्त होने के बाावजूद अपने भवन ​नहीं गिराये हैं।

तत्काल हो मुआवजा राशि का भुगतान, जल्द बने टू लेन

अलबत्ता इस महत्वपूर्ण राजमार्ग (काकड़ीघाट से क्वारब) के चौड़ीकरण का काम जन हित को देखते हुए तुरंत पूरा होना चाहिए। सड़क यदि टू लेन बनती है तो इसका काफी लाभ मिलेगा। आवश्यक है कि जिन लोगों को ​आज की तारीख तक मुआवजा राशि नहीं मिली है उन्हें तत्काल भुगतान करा जाये। साथ ही अधूरे टूटे भवनों को पूरी तरह साफ किया जाये, ताकि चौड़ीकरण के कार्य में कोई बाधा उत्पन्न न हो।

इधर इस संबंध में विभाग के एई गिरजा किशोर पांडे का कहना है कि जिन्होंने भवन नहीं तोड़े हैं उन पर कानूनी कार्रवाई की जायेगी। जिनको जमीन का मुआवजा नहीं मिला है उसको लेकर देहरादून आरओ आफिस में बात हुई है। जल्द ही समस्या का समाधान हो जायेगा।

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Deepak Manral
Deepak Manralhttp://creativenewsexpress.com
तीन दशकों के करीब का कार्यानुभव रखने वाले दीपक मनराल पत्रकारिता जगत का एक सम्मानित नाम हैं। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत वर्ष 1996 में एक त्रैमासिक पत्रिका के सहयोगी संपादक के रूप में की थी। बीते 25 वर्षों में उन्होंने अमर उजाला, दैनिक भास्कर, दैनिक आज, उत्तरांचल दीप और चारधाम टाइम्स जैसे प्रतिष्ठित समाचार पत्रों में 'ब्यूरो प्रमुख' की महत्वपूर्ण जिम्मेदारियाँ निभाई हैं। वर्तमान में वे 'गंगोत्री अक्षर उजाला पोस्ट' के संपादक हैं और सीएनई (CNE) मीडिया हाउस के संस्थापक व स्वामी के रूप में डिजिटल मीडिया को नई दिशा दे रहे हैं। अपनी निष्पक्ष और ईमानदार पत्रकारिता के लिए पहचाने जाने वाले मनराल आज भी प्रतिदिन 'ग्राउंड ज़ीरो' से जुड़कर सक्रिय पत्रकारिता कर रहे हैं।
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