130 इन्फैंट्री बटालियन (प्रादेशिक सेना) इकोलॉजिकल कुमाऊँ की अनूठी पहल
ग्रामीणों और विद्यार्थियों ने भी निभाई अहम भूमिका
सीएनई रिपोर्टर, पिथौरागढ़। उत्तराखंड के लोकपर्व हरेला को पर्यावरण संरक्षण के महाअभियान में बदलते हुए 130 इन्फैंट्री बटालियन (प्रादेशिक सेना) इकोलॉजिकल कुमाऊँ ने हरेला सप्ताह के दूसरे दिन भी बड़े स्तर पर वृक्षारोपण अभियान चलाया। बटालियन की पहल पर शनिवार को मुख्यालय क्षेत्र के चंडाक के निकट घुनसेरागांव तथा दूरस्थ बुंगाछीना के अगनिया गांव में कुल 20 हजार पौधों का रोपण किया गया। अभियान में सेना के अधिकारियों और जवानों के साथ स्थानीय ग्रामीणों, जनप्रतिनिधियों तथा स्कूली छात्र-छात्राओं ने उत्साहपूर्वक भागीदारी निभाई।

वृक्षारोपण के दौरान सभी प्रतिभागियों ने पर्यावरण संरक्षण और हरित हिमालय के निर्माण का संकल्प लिया। कार्यक्रम का उद्देश्य केवल पौधे लगाना ही नहीं, बल्कि समाज में प्रकृति संरक्षण के प्रति जागरूकता बढ़ाना और अधिक से अधिक लोगों को इस अभियान से जोड़ना भी रहा।

हरेला सप्ताह में 70 हजार पौधारोपण का रखा गया लक्ष्य
बटालियन द्वारा आयोजित यह अभियान हरेला सप्ताह के अंतर्गत संचालित व्यापक वृक्षारोपण कार्यक्रम का हिस्सा है। पूरे सप्ताह में 70 हजार पौधों के रोपण का महत्वाकांक्षी लक्ष्य निर्धारित किया गया है। इसके माध्यम से हिमालयी क्षेत्रों में हरित आवरण बढ़ाने, मृदा संरक्षण को प्रोत्साहित करने, पर्यावरणीय संतुलन बनाए रखने तथा जलवायु संरक्षण की दिशा में ठोस प्रयास किए जा रहे हैं।
बटालियन का मानना है कि स्थानीय समुदाय की सक्रिय भागीदारी से ही पर्यावरण संरक्षण जैसे अभियान स्थायी और प्रभावी बन सकते हैं। इसी सोच के साथ विभिन्न गांवों, विद्यालयों और सामाजिक संस्थाओं को इस कार्यक्रम से जोड़ा जा रहा है।
‘हर पौधा आने वाली पीढ़ियों की अमूल्य धरोहर’
इस अवसर पर बटालियन ने अभियान में सहयोग देने वाले स्थानीय नागरिकों, विद्यालयों और सभी सहयोगी संस्थाओं का आभार व्यक्त किया। अधिकारियों ने कहा कि पर्यावरण संरक्षण केवल किसी एक संस्था की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि पूरे समाज का सामूहिक दायित्व है। आज लगाया गया प्रत्येक पौधा आने वाली पीढ़ियों के लिए अमूल्य धरोहर साबित होगा।
16 जुलाई को होगा हरेला पर्व पर भव्य समापन
बटालियन के सहायक कमान अधिकारी लेफ्टिनेंट कर्नल वी.एस. दानू ने बताया कि हरेला सप्ताह के अंतर्गत वृक्षारोपण अभियान आगामी दिनों में भी लगातार जारी रहेगा। उन्होंने कहा कि 16 जुलाई 2026 को हरेला पर्व के अवसर पर इस अभियान का भव्य समापन किया जाएगा। तब तक निर्धारित लक्ष्य के अनुरूप हजारों और पौधों का रोपण कर हरित हिमालय के संकल्प को साकार करने का प्रयास जारी रहेगा।



