पोखरी गांव के पास हुई कार्रवाई
सीएनई रिपोर्टर, सुयालबाड़ी। वन अपराधों के विरुद्ध चलाए जा रहे विशेष अभियान के तहत वन विभाग की टीम ने गुरुवार शाम मौना–ल्वेशाल–कलापातल सड़क पर बड़ी कार्रवाई करते हुए सड़क किनारे पालीथीन से ढके 52 टिन लीसा बरामद किए। मौके पर कोई व्यक्ति मौजूद नहीं मिला। वन विभाग ने बरामद लीसे को अवैध मानते हुए सीज कर अपने कब्जे में ले लिया है।
प्रभागीय वनाधिकारी नैनीताल आकाश गंगवार के निर्देशन में वन अपराधों के विरुद्ध विशेष अभियान चलाया जा रहा है। इसी क्रम में गुरुवार, 13 अगस्त की शाम मुखबिर खास से मिली सूचना के आधार पर वन क्षेत्राधिकारी उत्तरी गौला विजय भट्ट के नेतृत्व में एक विशेष टीम गठित की गई।

टीम ने शाम करीब 7 बजे मौना–क्वेशाल–कलापातल सड़क पर पोखरी गांव के समीप से पिठोली जाने वाले मार्ग पर अभियान चलाया। सड़क से करीब दो किलोमीटर आगे टीम को सड़क किनारे पालीथीन से ढके हुए लीसे के टिन दिखाई दिए।

पालीथीन से ढककर सड़क किनारे रखा था लीसा
वन विभाग की टीम ने मौके पर पहुंचकर जांच की तो वहां कुल 52 टिन लीसा बरामद हुआ। टीम द्वारा आसपास तलाश किए जाने के बावजूद मौके पर कोई व्यक्ति नहीं मिला। इसके बाद टीम निकटवर्ती पिठोली गांव पहुंची और ग्रामीणों से बरामद लीसे के संबंध में जानकारी हासिल करने का प्रयास किया, लेकिन ग्रामीणों ने लीसे के बारे में अनभिज्ञता जताई।
विभागीय चिह्न नहीं मिलने पर अवैध मानकर किया सीज
वन विभाग के अनुसार बरामद लीसे के टिनों पर किसी प्रकार के विभागीय चिह्न भी नहीं पाए गए। ऐसे में प्रथम दृष्टया समस्त लीसे को अवैध मानते हुए वन विभाग ने उसे सीज कर अपने कब्जे में ले लिया।
इसके बाद बरामद 52 टिन लीसे को पिकअप वाहन में लादकर पहाड़पानी लीसा डिपो पहुंचाया गया, जहां उसे सुरक्षित रख दिया गया है। वन विभाग अब यह पता लगाने का प्रयास कर रहा है कि लीसा वहां किसने और किस उद्देश्य से रखा था।
अवैध गतिविधियों के खिलाफ जारी रहेगा अभियान
वन क्षेत्राधिकारी विजय भट्ट ने कहा कि वन अपराधों के विरुद्ध विभाग की कार्रवाई लगातार जारी रहेगी। उन्होंने स्पष्ट किया कि वन क्षेत्र में किसी भी प्रकार की अवैध गतिविधि को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा और नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।
कार्रवाई में ये वनकर्मी रहे शामिल
कार्रवाई वन क्षेत्राधिकारी विजय भट्ट के नेतृत्व में की गई। टीम में वन दरोगा बृजेश विश्वकर्मा, प्रदीप मौर्या, पद्मा दत्त पाण्डेय तथा वन आरक्षी अनिल बोरा, रमेश बिष्ट, बिपिन बिष्ट, पंकज रैक्वाल, मनोज कैड़ा और कुन्दन प्रसाद आदि शामिल रहे।


